वर्ल्ड हार्ट डे / दिल की बीमारी होने की उम्र में हमारा देश दुनिया से 10 साल आगे हो गया



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  • दिल को बचाने का एक्सपर्ट फॉर्मूला;  रोजाना दो फल और दो कटोरी सलाद खाएं; तनाव कम करके नींद पूरी लें
  • जसलोक हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर, मुंबई के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निहार मेहता ने दिए खास टिप्स
  • दुनिया में हृदय रोग 55 साल की उम्र में होते हैं तो भारत में यही उम्र 45 साल हो चुकी है
  • भारत में 60 फीसदी लोगों को हार्ट अटैक के बाद पता चलता है कि उन्हें दिल की गंभीर बीमारी है
  • बच्चों को भविष्य में दिल का रोगी बनने से बचाने के लिए आज से ही बदलाव लाने होंगे
     

Dainik Bhaskar

Sep 29, 2019, 08:15 AM IST

अंकित गुप्ता (हेल्थ डेस्क) दिल के बढ़ते रोगों (कार्डियो वेस्कुलर डिसीज) के पीछे खराब लाइफस्टाइल की दो बातें ऐसी हैं जिसे हम अक्सर नजरअंदाज करते हैं, नींद और तनाव। तनाव के कारण सीधे तौर पर नींद पूरी नहीं होती है। ये दोनों ही गड़बड़ एक-दूसरे से वैसी ही जुड़ी हैं जैसे दिल और दिमाग जुड़े हैं। खास बात यह है कि अधूरी नींद और तनाव दिल और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ाते हैं।

 

वर्ल्ड हार्ट डे पर जसलोक हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर, मुंबई के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निहार मेहता ने दैनिक भास्कर के पाठकों के लिए खास मैसेज देते हुए कहा कि-अपने खाने में हर दिन दो फल और दो कटोरी सलाद खाएं साथ ही नींद और तनाव पर नियंत्रण रखें तो काफी हद तक आप स्वस्थ लाइफस्टाइल के साथ हृदय रोगों का मुकाबला कर सकते हैं।

डॉ. निहार मेहता से बातचीत....

  1. भारत में हृदय रोगों की सबसे बड़ी वजह क्या है?

    डॉ मेहता: दूसरे देशों के मुकाबले पिछले 10-15 साल में भारत में हार्ट और कार्डियोवस्कुलर डिसीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका कारण ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और तंबाकू है। लेकिन कुछ साइलेंट फैक्टर भी हैं लेकिन इन्हें नजरअंदाज किया जाता है। इनमें तनाव, नींद पूरी न होना, खाना ठीक से न लेना या पोषणयुक्त न होना और नियमित एक्सरसाइज न करना भी शामिल है। भारत में 60 फीसदी लोगों को हार्ट अटैक के बाद ही हार्ट डिसीज के बारे में पता चलता है जबकि विदेशों में ऐसे आंकड़े कम है। इसका समाधान है अपने सेहत के प्रति जागरूक होकर सही उपाय करना।

     

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  2. क्या अब  30 से 40 की उम्र में भी इस रोग की आशंका बढ़ गई है?

    डॉ मेहता: भारत में हृदय रोगों के मामले दूसरे देशों के मुकाबले 10 साल पहले ही देखे जा रहे हैं। जैसे विदेश में किसी को हृदय रोग 55 साल पहले होता है तो भारत में यह उम्र 45 साल हो गई है। हमारे खानपान की आदतें, आनुवांशिक स्थिति और नमक खाने का तरीके कारण हृदय रोग कम उम्र में होने लगे हैं। आधे से ज्यादा हृदय रोगियों को 40 से 50 की उम्र तक कार्डियक अरेस्ट आ सकता है। इसमें 40 साल से कम उम्र वालों की संख्या भी बढ़ रही  है। हृदय रोगों की शुरुआत 30-50 साल की उम्र के बीच में हो सकती हैं, इसलिए ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं और नियंत्रण के उपाय जरूर करें।

     

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  3. हर वर्ष 1.75 करोड़ लोगों की जान लेने वाले हृदय रोग सबसे बड़े 'किलर' है?

