विश्व हास्य दिवस / दुनिया में हास्य योग शुरू करने वाले डॉ कटारिया बोले- 'एक बार मोदी को खुलकर हंसाना चाहता हूं'

विश्व हास्य दिवस व हास्य योग के संस्थापक डॉ. मदन कटारिया से दैनिक भास्कर प्लस ऐप की खास बातचीत

world laughter day dainik bhaskar special interview of dr madan kataria
X
world laughter day dainik bhaskar special interview of dr madan kataria

  • डॉ कटारिया ने देश में पहला लॉफ्टर क्लब 1995 में शुरू किया, 1998 से हर वर्ष मनाया जाने वाला वर्ल्ड लाफ्टर डे भी उन्हीं की देन है
  • डॉ कटारिया कहते हैं - मन के अंदर बैठा मासूम बच्चा ही आपकी हंसी का बटन है
  • वर्ल्ड लाफ्टर डे 2019 की थीम है - अच्छा स्वास्थ्य, मन की खुशी और विश्व शांति

Dainik Bhaskar

May 04, 2019, 07:37 PM IST

मुंबई. 5 मई 2019 को वर्ल्ड लाफ्टर डे (विश्व हास्य दिवस) पूरे 21 साल का हो गया। 1998 में पहली बार इसे शुरू करने का श्रेय डॉ. मदन कटारिया को जाता है। मुंबई में रहने वाले वैश्विक हास्य योग आंदोलन के प्रणेता डॉ. कटारिया चाहते हैं कि दुनिया का हर इंसान खूब हंसे। आज भारत समेत दुनिया के 108 देशों में लाफ्टर क्लब खुल चुके हैं। 25 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के गुरु डॉ. कटारिया की ये हंसी की पाठशालाएं बिना फीस के चलती हैं। वे कहते हैं, ‘‘अगर आपका काम बड़ा है तो आपका नाम रहती दुनिया तक कायम रहेगा। मैं तो आपको और दुनिया को बस हंसते हुए देखना चाहता हूं इसीलिए इस बार विश्व हास्य दिवस पर हम ‘अच्छा स्वास्थ्य, मन की खुशी और विश्व शांति’ थीम को बढ़ावा दे रहे हैं।’’

 

दैनिक भास्कर प्लस ऐप से इंटरव्यू के दौरान भी डॉ. कटारिया खूब हंसे और हमें भी हंसाया। हमने पूछा कि देश में चुनावी माहौल गर्म है, किसी नेता को हंसाना चाहते हों तो वह कौन होगा? डॉ. कटारिया बोले, ‘‘अभी के माहौल को देखते हुए कहूं तो एक बार मोदीजी के साथ खूब हंसी-ठहाके लगाने की इच्छा है। मैंने देखा है कि हमारे पीएम योग तो अच्छा करते हैं, लेकिन खुलकर नहीं हंसते तो मुझे लगता है कि एक बार उनका परिचय हास्य योग की शक्ति से कराना चाहिए।’’ पेश हैं कमलेश माहेश्वरी से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश 

हंसी के गुरु से हंसती-गुदगुदाती बातें

  1. दिल का डॉक्टर, एक लाफ्टर गुरु कैसे बन गया? कैसे हुआ ये बदलाव?

    डॉ. कटारिया: 1995 की बात है। मैं मुंबई के लोखंडवाला में प्रैक्टिस किया करता था। साथ ही लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए ‘मेरा डॉक्टर’ नाम की मैगजीन निकाला करता था। उन दिनों मेरे जीवन में भी काम के बोझ का तनाव रहता था। मैंने मैगजीन में तनाव विषय को ध्यान में रखकर एक सीरीज शुरू की। एक रात मैंने इस विषय पर काफी रिसर्च के बाद 13-14 पेज का आर्टिकल लिखा। इसमें मैंने पाया कि हंसी तनाव कम करने के लिए बहुत कारगर नुस्खे की तरह है। अगले दिन मैं सुबह करीब 4 बजे अचानक उठा और सोचने लगा कि क्यों न एक हंसने-हंसाने वाला लाफ्टर क्लब बनाया जाए। बस, यही वह पल था जब एक नई राह मिल गई। उसी दिन मैंने अपनी पत्नी माधुरी और मार्निंग वॉक वाले चार दोस्तों के साथ घर के पास एक पार्क में इसकी शुरुआत की। मैंने एक चुटकुला सुनाया और यहीं से हंसने- हंसाने के सफर की शुरुआत हुई।

     

    .

     

    अगले दिन 15-16 लोग आए और हफ्तेभर में 50 से ज्यादा साथी जुड़ गए। लेकिन, यहां एक और समस्या आ खड़ी हुई कि हमारे जोक्स का स्टॉक खत्म हो गया। लोग पूछने लगे कि, अब क्या करोगे? क्लब बंद कर दोगे? तो मैंने कहा, मुझे एक दिन का समय दो। अगले दिन मैंने बिना जोक्स के नकली हंसी हंसने वाला तरीका आजमाया।


    ये क्लू मुझे एक रिसर्च से मिला था, जिसका निष्कर्ष यह था कि हमारा शरीर नकली और असली हंसी में फर्क नहीं कर सकता, ये सिर्फ मन कर सकता है। ऐसे में हंसी को एक्सरसाइज बना लें तो नकली हंसी से असली हंसी फूट सकती है। एक हंसेगा तो सब हंसने लगेंगे क्योंकि हंसी संक्रामक है, एक से दूसरे तक फैलती जाती है।

  2. क्यों लगता है कि हंसी एक कारगर दवा है? कोई यादगार अनुभव ?

    डॉ. कटारिया : जब मैं हंसी पर रिसर्च कर रहा था तो मैंने पाया कि हम दो तरह से खुश होते हैं। एक तो बाहरी खुशी और दूसरी अंदरूनी खुशी। दोनों में से टिकाऊ तो अंदरूनी खुशी ही होती है। इसी अंदरूनी खुशी को हंसकर बढ़ाया जा सकता है। मैं कहता हूं - पीस इनसाइड, पीस ऑउटसाइड। अंदर शांति रहेगी, तभी बाहर शांति होगी और हंसी से ऐसा करना संभव है।

     

    .

     

    मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि हंसी कारगर दवा है। असल जिंदगी में हंसी से हेल्थ की एक मजेदार घटना सुनाता हूं। आंध्रप्रदेश में विश्वमोहन नाम के एक सज्जन हैं। हास्य योग से जुड़ने से पहले उन्हें लगभग हर तरह की बीमारी थी। खास बात यह कि वे हंसने वालों से खूब चिढ़ते थे। हमारे लाफ्टर क्लब के एक लीडर ने उन्हें हास्य योग का निमंत्रण दिया। वे बेमन से आए। एक ही दिन में उनमें ऐसा बदलाव आया जो पिछले 20 वर्षों में नहीं आया था। वे नियमित आने लगे और उनकी स्थिति सुधरने लगी। वे रोज कई तरह की गोलियां लेते थे, लेकिन छह महीने के बाद उनकी संख्या में कमी होती गई। आज वे हास्य योग को अपने अनुभव से बढ़ावा देने में लगे हैं।


    ऐसा ही एक मामला अमेरिका का था, जहां एक महिला हर महीने 28 हजार रुपए मूल्य की एंटी-डिप्रेशन की गोलियां लेती थी। हास्य योग नियमित रूप से करने के बाद 3 महीने में ही उनकी सारी गोलियां बंद हो गईं।

  3. हंसी को योग से जोड़ने का विचार कैसे आया? क्या इसके भी स्वरूप हैं?

    डॉ. कटारिया: जब हमारा बनावटी से असली हंसी का तरीका सफल हो गया तो हमने हास्य के व्यायाम बनाना शुरू किए। वास्तव में हंसी तो एक ब्रीदिंग एक्सरसाइज है। योगगुरु बताते हैं कि आसन करते समय जितनी हवा अंदर जाती है, उससे दोगुनी निकालनी चाहिए, क्योंकि हमारे फेफड़ों में रेसिड्युअल हवा भी होती है।

     

    .

     

    हमने सांस और हंसी के साथ प्रयोग शुरू किए। लम्बी सांस को टुकड़ों में तोड़ा। बीच-बीच में मजेदार चेहरे बनाए। कई जानवरों की नकल की और मजेदार नाम भी दिए जैसे- साइलेंट हंसी, कॉकटेल हंसी, शेर की हंसी, बच्चे की हंसी, रसगुल्ला हंसी, एक मीटर हंसी वगैरह। रोज 15 से 40 मिनट इस तरह के हास्य आसन करने से हंसी प्राणायाम बन जाती है। हमने एक महीने में मुंबई में 16 लाफ्टर क्लब शुरू किए। इसके बाद अगले 5 साल देशभर में दौरे किए और सैकड़ों जगह क्लब खुले। 1999 में अमेरिका में और फिर यूरोप में लाफ्टर क्लब शुरू किए। अकेले भारत में ही 10 हजार से ज्यादा लाफ्टर क्लब अच्छी तरह चल रहे हैं।

  4. हम दिनभर में एक बार भी खुलकर नहीं हंसते, क्या नुकसान होता है?

    डॉ. कटारिया : हां, ये सच है कि हम हंसते नहीं और इसीलिए हास्य योग की उपयोगिता बढ़ जाती है। तनाव हमारी हंसी छीन लेता है। करीब 70% मामलों में हंसी गुम होने का कारण कोई न कोई तनाव होता है। इसीलिए मैं कहता हूं जब भी मौका मिले खूब ठहाके मारकर हंसिये। मैं अपना अनुभव बताऊं तो हंसी आपके शरीर में गजब की इम्यूनिटी बढ़ा देती है। क्या आप मानेंगे कि मुझे पिछले 25 वर्षों में एक बार भी सर्दी-जुकाम तक नहीं हुआ।

     

    .

     

    हंसना हर कोई चाहता है, लेकिन कोई ऐसा सिस्टम नहीं बना कि उसे एक्टिव करके हंस लिया जाए। आप सिर्फ 30 मिनट अलग-अलग तरह की हंसी हंसिये, आप पाएंगे कि पूरे दिन आपका एनर्जी लेवल बना रहेगा। ये कॉमेडी वाली हंसी नहीं, गारंटेड एक्सरसाइज वाली हंसी होगी।

  5. क्या हंसी का कोई बटन होता है , अगर हां तो स्विच ऑन कैसे करते हैं?

    डॉ. कटारिया:  दिमाग में कंट्रोल तो होता है पर ऐसा कोई बटन नहीं होता जिसे दबा सकें और हंसी आ जाए। हमारा दिमाग हर तरह की भावनाओं की चीर-फाड़ करता है, क्योंकि वह तर्कशक्ति से फैसला करता है। आप सोचकर, दिमाग लगाकर नहीं हंस सकते। इसे बच्चों के उदाहरण से समझिए।

     

    .

     

    एक छोटा बच्चा दिनभर में सैकड़ों बार हंस लेता है। उसे हंसाने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती। उसकी हंसी का बटन, उसका बचपना है। मासूमियत से भरा संसार। हम बड़े भी वैसा कर सकते हैं। बस, इसके लिए अपने अंदर बैठे बच्चे को जगाना होगा। दिन में कम से कम एक बार बच्चे बन जाइए। उनकी तरह मस्ती कीजिए। हम आधे घंटे में अपने हास्य क्लब में यही तो सिखाते हैं कि दिनभर के साढ़े 23 घंटे आप जो चाहे कीजिए, लेकिन सिर्फ आधे घंटे के लिए बच्चा बन जाइए। फिर देखिए कैसे आती है खुलकर हंसी। वास्तव में आपके अंदर का बच्चा ही हंसी का बटन है।

  6. क्या सोशल मीडिया हंसना भुला रहा है? इससे दूरी कैसे बनाएं?

    डॉ. कटारिया : ऐसा तो नहीं है, पर खराब आदतों के लिए कंट्रोल करना चाहिए। आज सोशल मीडिया से छुटकारा पाना तो संभव नहीं, लेकिन हमें नियंत्रण में इसका इस्तेमाल करना चाहिए। मैं कहूंगा कि पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ सोशल मीडिया को अपनाएं तो बहुत कुछ अच्छा किया जा सकता है और कई लोग ऐसा कर रहे हैं। हास्य योग आपको पॉजिटिव बने रहने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से कीजिए और अपनी हंसी की बढ़िया फोटो-वीडियो शेयर कीजिए तो आप देखेंगे कि लोग भी आपके साथ हंसी और खुशी शेयर करेंगे। मैं इसके लिए कहूंगा कि अगर नकारात्मकता का अंधेरा है तो हंसी का दीपक जलाइए। 

     

    .

     

  7. कोई मजेदार घटना जो याद आती है तो हंसने पर मजबूर कर देती है?

    डॉ. कटारिया: मेरे लिए तो अब हर दिन मजेदार होता है। कई तरह के जोक्स बनते हैं। नहीं बनते हैं तो हम बना भी लेते हैं। फिर भी एक मजेदार घटना बताता हूं जो मुझे हंसाती रहती है।  मुंबई के चेम्बूर में डायमंड लाफ्टर क्लब है। एक बार उन लोगों ने मुझे अपने क्लब में आने का निमंत्रण दिया। मैं अगले ही दिन सुबह 7 बजे पहुंच गया। उनके पार्क में देखा तो वहां कोई भी नहीं था। कुछ देर इधर-उधर टहलने के बाद मैंने एक आदमी से अपना परिचय छुपाते हुए पूछा कि भाई, आज यहां वे लाफ्टर क्लब वाले नहीं आए क्या? आज तो उनके यहां डॉक्टर मदन कटारिया आने वाले थे न? उसने जवाब दिया, हां रोज आते हैं, लेकिन डॉक्टर कटारिया का कार्यक्रम तो आज नहीं अगले हफ्ते है! यह सुनकर मैंने जोर से ठहाका लगाया और फिर उस आदमी को सच्चाई बताकर हम 20 मिनट तक हंसते रहे। 

     

    वैश्विक हास्य योग आंदोलन के प्रणेता डॉ.  मदन कटारिया से सम्पर्क के लिए  इस लिंक पर क्लिक करें 

     

    .

     

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना