चंडीगढ़ / 10 साल पहले सिसवां-बद्दी मार्ग पर कार में मिली थी जली लाश, पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर पाई अपनी थ्योरी, आरोपी रिहा

इसी कार में मिली थी सुरेश की लाश।- फाइल फोटो इसी कार में मिली थी सुरेश की लाश।- फाइल फोटो
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इसी कार में मिली थी सुरेश की लाश।- फाइल फोटोइसी कार में मिली थी सुरेश की लाश।- फाइल फोटो

  • सुरेश अपनी भाभी की बहन से शादी करना चाहता था
  • हत्यारों ने सुरेश को कार के अंदर ही जला कर मार डाला था

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 11:57 AM IST

मोहाली. करीब 10 साल पहले सिसवां-बद्दी मार्ग पर एक कार में एक व्यक्ति की जली लाश मिली थी। बाद में चंडीगढ़ से सटे किशनगढ़ के रहने वाले 26 साल के प्रॉपर्टी डीलर सुरेश कुमार के रूप में शव की पहचान की गई। मामले में पुलिस की ओर से कुछ आरोपियों पर केस दर्ज कर 5 साल बाद वर्ष 2015 में उन्हें गिरफ्तार किया था। लेकिन अब मामले के 10 साल बीत जाने के बाद मोहाली सेशन कोर्ट की ओर से फैसला सुनाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

बरी किए गए आरोपियों में राज कुमार, मोहिंदर पाल, हरजिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह उर्फ गुरू तथा कमल शामिल हैं। पीड़ित परिवार के एडवोकेट दविंदर लुबाना का कहना है कि वो कोर्ट के ऑर्डर पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे और इंसाफ की गुहार लगाएंगे।

रोपड़ पुलिस ने किया था गिरफ्तार

मामले में डिफेंस के एडवोकेट हरीमोहन पाल सिंह की ओर से बताया गया था कि इस मामले में पुलिस के पास भी कोई पुख्ता क्लू नहीं था और ना ही उनके क्लाइंट्स के खिलाफ कोई सबूत था। उन्होंने बताया कि परिवार वालों की ओर से कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा गया था कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है।

जिस पर जवाब में मोहाली पुलिस की ओर से एक एफिडेविट बाकायदा तौर पर कोर्ट में दिया गया था जिसमें बताया गया था कि जिन आरोपियों पर शक जाहिर किया जा रहा है पुलिस जांच में वो कहीं दोषी साबित नहीं हो रहे हैं। जिसके बाद रोपड़ पुलिस को मामले जांच सौंपी गई थी और वर्ष 2015 में रोपड़ पुलिस की ओर से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

डिफेंस के एडवोकेट ने बताया कि मामले में इंस्पेक्टर गब्बर सिंह की ओर से कोर्ट में बताया था कि एक गवाह गुरमुख सिंह ने उनके पास अपने बयान दर्ज करवाए थे जिसमें उसने बताया था कि वो आरोपियों के ही गांव का रहने वाला है और आरोपियों ने उनके ही गांव में उससे मिलकर उसके सामने अपना गुनाह कबूल किया है और कहा है कि उन्होंने ही सुरेश का कत्ल कर उसे कार में जला दिया था। इसी आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

एडवोकेट ने बताया कि लेकिन पुलिस के इसी तर्क को तोड़ते हुए उन्होंने कोर्ट के जरिए गवाह गुरमुख सिंह की मोबाइल लोकेशन मंगवाई थी। जिसमें साफ हो गया कि जिस दिन गुरमुख सिंह आरोपियों से उनके गांव में मिलकर उसके सामने अपना गुनाह कबूल करने की बात बोल रहा है उस दिन वो गांव में नहीं बल्कि सरहिंद की कैटल मार्केट में था। इसी को आधार बनाते हुए डिफेंस की ओर से पुलिस की थ्यूरी को कोर्ट में झूठा साबित किया गया।

शादी में गया था सुरेश.

मृतक सुरेश कुमार की लाश 28 नवंबर 2010 को सिसवां-बद्दी मार्ग पर मिली थी। जानकारी के अनुसार मृतक सुरेश कुमार अपनी भाभी की बहन से शादी करना चाहता था लेकिन उसकी भाभी के परिवार वाले इस शादी के लिए राजी नहीं थे और उन्होंने अपनी बेटी की शादी कहीं और फिक्स कर दी थी। जिस दिन लड़की की शादी से एक दिन पहले मेहंदी का कार्यक्रम था उस रात सुरेश उनके घर गया था लेकिन अगले दिन सुरेश की लाश सिंसवा-बदी मार्ग पर सड़क के किनारे कार में जली हुई हालत में मिली थी। इतना ही नहीं लाश को लोहे की जंजीर से बांधा भी हुआ था। जब लाश मिली तो वहां सिर्फ कंकाल ही रह गया था जबकि लाश पूरी तरह से जल चुकी थी। जिसपर परिवार ने कत्ल की आंशका जताई गई थी।

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