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कितना फायदेमंद है प्रोटीन पाउडर?

एक वर्ष पहले
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लाइफस्टाइल डेस्क. हृष्ट-पुष्ट और आकर्षक शरीर की चाहत में जिमिंग करने वाले युवा एक सख़्त डाइट और फिटनेस रुटीन का पालन करते हैं। अक्सर सभी जिमिंग करने वाले युवा हैवी वर्कआउट के साथ प्रोटीन के विकल्प यानी प्रोटीन सप्लीमेंट का सेवन करना उचित मानते हैं। पर क्या इनका इतना सेवन उचित है? इसके नुकसान क्या हैं? प्रोटीन के सही विकल्प क्या हैं? ऐसे तमाम सवालों के जवाब दिए मेदांता मेडिसिटी की इंटरनल मेडिसिन की निदेशक डॉ. सुशील कटारिया ने। जानिए प्रोटीन पाउडर से जुड़ी खास बातें....

1) 2 प्रकार के होते हैं प्रोटीन पाउडर

ये सप्लीमेंट्स प्रोटीन डाइट के विकल्प के तौर पर लिए जाते हैं। ये अतिरिक्त वज़न कम करने में सहायक तथा मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने वाले माने जाते हैं। प्रोटीन के इन विकल्पों को तैयार करने के लिए विभिन्न स्रोतों से प्रोटीन लिया जाता है जैसे पौधे (सोयाबीन, मटर, चावल और आलू) या अंडे या दूध आदि। इसके बाद इन विकल्पों में शक्कर, कृत्रिम गंध, विटामिन्स और खनिज तत्व मिलाए जाते हैं।

ये प्रोटीन सप्लीमेंट्स पाउडर, शेक या कैप्सूल के रूप में होते हैं। इनके प्रोटीन पर गौर करें तो आमतौर पर सप्लीमेंट्स में दो प्रकार के प्रोटीन मौजूद होते हैं- वे (whey) और केसिन (casein)। इन्हें दूध से निकाला जाता है। ये अमीनो एसिड के अच्छे स्रोत होते हैं। अधिकतर जिम जाने वाले युवा ‘वे’ प्रोटीन का सेवन करते हैं। यह एक तेज़ी से पचने वाला प्रोटीन है वहीं केसिन को तुलनात्मक रूप से पचने में काफ़ी समय लगता है। लेकिन यह जान लेना भी ज़रूरी है कि ‘वे’ प्रोटीन में ग्लोब्यूलर प्रोटीन मौजूद होता है जो शरीर को फ़ायदा कम, नुक़सान अधिक पहुंचाता है।

प्रोटीन सप्लीमेंट का लगातार सेवन शरीर को कई तरह से नुक़सान पहुंच सकता है। प्रोटीन पाउडर के सेवन से इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है। चूंकि ये व्यावसायिक रूप से तैयार होते हैं, लिहाजा इनमें क्या-क्या मौजूद है यह जानना ज़रूरी है।

  • कुछ प्रोटीन पाउडर में अधिक विषाक्त धातु जैसे सीसा, कैडमियम, आर्सेनिक और पारा आदि होती हैं। इस कारण सिरदर्द, थकान, कब्ज़ और मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। 
  •  ‘वे’ प्रोटीन में कुछ हॉर्मोन और बायोएक्टिव पेप्टाइड्स होते हैं जो मुंहासों की आशंका बढ़ाते हैं। 
  • कुछ ‘वे’ प्रोटीन सप्लीमेंट में शक्कर के रूप में अतिरिक्त कार्बाेहाइड्रेट मौजूद होते हैं जो फैट घटाने के बजाय बढ़ाते हैं। अत्यधिक सेवन से हृदय सम्बंधी ख़तरा भी जुड़ा हुआ है। पेट सम्बंधी रोग भी हो सकते हैं। 
  • प्रोटीन पाउडरों के सेवन से समय के साथ ओस्टियोपोरोसिस (हडि्डयों में कमज़ोरी) और किडनी सम्बंधी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। 
  • इन सप्लीमेंट का उपयोग करने वाले लोग इनके सेवन के दूसरे पहलुओं पर ध्यान नहीं देते। जैसे पानी की सही मात्रा, विटामिन, खनिज तत्व और फाइबर का सही मात्रा में सेवन भी शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

कही-सुनीं बातों में न आएं। अक्सर युवा दूसरों की सलाह पर प्रोटीन पाउडर का सेवन शुरू कर देते हैं, लेकिन यह बिल्कुल भी सुरक्षित और प्रभावी नहीं है। तथ्य यह है कि प्रोटीन पाउडर में सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं होेते जो संतुलित भोजन को पूरा करने के लिए जरूरी हैं। इसलिए इसका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए और किसी भी प्रोटीन पाउडर के सेवन से पूर्व पोषण विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। 

प्राकृतिक प्रोटीन के स्रोत जैसे- दूध, अंडा  और फल के मुकाबले प्रोटीन पाउडर  में पोषक तत्वों का संयोजन असंतुलित होता  है। इन तत्वों का घनत्व भी अधिक होता  है जिस कारण शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता  है। प्राकृतिक प्रोटीन के लिए डेयरी उत्पादों को अपने भोजन में शामिल करें। कददू के बीज,पनीर, बटर, बादाम, ग्रीक योगर्ट भी प्रोटीन से भरपूर होते हैं।

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