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वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक / स्टीरॉयड का अधिक इस्तेमाल भी ग्लूकोमा का कारण, समय-समय पर कराएं आई चेकअप

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2019, 04:53 PM IST


world glaucoma week 2019 what is glaucoma and precautions to away from glaucoma
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world glaucoma week 2019 what is glaucoma and precautions to away from glaucoma
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हेल्थ डेस्क. दुनियाभर में 6 फीसदी लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं और यह आंखों की रोशनी खत्म होने की दूसरी सबसे बड़ी वजह भी है। एक्सपर्ट के मुताबिक, यह किसी भी उम्र में हो सकता है। समय से पहले इसकी जानकारी मिलने पर इलाज संभव है। दुनियाभर में ऐसे मामलों में कमी लाने के लिए हर साल 10-16 मार्च तक वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक मनाया जाता है। एक्सपर्ट्स से जानिए क्या है ग्लूकोमा और इससे कैसे बचा जा सकता है....

ग्लूकोमा के 50 फीसदी मामले में सामने आ पाते हैं

  1. क्या है ग्लूकोमा

    ग्लूकोमा होने पर आंखों की ऑप्टिक नर्व में दबाव बढ़ने  लगता है। ऐसा किसी भी उम्र में हो सकता है। इसके मामले ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलते हैं जिनकी फैमिली हिस्ट्री होती है या फिर किसी दुर्घटना के कारण सिर या आंखों पर चोट पहुंचती है। लगातार आईड्रॉप, ओरल मेडिसिन और क्रीम में स्टीरॉयड का इस्तेमाल भी ग्लूकोमा का कारण बन सकता है। आंखों की सर्जरी के कुछ गंभीर मामले भी इसकी वजह बन सकते हैं। 

  2. डॉक्टरी सलाह से समय पर कराएं आई टेस्ट

    • इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन काफी हद आंखों की रोशनी दुरुस्त की जा सकती है। ग्लूकोमा के ज्यादातर मरीजों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है, यह तब पता चलता है जब रोशनी काफी हद तक कम हो चुकी होती है।
    • एक्सपर्ट के मुताबिक, ग्लूकोमा के मात्र 50 फीसदी मामले में ही सामने आ पाते हैं। इसका बेहतर उपाय है समय-समय पर आंखों की स्क्रीनिंग। समय पर आई स्पेशलिस्ट से जांच कराएं ताकि आंखों और ऑप्टिक नर्व पर पड़ रहे दबाव को जांचा जा सके।
    • ग्लूकोमा टेस्ट, दवाओं और सर्जरी की मदद इस रोग का इलाज किया जाता है। ग्लूकोमा के ज्यादातर मामलों को आईड्रॉप से ही ठीक किए जा सकते हैं।

  3. इन बातों का ध्यान रखें

    • स्मोकिंग से दूरी बनाएं और कैफीनयुक्त पेय की मात्रा घटाएं।
    • डाइट में हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं और पानी अधिक पींए।
    • ग्लूकोमा के मरीजों को शीर्षासन नहीं करना चाहिए।

     
    एक्सपर्ट पैनल
    डॉ. गणेश दिलीप कुमार पिल्लई,  ऑप्थेमोलॉजिस्ट, एम्स, दिल्ली
    डॉ. नेहा चतुर्वेदी, ऑप्थेमोलॉजिस्ट, एम्स, दिल्ली
    डॉ. प्रशांत सिंह, ऑप्थेमोलॉजिस्ट, एएसजी आई हॉस्पिटल, भोपाल
    डॉ. अर्पिता बसिया, ऑप्थेमोलॉजिस्ट, एएसजी आई हॉस्पिटल, भोपाल

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