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रिपोर्ट / दुनियाभर में हर साल समय से पहले होने वाली 90 लाख मौतों का कारण पर्यावरण प्रदूषण

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2019, 08:04 PM IST


Environment damage causes 90 lakh global deaths says Global Environment Outlook report
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Environment damage causes 90 lakh global deaths says Global Environment Outlook report
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  • 70 देशों के 250 वैज्ञानिकों ने की रिसर्च, 740 पेजों की ग्लोबल एनवायर्नमेंट आउटलुक रिपोर्ट की गई जारी
  • रिसर्च के मुताबिक, मौतों का बड़ा कारण शहरों में गैसों का उत्सर्जन, दूषित पानी और पेड़ों का कटना 
  • दुनियाभर में समय से पहले होने वाली एक चौथाई मौतें और बीमारियों का कारण प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान

साइंस डेस्क.  संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनियाभर में पर्यावरण प्रदूषण के कारण हर साल समय से पहले 90 लाख लोगों की मौत हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की ग्लोबल एनवायर्नमेंट आउटलुक सीरिज में करीब 6 साल तक अध्ययन किया। 740 पेजों की रिपोर्ट में परिणाम के तौर पर बताया गया कि दुनियाभर में समय से पहले होने वाली एक चौथाई मौतें और बीमारियां प्रदूषण और पर्यावरण क्षतिग्रस्त होने के कारण हाे रही हैं।

दूषित पानी से हर साल 14 लाख मौतें

  1. शोध में 70 देशों के 250 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कैसे गरीब और अमीर देशों के बीच खाई गहरी होती जा रही है। चीजों का अधिक उपयोग, प्रदूषण, खाने की बर्बादी, गरीबी के साथ बीमारियां भी बढ़ रही हैं।

  2. रिपोर्ट के मुताबिक, इन मौतों का कारण शहरों में गैसों का उत्सर्जन, दूषित पानी और पारिस्थितिक तंत्र को क्षति पहुंचना है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ने से समय से पहले कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा समुद्र का स्तर बढ़ने से तूफान आने की आशंका भी बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खाने की बर्बादी को रोककर ग्रीन हाउस गैसों में 9 फीसदी की कमी की जा सकती है।

  3. शोध में सामने आया कि साफ पानी के अभाव में हर साल 14 लाख लोगों की मौत हो जाती है। ऐसा डायरिया और संक्रमण जैसी बीमारियों के कारण होता है जिसे रोका जा सकता है। समुद्र में बढ़ते रसायन सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कृषि का क्षेत्र बढ़ने से रहने के लिए जमीन का दायरा कम हो रहा है और पेड़ों का कटाव बढ़ रहा है। 

  4. रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ एयर पॉल्यूशन से हर साल 60 से 70 लाख मौतें होती हैं। खाद्य उत्पादन में बढ़ा एंटीबायोटिक का प्रयोग सुपरबग को ड्रग रेसिस्टेंट बना रहा है जो समय से पहले होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। 

  5. 2015 में पेरिस जलवायु समझौते के दौरान हर देश ने गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के साथ दुनिया का तापमान 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड करने का वादा किया था। लेकिन इस दौरान प्रदूषण, वनों की कटाई और बदलती खाद्य शृंखला के बारे में काफी गहराई से नहीं सोचा गया। 

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