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मेडिकल साइंस / मधुमक्खियों के छत्तों में फैला जानलेवा संक्रमण, रानी मक्खी बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा वैक्सीन



bee vaccine save honeybees against American foulbrood
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bee vaccine save honeybees against American foulbrood

  • फिनलैंड की हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार की है वैक्सीन
  • छत्तों में सबसे ज्यादा फैलने वाली बीमारी अमेरिकन फाउलब्रूड से लड़ने की तैयारी
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, वैक्सीन को शुगर केक में मिलाकर दिया जाएगा

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 12:23 PM IST

हेल्थ डेस्क. वैज्ञानिकों ने खासतौर पर मधुमक्खियों के लिए एक वैक्सीन तैयार की है जो उन्हें बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से बचाएगी। इसे फिनलैंड की हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बनाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन अमेरिकन फाउलब्रूड नाम की बैक्टीरियल डिजीज से लड़ने के लिए बनाई गई है। ये बीमारी मधुमक्खियों की पूरी कॉलोनी को नष्ट कर देती है। उनका कहना है कि परागण के बाद मुधमक्खियां मर रही हैं और इनकी संख्या कम हो रही है जिसका असर खाद्य अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। एक छोटा सा प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकता है।

 

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रिसर्च से जुड़ी 5 खास बातें

  1. हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डेलियल फ्रेटक के अनुसार,यह वैक्सीन खाने योग्य है इसलिए आसानी से मधुक्खियों को बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसके अलावा शहद से तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित किया जा सकेगा। अमेरिकन फाउलब्रूड बैक्टीरिया से होने वाला संक्रामक रोग है जो पेनिबेसिलस लार्वो से फैलता है। यह संक्रमण तब होता है जब मधुक्खियों का लार्वा और प्यूपा विकसित हो रहा होता है। 

  2. वैक्सीन के अनुसार, इसे अभी और विकसित किया जा रहा है। कीट-पतंगों के रोग प्रतिरोधी तंत्र (इम्यून सिस्टम) में एंटीबॉडीज नहीं पाई जाती है इसलिए ऐसी स्थिति में बैक्टीरियल इंफेक्शन रोकने के लिए परंपरागत वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 

  3. शोधकर्ताओं ने एक शुगर केक का इस्तेमाल करके वैक्सीन देने का तरीका ढूंढा है। जिसे छत्ते में रख दिया जाता है जो करीब एक हफ्ते तक रानी मधुमक्खी खाती है। खाने के बाद इसके बैक्टीरिया मधुमक्खी के अंडों के रूप में बाहर निकल जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, अमेरिकन फाउलब्रूड को पूरी तरह से खत्म करना मुश्किल है। ऐसे में छत्तों को उजाड़ देना या संक्रमित हिस्सों को पता करके खत्म करना ही उपाय बचता है। 

  4. यह बीमारी कैसे फैलती है, इसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि बैक्टीरियल स्पोर्स (जीवाणु जो बढ़कर एक नया प्राणी हो जाता है) आसानी से मधुमक्खियों की कॉलोनी और छत्तों बिखर जाते हैं। छत्तों काे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर फैलते हैं। बैक्टीरियल स्पोर्स का जीवनकाल करीब 50 साल होता है जिन पर तापमान अधिक बढ़ने और कम होने का प्रभाव नहीं पड़ता है।

  5. पर्यावरण के लिए काम करने संगठन ग्रीनपीस के मुताबिक दुनियाभर में 80 फीसदी परागण घरेलू और जंगली मधुमक्खियां करती हैं। ग्रीनपीस के अनुसार, पेस्टिसाइड्स, उजड़ते छत्ते, सूखा, ग्लोबल वॉर्मिंग और वायु प्रदूषण के कारण मधुमक्खियां मर रही हैं। संगठन का कहना है कि मानव निर्मित पेस्टिसाइड्स और इनके वासस्थान को उजाड़ना खासतौर बड़ी वजहे हैं।

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