खतरे में राजा / कुत्तों से फैलने वाले वायरस ने गिर के जंगल में अब 20 से अधिक शेरों का किया शिकार



more than 20 lion killed in gir forest national park gujrat by CDV virus
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more than 20 lion killed in gir forest national park gujrat by CDV virus

  • शेरों की देखरेख, स्कैनिंग और ट्रैकिंग के लिए 585 कर्मचारियों की टीम नजर रख रही है
  • यह वायरस ज्यादातर कैनाइन फैमिली के भेड़िया, लोमड़ी और कुत्तों को संक्रमित करता है

Oct 03, 2018, 03:22 PM IST

हेल्थ डेस्क. 100 साल से भी अधिक पुराना गुजरात का गिर वन्यजीव अभ्यारण्य चर्चा में है। पिछले एक हफ्ते में यहां करीब 20 से अधिक शेरों की मौत हो चुकी है। इन्हें एशियाई शेर कहते हैं जो पूरी दुनिया में सिर्फ गिर राष्ट्रीय उद्यान में पैदा होते हैं। इनकी मौत का कारण सीडी (कैनाइन डिस्टेंपर वायरस) वायरस बताया जा रहा है। शेरों की देखरेख, स्कैनिंग और ट्रैकिंग के लिए 585 कर्मचारियों की टीम नजर रख रही है। इस वायरस की वजह से तंजानिया के सेरेंगेटी रिजर्व में 1000 शेरों की मौत हो गई थी। जानते हैं वायरस और शेरों की स्थिति के बारे में....

 


 

  • सेंपल में वायरस की पुष्टि

    • न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक गिर के जंगल की दलखानिया रेंज में अब 21 शेरों की मौत हो चुकी है।
    • जूनागढ़ के मुख्य वन संरक्षक का कहना है कि जंगल के किसी भी क्षेत्र में अब शेरों की मौत नहीं हुई है। 31 शेरों को समरिणी क्षेत्र से अलग किया गया है। इन्हें आइसोलेशन में रखा गया है और जांच की जा रही है। साथ ही जरूरी सावधानी बरती जा रही है।
    • हालांकि गुजरात वन विभाग ने सोमवार को जसाधर ऐनिमल केयर सेंटर में 11 शेरों की मौत की पुष्टि की है।
    • संक्रमित शेरों के सेंपल को पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजा गया था जहां प्रारंभिक रिपोर्ट में वायरस की पुष्टि हुई है। 
       

  • क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस

    • कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बेहद खतरनाक वायरस है, जिसके संक्रमण के बाद जानवर को बचाना काफी मुश्किल होता है। यह वायरस ज्यादातर कैनाइन फैमिली के रकून, भेड़िया, लोमड़ी और कुत्तों को संक्रमित करता है। खासकर कुत्तों के जरिए यह वायरस दूसरे जानवरों में फैलता है।
    • कैनाइन डिस्टेंपर वायरस कुत्ते को संक्रमित करने के बाद श्वांस नली, किडनी और लिवर को जकड़ता है। नतीजन हाई फीवर, लाल आंखों और नाक-कान से पानी निकलता है।
    • कई बार ये बीमारी खराब वैक्सीन से भी फैल जाती है। हालांकि ऐसा मामला बहुत कम ही देखने को मिलता है। वायरस की जांच के लिए बायोकेमिकल टेस्ट और यूरिन की जांच की जाती है। 

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