पीजी हादसा / पीजी में लगी आग से जलकर मरी तीन लड़कियों की घटना के बाद टूटी प्रशासन की नींद, अब दिए जांच के आदेश

शहर की पीजी में आग लगने से तीन लड़कियां मर गई। छोटे-छोटे कमरे बना कर दिए जाते किराए पर। शहर की पीजी में आग लगने से तीन लड़कियां मर गई। छोटे-छोटे कमरे बना कर दिए जाते किराए पर।
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शहर की पीजी में आग लगने से तीन लड़कियां मर गई। छोटे-छोटे कमरे बना कर दिए जाते किराए पर।शहर की पीजी में आग लगने से तीन लड़कियां मर गई। छोटे-छोटे कमरे बना कर दिए जाते किराए पर।

  • अब फायर विभाग ने डीसी से मांगी मकानों में चल रहे पीजी की चेकिंग की अनुमति
  • कोठी के फर्स्ट फ्लोर के 4 कमरों में बनाए गए 7 छोटे केबिन, जिनमें रहती थीं 14 लड़कियां

दैनिक भास्कर

Feb 23, 2020, 03:54 PM IST

चंडीगढ़. शहर में शनिवार शाम को सेक्टर-32 की एक पीजी में आग लगने की घटना सामने आई थी। जिसमें रह रही तीन लड़कियों की आग और सांस घुटने से मौत हो गई थी, जबकि दो लड़कियों ने फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन के अधिकारियों की नींद टूटी है। डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने एसडीएम को जांच के आदेश दिए है।

सेक्टरों में चल रहे पीजी

शहर में कई कॉलेज और एजुकेशन सेंटर है जहां पंजाब सहित कई राज्यों से आकर लड़के-लड़कियां पढ़ाई करते है। ऐसे में उन्हें कॉलेज या सेंटर में ज्यादातर हॉस्टल नहीं मिल पाते है। इसी कारण उन्हें मजबूरी में शहर के मकानों में चलाए जा रहे पीजी में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी होती है। इसी कारण शहर के 

सेक्टर-15, 16, 18, 19, 20, 21, 22, 27, 28, 31, 32, 34, 35, 36. 37, 38, 46, 23 में अधिक पीजी चल रहे हैं।

बच्चों को पीजी में रहना मजबूरी

गांवों से बच्चे पढ़ने और नौकरी करने के लिए चंडीगढ़ आते हैं। यहां कोई गवर्नमेंट हाॅस्टल जरूरत के मुताबिक नहीं है। नतीजा बच्चों को मजबूरी में पीजी में रहना पड़ता है। ज्यादा पैसे के लालच में ज्यादातर सेक्टरों में लकड़ी और फाइबर के बच्चों के लिए बनाए गए हैं डेथ चैंबर्स। पीजी बच्चों को जगह प्रोवाइड करवाने के लिए नहीं, बल्कि बिजनेस बन चुका है। सेक्टरों में लोग अपने घरों में पीजी का बिजनेस चला रहे हैं। रेगुलर चेकिंग नहीं होती, इसके चलते ये अवैध पीजी बिना किसी रोक टोक के चल रहे हैं।

शहर में कई पीजी को नोटिस भेजने के दावे

पिछले करीब 6 महीनों में ही 100 से ज्यादा पीजी को नोटिस जारी हुए। इसमें से 108 पीजी को लेकर तीनों एसडीएम के पास अब सुनवाई चल रही है। डिप्टी कमिश्नर मनदीप सिंह बराड़ ने कहा कि उन्होंने तीनों एसडीएम को कहा गया है कि वे पीजी को लेकर चल रहे मामलों पर जल्द कार्रवाई करें। इस्टेट ऑफिस और एसडीएम ऑफिस रेगुलर इंस्पेक्शन पीजी को लेकर कर रहे हैं, जिसको तेज करने के लिए कहा गया है।

डीसी को लेटर भेजेंगे

अनिल गर्ग, एडिशनल कमिश्नर एमसी कम चीफ फायर ऑफिसर ने कहा कि रेजिडेंशियल बिल्डिंग में चेकिंग नहीं की जाती है क्योंकि नियमों के हिसाब से ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए डिप्टी कमिश्नर ऑफिस में लेटर भेजेंगे ताकि जो भी पीजी चल रहे हैं उनको कमर्शियल घोषित किया जाए। उसके तहत फिर फायर डिपार्टमेंट जाकर रेगुलर चेकिंग इनमें कर सके कि कितना काम बच्चों की सेफ्टी के लिए इनमें किया गया है।

इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा पीजी.

असिस्टेंट इस्टेट अफसर (एईओ) मनीष कुमार लोहान ने कहा कि शहर की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और बाकी लोगों को अवेयर किया जाएगा ताकि अगर कहीं पर पीजी चल रहा है तो उसको लेकर शिकायत वे इस्टेट ऑफिस से कर सकें। तीनों एसडीएम को अपने-अपने एरिया में रेगुलर इंस्पेक्शन को लेकर कहा गया है।

जांच की जिम्मेवारी बिल्डिंग ब्रांच व एसडीएम की

अगर किसी भी बिल्डिंग में कोई वाॅयलेशन होती है तो इसको चेक करने की जिम्मेदारी स्टेट ऑफिस के तहत आते बिल्डिंग ब्रांच की होती है वहीं एरिया वाइज सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी होती है कि एरिया में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर नजर रखी जाए। अवैध पीजी पर नजर रखने को लेकर दोनों ही सरकारी एजेंसियां फेल साबित हुई है, इसके चलते दर्दनाक घटना चंडीगढ़ में सामने आई है क्योंकि अगर चेकिंग होती और पीजी पर कार्रवाई की जाती तो 3 बच्चियों की जिंदगी बचाई जा सकती थी।

डीसी ने एसडीएम को सौंपी जांच

डिप्टी कमिश्नर ने जांच एसडीएम साउथ को दी गई है जिसमें उन अफसरों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कहा गया है, जिनको इस तरह की गतिविधियां चेक करनी थी वह चाहे स्टेट ऑफिस का हो या फिर पुलिस डिपार्टमेंट।

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