आयोडीन सर्वे / 76% भारतीय ही खाने में पर्याप्त आयोडीन लेते हैं और 47.8% ब्रांडेड नमक खाते हैं, एम्स ने किया सर्वे



AIIMS delhi survey says 76% of Indian households consume adequately iodised salt
X
AIIMS delhi survey says 76% of Indian households consume adequately iodised salt

  • शरीर में आयोडीन की जरूरत को लेकर देश के लोग कितने जागरुक, इससे जानने के लिए एम्स ने कराया सर्वे
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एक इंसान को खाने में रोजाना 15 मिग्रा आयोडीन लेना जरूरी जो घेंघा जैसे डिसऑर्डर से बचाता है
     

Dainik Bhaskar

Sep 09, 2019, 08:10 PM IST

हेल्थ डेस्क. 76 फीसदी भारतीय ही पर्याप्त मात्रा में आयोडीन युक्त नमक खााते हैं। यह बात दिल्ली एम्स के इंडिया आयोडीन सर्वे 2018-19 में सामने आई है। देशभर के लोगों में आयोडीन का स्तर क्या है और यह उनकी पहुंच में है या नहीं, इसे जानने के लिए सर्वे किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एक इंसान को खाने में रोजाना 15 मिग्रा आयोडीन लेना जरूरी है जो इसकी कमी से होने वाले डिसऑर्डर जैसे घेंघा से बचाता है। आयोडीन का यह स्तर देशा के 76 फीसदी लोगों में ही मिला है।
 

देश के 21,406 घरों में हुआ सर्वे

  1. सर्वे में देशभर के 21,406 घरों को चुना गया। इनके घरों में बनने वाले खाने में आयोडीन का स्तर जांचा गया। सर्वे में शामिल 55 फीसदी लोग ऐसे थे जो खाने में आयोडीन को लेकर जागरूक थे। वहीं, 61.4 फीसदी लोग ऐसे थे जो आयोडीन घेंघा नाम की बीमारी से बचाव के तौर पर ले रहे थे। आयोडीन खाने में लेना कितना जरूरी है, इसे लेकर 62.2 फीसदी शहरी और 50.5 फीसदी ग्रामीण ही जागरूक हैं।
     

  2. टीवी और रेडियो से हुए जागरूक

    सर्वे के मुताबिक, 56 फीसदी लोग नमक खरीदते समय उसके पैकेट पर लिखे आयोडीन के स्तर को पढ़ते हैं। वहीं, 21 फीसदी ऐसे हैं जो दुकानदार के कहने भर से ही मान लेते हैं कि लिए जाने वाले पैकेट में मौजूद नमक आयोडीन युक्त है। 74 फीसदी लोगों को आयोडीन से जुड़ी जागरूकता की जानकारी रेडियो और टीवी से मिली है। 

  3. 82 फीसदी लोग रिफाइन सॉल्ट और 12.7 फीसदी क्रिस्टल नमक का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा 5.3 फीसदी ऐेसे भी हैं जो नमक के टुकड़ों का प्रयोग करते हैं। शहरी क्षेत्र के 47.8 फीसदी लोग ऐसे हैं जो किसी ब्रांड का नाम खाना पसंद कते हैं। वहीं, 41.2 फीसदी ग्रामीण नमक को कीमत के आधार पर खरीदते हैं। सर्वे के आंकड़ों को देखा जाए तो आयोडीन की कमी से होने वाले डिसऑर्डर से बचाने के लिए लोगों को अभी और जागरुक किए जाने की जरूरत है। 

  4. नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल के मुताबिक, इस सफलता में राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों का अहम योगदान है। हमें और आगे जाना होगा। 2022 तक लक्ष्य को हासिल करने की जरूरत है। विनोद पॉल कहते हैं, सर्वे एक बेहतरीन प्रयास है कि प्रोग्रेस कहां तक पहुंची है। ऐसे राज्य जहां आयोडीन के प्रति जागरुकता कम है वहां इसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना