चंडीगढ़ / मेरठ के हिमांशु ने संत बनने का निर्णय लिया तो खुशी में मां-बाप ने प्रॉपर्टी दान कर दी; खुद आश्रम रहने चले गए

मेरठ के 27 वर्ष के हिमांशु और 15 साल के रजत दूल्हे के लिबास में। मेरठ के 27 वर्ष के हिमांशु और 15 साल के रजत दूल्हे के लिबास में।
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मेरठ के 27 वर्ष के हिमांशु और 15 साल के रजत दूल्हे के लिबास में।मेरठ के 27 वर्ष के हिमांशु और 15 साल के रजत दूल्हे के लिबास में।

  • 15 साल के रजत और 27 साल के हिमांशु को आज बनाया गया दूल्हा, बुधवार को वैराग्य रूप काे अपनाते हुए बन जाएंगे संत मुनि
  • रजत अपने दादा राजेश मुनि से प्रभावित होकर 4 साल पहले 11 साल की उम्र में घर परिवार छोड़कर चले गए थे गुरू की शरण में

दैनिक भास्कर

Jan 14, 2020, 07:08 PM IST

चंडीगढ़. झारखंड के रजत और मेरठ के हिमांशु बुधवार को वैराग्य रूप काे अपनाकर संत मुनि बन जाएंगे। मंगलवार को दोनों को दूल्हा बनाया गया। लाल गाेल्डन रंग की शेरवानी, सिर पर सेहरा लगा था। रस्म के तौर पर दाेनाें काे हाथाें में मेहंदी लगाई जा रही है। ये मंगलवार तक आम व्यक्ति की तरह गृहस्थ जीवन में दिखे जा रहे थे। लेकिन, बुधवार काे इनके शरीर का चाेला बदल जाएगा। हिमांशु के कदम से इनके माता-पिता इतने खुश हुए कि उन्होंने अपनी सारी संपत्ति को दान कर दिया और गुरू के आश्रम में रहने चले गए।

गृहस्थ जीवन रास नहीं आया ताे संत बनने का लिया फैसला

मेरठ के 27 वर्ष के हिमांशु ने बताया कि वह शादीशुदा हैं। उनकी एक बेटी भी है लेकिन पत्नी से तलाक हाेने के बाद उन्हाेंने साेचा कि गृहस्थ जीवन में कुछ नहीं रखा। वैराग्य जीवन में गुरू के चरणाें में ही जीवन का आनंद है।  उनके परिवार के लगभग 23 लाेग अब तक दीक्षा लेने के बाद संत बन चुके हैं। उनकी एक बहन है जिसकी शादी हाे चुकी है। जब उनके पेरेंट्स को पता चला कि बेटा संत बनने जा रहा है ताे उन्हें खुशी हुई और अपनी प्राॅपर्टी काे दान में देकर खुद भी अपने गुरू के चरणों में जाकर आश्रम में रहने लगे।

रजत की खेलने कूदने की उम्र और त्याग दिया ग्रहस्थ जीवन

रजत की उम्र मात्र 15 साल है और दसवीं के एग्जाम दिए हैं। उसने खेलने कूदने और पढ़ने की उम्र में संत बनने का फैसला ले लिया। जबकि इस उम्र में अक्सर पेरेंटस का दबाव रहता है कि बच्चे पढ़ाई में अच्छे नंबर लें और डाॅक्टर, इंजीनियर, टीर्चस आईएएस या किसी अच्छे प्राेफेशन में अपना भविष्य बनाएं। 4 साल पहले रजत ने अपना घर परिवार छाेड़ दिया था और गुरू की शरण में चले गए थे। रजत ने बताया कि दादा राजेश मुनि काे देखकर उन्हाेंने वैराग्य जीवन काे अपनाने का फैसला लिया।

15 काे मिलेगी दीक्षा

जैन सभा के प्रेस सेक्रेटरी नीरज जैन ने बताया कि 15 जनवरी काे रजत और हिमांशु काे रथ में सवार कर शाेभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद ये ग्रहस्थ चाेला त्याग कर संताें का चाेला पहनेंगे और इन्हें दीक्षा दी जाएगी।

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