मिरेकल बेबी / शरीर से बाहर धड़कता है बच्ची का दिल, जन्मजात बीमारी के कारण 14 महीने तक चला इलाज अब स्वस्थ



Miracle baby born with her heart outside her chest finally able to return home
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Miracle baby born with her heart outside her chest finally able to return home
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  • 2017 में हुई ब्रिटिश महिला की हुई थी सिजेरियन डिलीवरी, डॉक्टर्स ने करीब एक साल बाद दी बच्ची को घर ले जाने की अनुमति
  • ब्रिटेन में एक्टोपिया कॉर्डिस का पहला ऐसा मामला जिसमें बच्चे को बचाया जा सका 
  • भारत में 2009 में आया था ऐसा मामला, एम्स दिल्ली में हुई थी सफल सर्जरी 

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 06:04 PM IST

हेल्थ डेस्क.  ब्रिटेन में एक ऐसी बच्ची का जन्म हुआ है, जिसका दिल शरीर से बाहर था। डॉक्टर ने इस जन्मजात बीमारी को एक्टोपिया कॉर्डिस बताया है। करीब 14 महीने के संघर्ष और इलाज के बाद बच्ची अब स्वस्थ है। अस्पताल प्रशासन ने पेरेंट्स को घर ले जाने की अनुमति दे दी है। भारत में ऐसा मामला 2009 में आया था। एम्स दिल्ली के डॉक्टर्स ने 10 दिन के शिशु का सफल ऑपरेशन किया था।

गर्भावस्था के नौवें महीने में पता चला

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    • ब्रिटेन का यह पहला मामला है, जब एक बच्चे को जन्मजात एक्टोपिया कॉर्डिस होने के बाद बचाया जा सका है। 

    • गर्भावस्था के नौवें महीने में जांच के दौरान नाओमी फिंडले को बच्चे में बीमारी की बात पता चली थी। स्कैनिंग के दौरान बच्ची का हृदय शरीर के बाहर विकसित हो रहा था। ब्रिटेन के ईस्ट मिडलैंड्स कंजेनिटल हार्ट सेंटर में 14 करीब महीनों के दौरान बच्ची की कई सर्जरी हुईं।

  2. क्या है इक्टोपिया कॉर्डिस

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    इक्टोपिया कॉर्डिस एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें हृदय जन्म के समय अपने नियत जगह पर न होकर छाती के बाहर उभर आता है या उसके आसपास के हिस्सों में पाया जाता है। साइंस अब तक इसके होने की वजह का पता नहीं लगा पाया है। सर्जरी की मदद से बच्चे को बचाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में जन्म के समय ही बच्चे की मौत हो जाती है।

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    चिल्ड्रेन इंटेंसिव केयर के कंसल्टेंट पैट्रिक डेविस के मुताबिक, विशेषज्ञों ने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए एक खास तरह की शील्ड तैयार की थी। इलाज के लिए बड़ी टीम तैयार की गई थी, जिसमें फिजियोथैरेपिस्ट, प्ले स्पेशलिस्ट, नर्स और एडमिन टीम ने अहम रोल अदा किया है। बच्ची अब सामान्य जीवन जी सकती है। इलाज के अगले चरण में एक्सपर्ट शरीर को सीने की ओर से सपोर्ट देने की वाली हड्डी को तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

  4. मां नाओमी का कहना है कि लंबे वक्त के बाद बच्ची घर आई है। यह हमारे लिए बेहद यादगार लम्हा है। उसने जीना शुरू कर दिया है। बच्ची के पिता वेनेलोप ने दिन-रात देखभाल के लिए सात लोगों की टीम तैनात की है।

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