चंडीगढ़ / डॉक्टरों की लापरवाही से गई थी 5 साल के बच्चे की जान, परिवार ने ठोका एक करोड़ रुपए का दावा

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  • छह महीने पहले एक तेल की कढ़ाई में गिरने से रोहित बुरी तरह से झुलस गया था
  • न सेक्टर-32 हॉस्पिटल में एडमिट किया गया और न ही पीजीआई में उसका ईलाज हुआ, आखिरकार तोड़ा दम

दैनिक भास्कर

Nov 23, 2019, 01:08 PM IST

चंडीगढ़. 5 साल के रोहित को अगर समय पर इलाज मिल जाता तो, वह 45 फीसदी झुलसने के बाद भी बच सकता था। छह महीने पहले एक तेल की कढ़ाई में गिरने से रोहित बुरी तरह से झुलस गया था। उसे न तो सेक्टर-32 हॉस्पिटल में एडमिट किया गया और न ही पीजीआई में उसका ईलाज हुआ। आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

अब उसकी मौत के बाद परिवार ने जीएमसीएच-32 और पीजीआई के खिलाफ एक करोड़ रुपए का सिविल सूट फाइल किया है। इसमें उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के चीफ सेक्रेटरी, चंडीगढ़ के डीसी, एमसी कमिश्नर, सेक्टर-45 सिविल हॉस्पिटल के एसएमओ, सेक्टर-16 हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और यूटी एडवाइजर को भी पार्टी बनाया है।

रोहित के परिवार की ओर से एडवोकेट संदीप गुप्ता और जसबीर सिंह ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस फाइल किया है। एडवोकेट संदीप गुप्ता ने बताया कि इस केस में कई हॉस्पिटल की लापरवाही है। अगर रोहित को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। 30 मई 2019 को रोहित अपने घर के बाहर खेल रहा था।

उसके पड़ोस में वीर सिंह नाम का शख्स खुले में गोलगप्पे बना रहा था। उसने तेल की कढ़ाई रखी हुई थी। खेलते-खेलते रोहित अचानक गर्म तेल की कढ़ाई में गिर गया। वह बुरी तरह झुलस गया। सबसे पहले उसे सेक्टर-45 के सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया। लेकिन वहां से उसे जीएमसीएच-32 रैफर कर दिया गया। लेकिन जीएमसीएच-32 में उसे एडमिट नहीं किया गया। हॉस्पिटल ने नॉन अवेलियबिलिटी ऑफ बेड का कारण बताकर उसे पीजीआई रैफर कर दिया गया। लेकिन पीजीआई में भी उसे इलाज नहीं मिला।

मीडिया की दखल के बाद एडमिट किया लेकिन इलाज नहीं मिला रोहित के परिजनों ने मीडिया से बात की। दैनिक भास्कर की दखल के बाद रोहित को सेक्टर-32 हॉस्पिटल में एडमिट कर लिया गया। लेकिन वहां भी उसका सही ढंग से इलाज नहीं किया गया। कई दिन एडमिट रहने के बाद भी रोहित की हालत में सुधार नहीं हुआ। लिहाजा जीएमसीएच-32 से उसे दोबारा पीजीआई रैफर कर दिया गया जहां एक बाद रोहित ने दम तोड़ दिया था।


एंबुलेंस भी नहीं मिली थी, ऑटो में भटकते रहे:  एडवोकेट संदीप गुप्ता ने कहा कि इस केस से पता चलता है कि शहर के हॉस्पिटल मरीजों के प्रति कितने गंभीर हैं। 8 घंटे तक रोहित को लेकर उसके परिवार के लोग ऑटो में भटकते रहे। हॉस्पिटल में उसे एंबुलेंस तक नहीं दी गई। रोहित की हालत बेहद खराब थी और बाहर 43 डिग्री टेंपरेचर था। लेकिन डॉक्टरों ने उसे फर्स्ट एड तक नहीं दी। इसलिए हमने अब एक करोड़ रुपए का केस फाइल किया है। 

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