दही, छांछ, कढ़ी इनमें से बारिश में क्या लेना ठीक और क्यों?

Dainik Bhaskar

Aug 20, 2018, 11:56 AM IST
बेसन में ग्लूटेन नहीं रहता, तो यह ग्लूटेन के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए भी है।
monsoon diet what is better kadhi curd of chachch
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लो कैलोरी होने के कारण एक गिलास में छांछ में 40 कैलोरी ही मिलती है, साथ ही लो फैट भी हैं, लेकिन प्रोटीन इसमें अच्छा है छाछ में यदि कच्चे उबले हुए केले को खाया जाए तो बेहद पौष्टिक डिश बन जाती है 

लाइफस्टाइल डेस्क. सामान्य दही, छाछ और कढ़ी तीनों के मूल में दही ही है। हर मौसम में इन अलग-अलग स्वरूपों का अपना महत्व है। लेकिन मानसून में दही और छांछ की बजाय कढ़ी पर ज्यादा जोर क्यों दिया जाता है? कढ़ी, क्यों दही के शेष दो अन्य स्वरूपों से बेहतर है? क्या है इसमें एेसा और शरीर को क्या लाभ देगी? न्यूट्रिशियन कविता देवगन से जानिए तीनों को न्यूट्रिएंट्स के माध्यम से - 

1. कढ़ी-बेस्ट
ये दही के साथ बेसन का भी न्यूट्रीशन देती है। इन दोनों को मिलाने से अधिक प्रोटीन, आयरन और फाइबर मिलता है। इसे बारिश में पी लिया तो सारी थकान दूर हो जाएगी। कढ़ी में फॉस्फोरस होने से ये हडि्डयों, दांतों के लिए अच्छी है। त्वचा भी अच्छी रहेगी, क्योंकि बेसन के कारण शरीर में कोलेजन बनता है। कढ़ी एंटीइन्फ्लेमेटरी होती है। इसमें मौजूद फॉलेट और विटामिन बी6 गर्भवती महिलाओं के लिए ताकतवर हैं। बेसन में ग्लूटेन नहीं रहता, तो यह ग्लूटेन के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए भी है। लो ग्लायसेमिक इंडेक्स की श्रेणी में है, तो मधुमेह के रोगी भी इसे ले सकते हैं। बारिश में लेना फायदेमंद, यह पहले स्थान पर है

2. छांछ -  बैटर
यह अपने आप में जादुई पेय है। हालांकि दही के सारे गुण इसमें हैं, लेकिन फिर भी इसमें दही से ज्यादा लाभ है। यह दही के मुकाबले हल्का है। जैसे-जैसे मथते जाते हैं, इसमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ते जाती है। साथ ही दही पचाने में जितना समय लगता है, उससे आधे से भी कम समय में यह पच जाता है। लो कैलोरी होने के कारण एक गिलास में 40 कैलोरी ही मिलती है, साथ ही लो फैट भी हैं, लेकिन प्रोटीन इसमें अच्छा है। छाछ में यदि कच्चे उबले हुए केले को खाया जाए तो बेहद पौष्टिक डिश बन जाती है। बारिश में ले तो सकते हैं, लेकिन दूसरे स्थान पर।

3. दही - गुड
कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी, गुड बैक्टीरिया जैसे गुणों वाला दही, ब्लड प्रेशर भी कम करता है, क्योंकि ये पेट में जाकर स्मॉल चेन फैटी एसिड्स बनाते हैं, जो बीपी कम करने में सहायक होते हैं। इसीलिए इसे खाने से मूड सुधर जाता है। इतना ही नहीं, यह दिमाग को भी तेज करता है। भले ही कोई प्रोटीन पचा सकें या नहीं, लेकिन दही में मौजूद प्रोटीन को लोग आसानी से पचा सकते हैं। इसे बादाम के साथ खाएंगे तो बादाम में मौजूद विटामिन डी और दही में मौजूद कैल्शियम शरीर को एक साथ मिलेगा। बारिश में खा तो सकते हैं, लेकिन कढ़ी या छांछ न मिलने पर। 

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