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  • More Than 700 Tapeworms Found In The Body Of A 46 year old Man, Had Reached The Hospital After Having Multiple Seizures

46 साल के इंसान के शरीर में मिले 700 से अधिक टेपवर्म, कई बार दौरे पड़ने के बाद पहुंचा था हॉस्पिटल

2 वर्ष पहले
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  • डब्ल्यूएचओ ने 2015 में दूषित खानपान से होने वाली मौंतों की एक वजह टीनिया सोलियम को माना था
  • एमआरआई स्कैन से पुष्टि हुई थी, इलाज का पहला चरण पूरा, अधपके मांस के जरिए शरीर में पहुंचा था

बीजिंग. चीन के 46 साल वर्षीय झू जॉन्गफा के शरीर में 700 से अधिक परजीवी टेपवर्म पाए गए। ये दिमाग और गुर्दे तक पहुंच चुके थे। पेशे से मजदूर झू को कई बार दिमागी दौरे पड़ने के कारण हॉस्पिटल ले जाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि टेपवर्म के अंडे पेट तक पहुंच चुके हैं और ब्लड के जरिए पूरे शरीर में पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, टेपवर्म अधपके सूअर के मांस के जरिए पहुंचा है और अपनी संख्या बढ़ा रहा था। 

1) डब्ल्यूएचओ ने 2015 में जारी की थी एडवाइजरी

डॉक्टरों का कहना है कि झू टीनिएसिस से पीड़ित था। यह टेपवर्म टीनिया सोलियम संक्रमण से होने वाली बीमारी है। टेपवर्म का लार्वा अधपके सूअर के मांस के जरिए शरीर में पहुंचा। टेपवर्म के अंडे दूषित खाने और अधपके सूअर के मांस के लिए शरीर में पहुंते हैं और बीमारी की वजह बनते हैं। करीब 2 महीने तक अंडे शरीर में रक्त के जरिये सर्कुलेट होते हैं इसके बाद ये मैच्योर टेपवर्म में तब्दील होते हैं। 

न्यूजडेस्क के मुताबिक, झू का कहना है कि उसने एक महीने पहले सूअर का मीट खाया था, वह पूरी तरह से पका था या नहीं, यह याद नहीं है। खाने के कुछ हफ्ते बाद दौरे पड़ने पर उसने डॉक्टर से सम्पर्क किया। डॉक्टरों ने बताया, संक्रमण की स्थिति में तेज सिरदर्द, आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, दौरे पड़ना और भूलने के लक्षण दिखते हैं। कई बार लक्षण संक्रमण के कुछ हफ्तों बाद दिखाई देते हैं।

झियांग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से सम्बद्ध हॉस्पिटल के डॉ. हुआंग जियानरॉन्ग के मुताबिक, दिमाग और सीने का एमआरआई स्कैन किया है। रिपोर्ट में टेपवर्म की पुष्टि हुई। मस्तिष्क के अलावा फेफड़े और सीने की मांसपेशियों में भी ये पाए गए। अलग-अलग मरीजों में इसके लक्षण भी अलग-अलग दिखते हैं। झू को दौरे आने की समस्या थी, कुछ मरीज बेसुध तक हो जाते हैं। 

डॉ हुआंग के मुताबिक, एंटी-पैरासिटिक दवाएं देकर टेपवर्म और लार्वों को खत्म किया गया है। शरीर पर इसका असर कम करने के लिए भी ट्रीटमेंट किया जा रहा है। पहले चरण का इलाज सफल रहा है, लेकिन इलाज पूरा नहीं हुआ है। लंबे समय तक इसका असर कितना होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2015 में दूषित खानपान से होने वाली मौंतों की एक अहम वजह टीनिया सोलियम को माना था।