    डॉ मेहता: एक समय ऐसा था जब सबसे ज्यादा लोग संक्रमण से जुड़ी बीमारियों जैसे मलेरिया से मरते थे। लेकिन अब 60 फीसदी से ज्यादा लोगों की मौत नॉन कम्युनिकेबल डिसीज जैसे हार्ट डिसीज, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज से हो रही है। देश और दुनिया में सबसे ज्यादा मौतों का कारण हैं हृदय रोग। इन्हें रोकना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। इसके मामले इसलिए बढ़े हैं क्योंकि रिस्क फैक्टर बढ़ गए हैं। पहले भारत में हाई ब्लड प्रेशर के मामले 10-15 फीसदी देखने को मिलते थे। लेकिन हालिया रिपोर्ट में ये 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

     

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  4. क्या डायबिटीज, ब्लडप्रेशर और हृदय रोग तीनों एक साथ हो सकते हैं?

    डॉ मेहता:  हां, हो सकता है। अक्सर ये बीमारियां एक-एक करके आती हैं। लेकिन लोग जांच नहीं कराते। अगर नियमित जांच कराई जाए तो ठीक समय पर बीपी, ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर कोई चेकअप नहीं कराते हैं तो हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की वजह से स्ट्रोक या किडनी की समस्या हो सकती है।

  5. कौन से लक्षण हैं जब हृदय अलर्ट देता है लेकिन हम समझ नहीं पाते?

    डॉ मेहता:  जब हार्ट डिसीज और कार्डियक अरेस्ट के मामलों की गहन जांच की जाती है तो उसमें बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर सामने आती है। इन्हें घर पर या डॉक्टर की मदद में आसानी से जांच की जा सकती है। ऐसा करके काफी हद तक हृदय रोगों के बढ़ते मामलों को रोका जा सकता है और इलाज के खर्च को कम किया जा सकता है। छाती में दर्द हो, सीने में भारीपन, गला चोक हो, हाथ में भारीपन या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाएं और ईसीजी करवाएं। इसमें महज 10 मिनट लगते हैं। अगर रिपोर्ट  सामान्य नहीं है तो तुरंत इलाज शुरू करके बचाव किया जा सकता है।

     

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  6. वेज या नॉन वेज डाइट लेने वालों में से ज्यादा खतरा किसे है?

    डॉ मेहता:  खतरा दोनों को ही है। शाकाहारी हों या मांसाहारी दोनों ही मामले में नमक को कम करने की जरूरी है। ज्यादातर भारतीय खाने में रोजाना 10-12 ग्राम नमक खाते हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक 4-6 ग्राम ही पर्याप्त है। इसे रोकेंगे तो असर दिखेगा। इसे कम करें और फल-सब्जियां खाने में बढ़ाएं। सबसे अच्छा फार्मूला यही है कि अपने रोज के आहार में कोई भी दो मौसमी फल और दो कटोरी सब्जियां-सलाद जरूर शामिल करें।

     

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  7. खराब आदतों से क्या खतरा बढ़ जाता है?

    डॉ मेहता:  हां, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू खाने से खतरा बढ़ जाता है। ऐसे व्यसनी लोगों में हार्ट अटैक की आशंका दूसरों के मुकाबले 5-7 फीसदी ज्यादा होती है। अगर कोई यह समझता है कि मैं स्मोकिंग नहीं करता या तम्बाकू नहीं खाता तो उसे हार्ट अटैक का खतरा नहीं है, तो यह गलत धारणा है। ऐसे लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते। अगर आप दिनभर सीट पर बैठकर काम कर रहे हैं तो आपको खतरा ज्यादा है। ऐसे लोग रोजाना 30 मिनट का वर्क-ऑउट या वॉक करें तो फायदा मिलेगा। घी-तेल से परहेज करने वालों को भी रोजाना दो फल और दो कटोरी सलाद जरूर खाना चाहिए।

     

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  8. क्या बचपन से ही ऐसा कुछ किया जा सकता है जिससे खतरा टल सके?

    डॉ मेहता:   भारत में बच्चों में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जंक फूड, फास्ट फूड, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और बच्चों का घर से बाहर कम निकलना इसकी वजह हैं, भविष्य में बच्चों में हार्ट डिसीज के मामले रोकने हैं तो इन पर लगाम लगानी पड़ेगी। बच्चों की फिजिकल एक्टिवटी बढ़ाएं, मोबाइल से दूर रखें, हेल्दी डाइट देते हैं तो आगे चलकर उनमें हार्ट डिसीज के मामले कम हो जाएंगे। लेकिन, जरूरी है कि आपको आज से ही यह तैयारी करनी पड़ेगी।

     

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