कोरोनावायरस / जानबूझकर जानलेवा बीमारी फैलाने पर 3 साल तक कैद और जुर्माना

से.-25 में लाॅकडाउन हाेने के बावजूद लाेग सड़काें पर घूमते रहे, कर्फ्यू से.-25 में लाॅकडाउन हाेने के बावजूद लाेग सड़काें पर घूमते रहे, कर्फ्यू
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से.-25 में लाॅकडाउन हाेने के बावजूद लाेग सड़काें पर घूमते रहे, कर्फ्यूसे.-25 में लाॅकडाउन हाेने के बावजूद लाेग सड़काें पर घूमते रहे, कर्फ्यू

  • कोरोना वायरस घराें से बाहर निकलना बंद कराे
  • अादेशाें का पालन न करने पर विभिन्न धाराओं में तीन साल तक की कैद का प्रावधान

दैनिक भास्कर

Mar 24, 2020, 12:43 PM IST

चंडीगढ़. कोरोना वायरस को लेकर जो व्यक्ति ऐसा सोच रहे हैं कि सरकार द्वारा जारी आदेशों की पालना ना करने पर उनके खिलाफ डांट डपट के अलावा कोई और कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। वह संभल जाएं। घरों से बाहर न निकलने के आदेश कानून के तहत शहर के आला अधिकारियों की ओर से जारी किए गए हैं।


मजिस्ट्रेट और हेल्थ अधिकारियों को यह पावर क्रिमिनल पीनल कोड की धारा 144 और एपिडेमिक डिजीजेज एक्ट 1897 के तहत प्राप्त है। कानून मामलों के जानकार पंकज चांदगोठिया ने बताया कि एपिडेमिक डिजिजेज एक्ट अंग्रेजों द्वारा उस समय बनाया गया था, जब 1897 में मुंबई में प्लेग फैला था।

इसका इस्तेमाल हाल के समय में 2009 में स्वाइन फ्लू के लिए 2015 में डेंगू के लिए 2018 में कॉलरा के लिए विभिन्न प्रदेशों में इस्तेमाल किया गया था। इस एक्ट के तहत मजिस्ट्रेट के अलावा स्वास्थ्य अधिकारियों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी महामारी को रोकने के लिए किसी भी तरह का अनिवार्य आदेश जारी कर सकते हैं।

अगर कोई भी व्यक्ति क्वारेंटाइन आदेश की अवहेलना करता है तो उस पर होगी कार्रवाई
धारा 269 आईपीसी के तहत अगर कोई भी व्यक्ति अपनी लापरवाही से किसी भी बीमारी को फैलाने का कारण बन सकता है तो उसे 6 महीने तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसी तरह धारा 270 में कोई भी व्यक्ति जानबूझकर ऐसा कार्य करता है जिससे किसी और व्यक्ति को जानलेवा बीमारी हो सकती है, तो उस दोषी को 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। मौजूदा आदेशों में जो सबसे ज्यादा शब्द इस्तेमाल हो रहा है वह है क्वारेंटाइन रूल का। आईपीसी की धारा 271 में यह साफ लिखा गया है कि अगर कोई भी व्यक्ति क्वारेंटाइन आदेश की अवहेलना करता है तो उसे 6 महीने तक की सजा और जुर्माना दोनों हाे सकती है। ऐसे आदेशों की अवहेलना करने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जिसमें 6 महीने तक की कैद और जुर्माना आदेशों का उल्लंघन वाले पर लग सकता है। यह आदेश नहीं माने तो आईपीसी की चार और धाराएं हैं जिनमें व्यक्ति के खिलाफ एक साथ मुकदमा दायर किया जा सकता है। धारा 268 पब्लिक न्यूसेंस करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मौजूदा स्थिति में किसी भी आदेश की पालना न करने पर इन सभी धाराओं के तहत अलग-अलग तौर पर भी सजा हो सकती है। यानी धारा 188 में 6 महीने, 270 में 3 साल 271 में 6 महीने की सजा का प्रावधान है।
 

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