फूड हिस्ट्री / नूडल्स पास्ता का भारतीय रूप है इडियप्पम, चावल के आटे घर पर कर सकते है तैयार



history of noodle pasta known in india Idiyappam and how to make Idiyappam
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history of noodle pasta known in india Idiyappam and how to make Idiyappam

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2019, 11:23 AM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. पास्ता कहां से आया, इसका कोई एक इतिहास नहीं है। दरअसल, आज हम जो पास्ता खाते हैं, मूलत: पास्ता वैसा नहीं था। शुरुआत में 'पास्ता' शब्द इटली के पारंपरिक नूडल्स के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा। नूडल्स पास्ता के भारतीय संस्करण कहलाने वाले इडियप्पम की शुरुआत कैसे हुई, बता रहे हैं मशहूर शेफ और प्रेजेंटेटर हरपाल सिंह सोखी...

इडि' यानी 'टूटा हुआ' , अप्पम का मतलब है 'पैनकेक'

  1. माना जाता है कि नूडल्स पास्ता चाइनीज डिश है जो 1271 में प्रसिद्ध यात्री मार्को पालो की इटली यात्रा के दौरान चीन से इटली पहुंची थी। 13वीं सदी के उत्तरार्द्ध में इटली में नूडल्स पास्ता को लोकप्रियता मिलनी शुरू हुई। धीरे-धीरे यह इटली की ही डिश मानी जाने लगी। नूडल्स पास्ता का भारतीय संस्करण है इडियप्पम। या यह भी कह सकते हैं कि इडियप्पम से ही संभवत: नूडल्स पास्ता की खोज हुई होगी क्योंकि इडियप्पम, नूडल्स पास्ता से भी काफी पहले से अस्तित्व में रहा है। 

  2. केरल, कर्नाटक और श्रीलंका में भी लोकप्रिय

    इडियप्पम मुख्यत: तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के दक्षिणी भाग में प्रमुखता से खाया जाता है। यह श्रीलंका में भी इतना ही लोकप्रिय है। 'इडियप्पम' का नाम तमिल शब्द 'इडि' से लिया गया है जिसका अर्थ है 'टूटा हुआ' और अप्पम का मतलब है 'पैनकेक'। तमिलनाडु के केरल से सटे इलाकों और केरल में इसे 'नूलप्पम' या 'नूलपट्टू' भी कहा जाता है। नूल का मतलब होता है धागा।

  3. कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों जैसे मंगलौर और उडुपी में इसे सेमिगे के नाम से जाना जाता है। इसे वहां चिकन जिसे 'तुलूवा चिकन' कहते है या फिश करी जिसे गस्सी कहते हैं, के साथ खाया जाता है। इसे नारियल दूध से बनी डिश 'रासायना' के साथ भी खाया जाता है। जाने-माने फूड हिस्टोरियन के.टी. अचाया ने लिखा है कि इडियप्पम और अप्पम जैसी डिशेज समुद्री तटों पर काजियार और कुवियार (फूड वेंडर्स) द्वारा बेची जाती थीं। इसका उल्लेख ईसा से 300 साल पूर्व से लेकर ईस्वीं 300 तक के दौरान रची गईं तमिल संगम काव्य रचनाओं जैसे पेरुम्पानुरु, कांची और सिलप्पाथिकरम में किया गया है। इसका मतलब है कि दक्षिण में ये डिशेज दो हजार साल से भी अधिक समय से चली आ रही हैं और इनकी रेसिपी इतने सालों के बाद भी वैसी ही बनी हुई हैं। 

  4. ऐसे करते हैं तैयार

    • अब थोड़ी बात इसकी रेसिपी की भी। इसे पारंपरिक रूप से बनाने में थैर्य रखने की जरूरत होगी। सबसे पहले चावल को पानी में अच्छे से भिगो लिया जाता है। कुछ देर के बाद इस चावल को बारीक पीसकर पेस्ट (बेटर) बना लिया जाता है।
    •  इस बेटर में थोड़ा-सा नमक और एक-दो चम्मच तेल मिलाकर उसे तब तक गैस स्टोव पर रख दिया जाता है, जब तक कि उसमें मौजूद पूरा पानी उड़ न जाए। बीच-बीच में इस बेटर को कलछी से हिलाना-डुलाना भी जरूरी है ताकि उसमें गुठलियां न पड़ने पाए। 
    • कुछ समय के बाद जब चावल का ये पेस्ट रोटी के आटे की तरह हो जाता है तो गैस बंद कर उसे थोड़ा ठंडा होने दिया जाता है। इसे फिर पीतल या लकड़ी के सांचे (आमतौर पर जिससे घरों में सेंव बनाई जाती है) में डालकर उनके नूडल्स बना लिए जाते हैं।
    • इन नूडल्स को इडली बनाने वाले या अप्पम बनाने के सांचे में डालकर करीब पांच से छह मिनट तक पका लिया जाता है। बस तैयार है इडियप्पम। 
    • नूडल्स के लिए आटा बनाने का आसान तरीका यह भी है कि सीधे चावल के आटे को ही पैन में पानी गरम कर उसमें तब तक भून लिया जाता है, जब कि पूरा पानी उड़ न जाए। इडियप्पम को काजू, नारियल दूध और टमाटर की एक खास चटनी के साथ परोसा जाता है।

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