हरियाणा / गांवों में ठेका बंद कराने के लिए प्रदेश की 872 पंचायतों ने किए आवेदन, लड़ाई-झगड़े होने का बड़ा कारण शराब बिक्री बताया

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • नशे के विरोध में उतरी ग्राम पंचायतें, सबसे ज्यादा आवेदन भिवानी से
  • पंचकूला से आए महज तीन आवेदन,  राज्य सरकार ने मांगी थी राय

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2020, 11:38 AM IST

चंडीगढ़ (सुशील भार्गव). हरियाणा की करीब पौने नौ सौ ग्राम पंचायत अपने गांव में शराब की बिक्री नहीं चाहती। इसकी वजह से ग्रामीण इलाकों में आपसी लड़ाई झगड़े होते हैं। ऐसे में यहां शराब की बिक्री न की जाए। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार ने अबकी बार ग्राम वासियों से राय जानी थी कि वे क्या गांव में शराब बिक्री नहीं चाहती।

 
प्रदेश की करीब 6500 ग्राम पंचायतों में से 872 ने गांव में शराब पूरी तरह से बंद करने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग को आवेदन किया है। यह आवेदन संबंधित जिले के डीसी से होते हुए विभाग के डीईटीसी के जरिए चंडीगढ़ पहुंच गए हैं।

यह आंकड़ा भले ही 12 फीसदी हो, लेकिन पंचायतों का यह रुझान स्वस्थ हरियाणा की ओर इशारा करता है। आबकारी एवं कराधान विभाग के कलेक्टर योगेश कुमार के अनुसार सबसे अधिक आवेदन भिवानी जिले से 128 आए हैं, जबकि सबसे कम आवेदन पंचकूला जिले से महज तीन हुए हैं।

अब पंचायतों की होगी पर्सनल हीयरिंग
जिन 872 ग्राम पंचायतों ने गांव में ठेका बंद करने के लिए आवेदन किया है, उनकी सब पंचायतों की पर्सनल हियरिंग चंडीगढ़ में होगी। ईटीसी इन ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों की बात सुनेंगे। पर्सनल हियरिंग के दौरान विभाग का एडवोकेट भी साथ होगा। वह बताएगा कि जिस गांव की ग्राम पंचायत शराब ठेका बंद कराना चाहती है, वहां पर पिछले तीन सालों में तस्करी कर अवैध रूप से शराब बिक्री के कितने केस बने हैं। यदि इस तरह के केस दर्ज हुए हैं ऐसे में आवेदन रद्द किया जाएगा।
 

हर गांव का डाटा जुटाएगा विभाग

दूसरी ओर आबकारी एवं कराधान विभाग ने इसके लिए जिन 872 ग्राम पंचायतों ने शराब बंदी के लिए आवेदन किया है, उनके यहां का डाटा भी जुटाएगा। इसमें पता लगाया जाएगा कि संबंधित ग्राम पंचायत के एरिया में पिछले तीन साल में तस्करी कर अवैध शराब बिक्री के कितने केस दर्ज हुए हैं। क्योंकि विभाग यह दलील देगा कि शराब बंदी कर दी जाए तो संबंधित गांव में अवैध शराब की बिक्री होगी। ऐसे में न केवल रेवन्यू की हानि होगी, बल्कि अवैध शराब को बढ़ावा मिलेगा।
 

पंचायतों ने आवेदनों में ये लिखा

सूत्रों का कहना है कि हरियाणा की जिन 872 ग्राम पंचायतों ने शराब को गांव में बंद करने के लिए आवेदन किया है, उनमें से कई ने लिखा है कि गांव में शराब की बिक्री से लड़ाई झगड़े होने लगे हैं। गांव के अधिकांश युवा शराब के आदी हो गए हैं, पहले गांव में कोई शराब नहीं पीता था, लेकिन अब गांव का कल्चर खराब होने लगा है। यही नहीं महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। शराब पीकर कई बार सड़क हादसे होते हैं, इससे युवाओं की जान जा रही है।

जहां कोई केस नहीं, वहां होगी शराब बंद
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन गांवों में पिछले तीन साल में अवैध शराब की बिक्री को कोई केस नहीं बना है, उस गांव की सीमा में कहीं भी शराब का ठेका नहीं खोला जाएगा और न ही गांव की सीमा में कहीं शराब बेची जा सकेगी। 872 गांवों में से जितने भी गांवों में शराब बंद होती है, वहां एक अप्रैल 2020 से शराब की बिक्री पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।

इसी आधार पर पिछले साल करीब 300 पंचायतों के आवेदन आए थे और इनमें से करीब 98 गांवों में शराब के ठेके नहीं खोले गए थे। ईटीसी अजीत बाला जोशी ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों ने आवेदन किए हैं, इनकी अब पर्सनल हियरिंग होगी। सभी गांवों का डाटा लिया जाएगा। गांव में शराब की स्मगलिंग आदि के केस हैं तो यह भी पता किया जाएगा। फिलहाल 872 ग्राम पंचायतों के आवेदन आए हैं।

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