डाइट सलाह / कैलोरी कॉन्सेप्ट: दुनिया का सबसे बड़ा झूठ



calorie concept is a lie- diet salah by dr shikha sharma
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calorie concept is a lie- diet salah by dr shikha sharma

Dainik Bhaskar

Mar 03, 2019, 02:22 PM IST

हेल्थ डेस्क. आज सेहत के प्रति जागरूक लोग जब भी स्वास्थ्य की बात करते हैं तो वे सबसे पहले इसी की पड़ताल करते हैं कि वे जो खा या पी रहे हैं, उसमें कैलोरी कितनी है? कहीं वे अपनी डाइट के जरिए जरूरत से ज्यादा कैलोरी तो नहीं ले रहे हैं? लेकिन फिर भी इस कॉन्सेप्ट को फॉलो करने वाले लोग इच्छित वजन नहीं घटा पाते। कारण है कि यह कॉन्सेप्ट एकदम झूठ है। आज डाइट एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. शिखा शर्मा पाठकों को बता रही हैं कि क्या है इस कैलोरी कॉन्सेप्ट की वास्तविकता? 

कैलोरी को मेटाबॉलिज्म से मिलाने से हुआ कन्फ्यूजन

  1. इस कॉन्सेप्ट में क्या गड़बड़ी है, इसे एक उदाहरण से समझेंगे। कैलोरी कॉन्सेप्ट के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए एक आराम पसंद महिला को रोजाना 1500 से 1800 कैलोरी और सक्रिय महिला को करीब 2200 कैलोरी की जरूरत होती है। यानी अगर एक आराम पसंद महिला रोज 1500 से अधिक कैलोरी लेगी तो उसका वजन अधिक हो जाएगा। कम लेने पर उसका वजन नियंत्रण में रहेगा।

    आइए अब पूरे दिनभर का 1500 कैलोरी वाला एक डाइट प्लान बनाते हैं। कैलोरी वैल्यू के अनुसार महिला इस डाइट प्लान की सारी चीजें खा सकती हैं। चूंकि वह कैलोरी की लिमिट के भीतर ही सबकुछ कंज्यूम करेगी। इसलिए इसके अनुसार तो उसका वजन भी नहीं बढ़ना चाहिए। 

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  2. चूंकि कैलोरी कॉन्सेप्ट के अनुसार आपकी रोजाना कैलोरी की खपत 1500 से कम है। यानी आप कम खा रही हैं और इस तरह वजन कम होना चाहिए। लेकिन खुद ही सोचिए कि आप डाइट पर हैं तो क्या इस तरह खाने से वजन वाकई कम होगा या बढ़ेगा? 
    कैलोरी कॉन्सेप्ट का संबंध वजन से नहीं है। यही वजह है कि जो लोग इस कॉन्सेप्ट को फॉलो करते हैं, वे इच्छित वजन घटा ही नहीं पाते। 

  3. तो गड़बड़ कहां हुई? 
    इससे पहले कि मैं कैलोरी के इस कॉन्सेप्ट के साथ जुड़ी समस्या की बात करुं, यहां इस टर्म के इतिहास को भी समझना जरूरी है। 'कैलोरी' शब्द लेटिन शब्द 'कैलोर' से आया है जिसका अर्थ होता है गर्मी। कैलोरी की अवधारणा का श्रेय फ्रेंच वैज्ञानिक निकोलस क्लीमेंट को जाता है जिन्होंने सबसे पहले 1824 में एक जर्नल में इसकी परिभाषा दी थी। उस समय कैलोरी का इस्तेमाल हीट इंजन के संदर्भ में किया गया था। हीट इंजन में सबसे पहले कोयले को जलाया जाता है। उससे जो गर्मी पैदा होती है, वह पानी को गर्म करने के काम आती है। पानी के गर्म होने से वाष्प पैदा होती है जो अंतत: इंजन को गतिशील करती है। कोयले को जलाने की इस प्रक्रिया को 'कम्बशन' कहा जाता है। 

  4. इंजन में कोयला जलने की इस प्रक्रिया को ही मानव शरीर में 'मेटाबॉलिज्म' के साथ कन्फ्यूज कर दिया गया जबकि मेटाबॉलिज्म बहुत ही अलग प्रक्रिया है। मेटाबॉलिज्म कई तरह के बायोलॉजिकल रिएक्शन्स की सीरीज होती है जिसमें भोजन को ब्रेक कर विटामिन्स, मिनरल्स, अमिनाे एसिड्स और जरूरी फैट्स के सार को एब्जॉर्ब कर उसका इस्तेमाल कोशिकाओं के निर्माण, कोशिकीय ऊर्जा और शरीर के कायाकल्प में किया जाता है। जिसमें मेटाबॉलिज्म की यह प्रोसेस जितनी फास्ट होगी, उसमें एनर्जी को बर्न करने की कैपेसिटी उतनी ही अधिक होगी और वह उतना ही चुस्त और तंदुरुस्त होगा। इस कन्फ्यूजन को क्रिएट किया था अमेरिकी वैज्ञानिक विल्बर ऑलिन एटवाटर ने जिन्होंने हीट इंजन में प्रयुक्त किए गए 'कैलोरी' शब्द को शरीर के साथ जोड़ दिया। और फिर हम भी दशकों से उसी "कैलोरी' को ढोते आए। आज भी ढो रहे हैं। 

  5. तो क्या करें?
    अगर वाकई वजन कम करना है तो कैलोरी काउंट मत कीजिए। समय पर खाइए, समय पर पर्याप्त नींद लीजिए और बैलेंस्ड डाइट लीजिए। बैलेंस्ड डाइट मतलब सब चीजें थोड़ी-थोड़ी जरूर लीजिए। साथ ही थोड़ी शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। इससे शरीर के मेटाबॉलिज्म की प्रोसेस तेज हो सकेगी और आप चुस्त-तंदुरुस्त बने रहेंगे। 

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