मैदा और चावल डायबिटीज का खतरा बढ़ाते हैं, डाइट में कच्ची सब्जियां और फल लेना फायदेमंद

2 वर्ष पहले
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  • विदेशों के मुकाबले भारत में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज, कारण; खानपान में प्रोसेस्ड चीजों का अधिक इस्तेमाल और बढ़ता वजन
  • देश में कुल मरीजों में 98 फीसदी टाइप-2 और मात्र 2 फीसदी टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे

हेल्थ डेस्क. डायबिटीज की वजह चाहें जेनेटिक हो या बढ़ती उम्र का असर, दोनों ही मामलों में खानपान पर कंट्रोल रखना जरूरी है। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा और चावल डायबिटीज होने के खतरे और ब्लड शुगर बढ़ाने का काम करते हैं। वर्ल्ड डायबिटीज डे पर भास्कर ने जसलोक हॉस्पिटल, मुंबई के कंसल्टेंट डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. शैवाल चंडालिया से जाना खानपान से डायबिटीज का कनेक्शन... 
 

1) डायबिटीज से जुड़े सवाल-जवाब

डायबिटीज एक लाइफस्टाइल समस्या हैं। इसके दो कारण हैं पहली जेनेटिक, दूसरी बिगड़ी लाइफस्टाइल। एक्सरसाइज से दूरी और डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा, इस्तेमाल करना, इसके मामलों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह बनता है। इसलिए जरूरी बात है कि वजन कंट्रोल करें और जंक व प्रोसेस्ड फूड से बचें।

ऐसे लोग जिनके पेरेंट्स में डायबिटीज के मामले देखे गए थे, उनमें बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। भारतीयों में खाने हाई रिफाइंड कार्ब शामिल रहता है इसलिए डायबिटीज के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। यही दूसरी पीढ़ी में मरीजों की संख्या बढ़ाने का काम कर रही है।     

हां, रिस्क होता है लेकिन जिनकी फैमिली हिस्ट्री नहीं है उनमें खतरा नहीं होता। सामान्य इंसान जिनके माता-पिता को डायबिटीज नहीं है, शरीर का वजन सामान्य है तो मिठाई खाने से डायबिटीज नहीं हो सकती। देश में 98 फीसदी लोगों को टाइप-2 डायबिटीज और मात्र 2 फीसदी लोग टाइप-1 डायबिटीज से जूझते हैं।

आजकल कई विकल्प हैं। शुगर फ्री मिठाइयां और अन्य चीजें ले सकते हैं क्योंकि ये सामान्य शुगर के मुकाबले सुरक्षित हैं। कई रिसर्च में भी इसकी पुष्टि हुई है।     

दुनियाभर में 35 साल से कम के ऐसे युवा जो डायबिटीज से जूझते हैं उनमें 50 फीसदी टाइप-1 और 50 फीसदी टाइप-2 डायबिटीज के रोगी होते हैं। इसके मामले कम उम्र के बच्चों और युवाओं में बढ़ रहे क्योंकि जंक फूड खाने से उनका वजन जरूरत से अधिक बढ़ रहा है। शरीर में चर्बी बढ़ने पर इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ जाता है और जो बीमारी की वजह बनता है।

  इसे एक अमेरिकन स्टडी से समझा जा सकता है जिसे नाम दिया था डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम। इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनके माता-पिता डायबिटीज के रोगी थे। शोध में शामिल लोगों को डाइट में हेल्दी फूड लेने और रोजाना एक्सरसाइज की सलाह दी गई। नतीजा निकला कि ऐसे लोगों में 60 फीसदी तक डायबिटीज होने का खतरा कम हो गया। अगर डाइट और वर्कआउट रुटीन को फॉलो किया जाए तो इंसान खुद ही इसे कंट्रोल कर सकता है।  

डायबिटीज को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है लेकिन ब्लड शुगर कंट्रोल करके सामान्य जीवन जिया जा सकता है। इसकी गंभीरता बढ़ने से रोककर दूसरे अंगों को नुकसान होने से भी बचाया जा सकता है। डायबिटीज कुछ मामलों में वापस हावी हो सकती है, जैसे किसी ने वजन को कंट्रोल किया है और ब्लड शुगर सामान्य है लेकिन कुछ समय बाद वजन बढ़ता है वह इंसान डायबिटीज से दोबारा प्रभावित हो सकता है। 

सबसे बेहतर है कि डाइट में अनाज, दाल, सब्जियों को शामिल करें। खासतौर पर चावल, व्हाइट ब्रेड, नान, मैदा, मिठाइयां, जूस, नारियल पानी, कोल्ड ड्रिंक लेने से बचें।

  काफी हद तक डायबिटीज कंट्रोल की जा सकती है। योग और प्राणायाम तनाव को कम करते हैं इससे डायबिटीज का खतरा घट जाता है। योग और प्राणायाम करने से पहले आई चेकअप जरूर कराएं। कई बार देखा गया है कि डायबिटीज के मरीजों में आंख में ब्लीडिंग की शिकायत होती है, इसलिए आई चेकअप के बाद भी योग और प्राणायाम करें। ऐसा न हो पाने पर वॉक या ब्रिस्क वॉक भी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है।  

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