आज खुलेगा कॉरिडोर / 150 किमी का सफर 4.5 किमी हुआ, हर साल जाते थे करीब 8 हजार श्रद्धालु, अब बिना वीजा 18.25 लाख जाएंगे



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • बंटवारे के 72 साल बाद आज से होंगे गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के खुले दीदार

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 03:55 AM IST

कपूरथला/डेरा बाबा नानक/सुल्तानपुर लोधी. गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर भारत-पाकिस्तान नया इतिहास रचने जा रहे हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद 72 साल बाद 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर खुलने की अरदास पूरी होगी। कॉरिडोर के खुलने से करीब 150 किलोमीटर की दूरी 4.5 किलोमीटर की हो जाएगी। अभी तक अटारी बॉर्डर से हर साल लगभग 8 हजार श्रद्धालु लाहौर होते हुए करतारपुर साहिब जाते थे। इसमेें लगभग साढ़े 3 घंटे का समय लगता था।

 

अटारी से लाहौर 25 किलोमीटर, लाहौर से करतापुर साहिब 125 किलोमीटर है। अब 5 हजार श्रद्धालु रोज यानी 18.25 लाख श्रद्धालु सालाना बिना वीजा जाएंगे। शनिवार को भारत की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी तो पाकिस्तान में पीएम इमरान खान काॅरिडोर का उद्‌घाटन करेंगे। पहले जत्थे में करीब 559 श्रद्धालु जाएंगे। पीएम बनने के बाद इमरान खान ने नवंबर 2018 में कॉरिडोर बनाने की घोषणा की थी। अभी तक डेरा बाबा नानक से रोज सैकड़ों की संख्या में लोग दूरबीन से दर्शन करते थे।


गौरतलब है कि 1947 में बंटवारे का सबसे बड़ा दर्द पंजाब ने सहा। यहां की जमीनें बंटी, लोग बंटे और धार्मिक स्थान भी बंट गए। दोनों देशों के बीच अब तक सैंकड़ों मतभेद कायम हुए। घुसपैठ, उड़ी हमला व पुलवामा अटैक के बाद खेल, बातचीत सब बंद है। फिर भी राष्ट्रीय सौहार्द की एक किरण करतारपुर के रास्ते से निकली। तमाम िवपरीत परिस्थितियों के बावजूद इक नानक के नाम पर सब एक हो गए। भारत-पाकिस्तान सीमाएं भी एक हो गईं। नानक जी की भाषा में यही एक ओंकार है...।

 

24 साल में 26 हजार किलोमीटर पैदल यात्रा की गुरु नानक जी ने

  • पहली उदासी- नानक ने 31 साल की उम्र में पहली उदासी सुल्तानपुर लोधी से शुरू की। सन 1500 से 1506 तक 7 साल में 8,169 किलोमीटर की दूरी तय की।
  • दूसरी उदासी- 37 साल की उम्र में दूसरी उदासी करतारपुर साहिब से शुरू की। सन 1506 से 1513 तक सात बरस में उन्होंने 8,169 किलोमीटर की दूरी तय की।
  • तीसरी उदासी- 45 साल की उम्र में बाबा नानक ने 5,835 किलोमीटर लंबी तीसरी उदासी शुरु की। 1514 से 1518 तक चलने वाली उदासी फिर सुल्तानपुर लोधी से शुरु हुई।
  • चौथी उदासी- 50 साल की उम्र में चौथी उदासी शुरु हुई जोकि 1519 से लेकर 1521 तक चलाई गई। उन्होंने 3,501 किलोमीटर दूर तक प्रचार किया।

कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन

>    करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को prakashpurb550.mha.gov.in पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन यात्रा करने का हक नहीं देता है।
>    यदि निवेदनकर्ता को मंजूरी मिल जाती है तो उनको यात्रा की प्रस्तावित तारीख से 4 दिन पहले सूचित किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन होने पर आपको एक मोबाइल पर संदेश व ईमेल प्राप्त होगी।
>    रजिस्ट्रेशन के लिए ये जरूरी : पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, आधार कार्ड, निवेदनकर्ता को अपना ब्लड ग्रुप पता होना जरूरी है।
>    आपके पास होना चाहिए : पीडीएफ फॉर्मेट में 500 केबी तक पासपोर्ट की स्कैन कॉपी, जिसमे फोटो, पता व पासपोर्ट के अंतिम पेज की स्कैन कॉपी पारिवारिक जानकारी सहित होनी चाहिए। रजिस्ट्रेशन फॉर्म का प्रिंट अपने पास रखना जरूरी।
>    सेवा केंद्रों में फ्री रजिस्ट्रेशन हो रही है। यह सुविधा ई-सेवा सॉफ्टवेयर द्वारा दी जा रही है।
 

तीर्थ यात्रियों के लिए हिदायतें

>    तीर्थ यात्री को सुबह जाना होगा व उसी दिन वापस आना होगा। तीर्थ यात्री को केवल गुरद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन की आज्ञा होगी। बाहर जाना मना है।
>    कॉरिडोर खुलने का समय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक है। ऑपचारिकता के लिए एक-दो घंटे पहले पहुंचना होगा।  
>    श्रद्धालुओं के लिए गुरुद्वारा साहिब में लंगर और प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।

 

ये ले जा सकते हैं

>    अधिक से अधिक 15 हजार रुपए की राशि तक ही ले जा सकते हैं।
>    केवल 7 किलो तक समान का एक बैग समेत पीने का पानी लेना होगा।
>    13 साल से कम उम्र के बच्चों व 75 साल के बुजुर्गों को समूह में रखना होगा।
>    कपड़े के बैग का इस्तेमाल करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। आस पास को साफ रखना होगा। पॉलिथिन बैन है।

 

ये ले जाना मना है

>    मोबाइल और कैमरा ले जाना मना है। किसी तरह की तस्वीर पर भी प्रतिबंध है।
>    नकारात्मक वस्तु की सूची में दर्ज कोई भी चीज नहीं ले जा सकेंगे। जैसे- लाइटर, सब्जी काटने वाली चाकू या फिर अन्य कोई नुकीली चीज ले जाना मना है।
>    कोई भी लावारिस वस्तु को हाथ न लगाने का आदेश है।
>    ऊंची आवाज में संगीत लगाना मना होगा।
 

पाकिस्तान की ओर से

>    भारतीय सीमा पैदल पार करनी होगी। पाकिस्तान की ओर बॉर्डर टर्मिनल पर पहले सभी कागजात चेक किए जाएंगे।
>    टर्मिनल के बाहर ही बसें और ई-रिक्शा खड़े होंगे। यह सेवा फ्री रहेगी। बसों की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी गई है। ये 10-15 मिनट में गुरुद्वारा साहिब के बाहर पहुंचा देंगी।
>    गुरुद्वारा साहिब जाते समय ही बसों के नंबर अलॉट किए जाएंगे। जिनसे आना-जाना होगा। रोज 5 हजार लोग जा सकेंगे।
>    कॉरिडोर के दाएं-बाएं फेंसिंग लगाई गई और कुछ दूरी पर चेक पोस्ट भी बनाई गईं हैं।
>    एंट्री के लिए 20 यूएस डॉलर यानी 1420 रुपए फीस देनी होगी। सीमा पार करते ही टर्मिनल में मनी एक्सेचेंजर होंगे, जो रुपए को यूएस डॉलर में कन्वर्ट कर देंगे।
>    रिकॉर्ड : 11 महीने में बनकर तैयार हुआ कॉरिडोर।
>    गुरुद्वारा साहिब में लंगर और प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।

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