सिटी प्राइड / ऑल इंडिया टॉप-100 में ट्राईसिटी के चार स्टूडेंट, चौथी रैंक हासिल कर चैतन्य रहे टॉप पर



अपने पेरेंट्स के साथ चैतन्य अपने पेरेंट्स के साथ चैतन्य
अमृतेश अमृतेश
ईशान गुप्ता ईशान गुप्ता
गौतम गौतम
रिशभ मानुजा रिशभ मानुजा
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अपने पेरेंट्स के साथ चैतन्यअपने पेरेंट्स के साथ चैतन्य
अमृतेशअमृतेश
ईशान गुप्ताईशान गुप्ता
गौतमगौतम
रिशभ मानुजारिशभ मानुजा

  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) का रिजल्ट हुआ घोषित
  • ट्राईसिटी के स्टूडेंट्स का प्रदर्शन इस बार काफी बेहतर रहा

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 07:03 PM IST

चंडीगढ़. एम्स में ट्राईसिटी के चार स्टूडेंट्स ने टॉप 100 पोजिशंस में जगह बनाई है। चंडीगढ़ सेक्टर 35 के चैतन्य मित्तल ने ऑल इंडिया फोर्थ रैंक लेकर ट्राईसिटी में फर्स्ट पोजिशन हासिल की। मोहाली के अमृतेश ने रैंक 12 लेकर टाईसिटी में सेकेंड पोजिशन ली।

 

सेक्टर-24 के पीजीआई फ्लैट्स के ईशान ने 14वां रैंक लेकर ट्राईसिटी में थर्ड पोजिशन ली। सेक्टर-34 के गौतम ने 54वीं पोजिशन ली और ट्राईसिटी में चौथे स्थान पर रहे। पंचकूला एमडीसी सेक्टर-5 के रिशभ ने ऑल इंडिया 112वां रैंक हासिल किया। चैतन्य, अमृतेश, गौतम और ईशान गुरु हरकृष्ण स्कूल सेक्टर-38 के स्टूडेंट रहे और एलन इंस्टीटयूट से काेचिंग ली।
 

रैंक 4, नीट में नहीं रहा था बेहतर प्रदर्शन: चैतन्य मित्तल ने कहा कि नीट के एग्जाम में उनका बेहतर प्रदर्शन नहीं रहा। हालांकि तैयारी उन्होंने पूरी की थी लेकिन वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जैसा सोचा था और 261 रैंक आया। चैतन्य ने कहा कि भगवान को शायद इससे ज्यादा बेहतर मुझे देना था इसलिए नीट में बेहतर नहीं रहा। मैंने एम्स की तैयारी पूरी जान लगाकर की और रिजल्ट बेहतरीन रहा। 12वीं क्लास में 97.8 परसेंट ला चुके चैतन्य ने कहा कि वह सोशल मीडिया को डिस्ट्रैक्शन मानते हैं इसलिए इस पर बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं थे। चैतन्य के पेरेंट्स पुनीत और मोनिका मित्तल दोनों ही डॉक्टर्स हैं।


रैंक 12, लोगों की भलाई के लिए काम करना है: अमृतेश सिंह ने कहा कि उसने मेडिकल प्रोफेशन को इसलिए चुना क्योंकि वह लोगों की भलाई के लिए कुछ करना चाहते हैं। सबसे बेहतरीन काम डॉक्टर बनकर किया जा सकता है क्योंकि यह एक नोबल प्रोफेशन है अौर लोगों को हेल्थ से जुड़ी दिक्कत से निकालने में डॉक्टर की अहम भूमिका रहती है। अमृतेश के पेरेंट्स डॉक्टर हैं और वह खुद भी कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं। अमृतेश ने कहा कि कड़ी मेहनत और खुद पर यकीन रखना ही उसका सक्सेसमंत्रा रहा। जब तक आप खुद पर यकीन नहीं रखेंगे तब तक आप जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएंगे। अपने लक्ष्य को हर समय अपने दिमाग में रखें और निरंतर काम करते रहेंगे तो आप जरूर अपने लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।

 

रैंक 14, मेरी मां ही मेरी प्रेरणा है: ईशान गुप्ता ने कहा कि मेरी मां ही मेरी प्रेरणा है अौर आज जो रैंक मैं हासिल कर पाया हूं वह अपनी मां की वजह से ही है। पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ साईटोलॉजी में डॉ. नलिनी गुप्ता बतौर प्राेफेसर कार्यरत हैं। ईशान ने कहा कि अपनी मां की वजह से ही मैं इस प्रोफेशन में आया हूं और मेरा सपना एंडोक्रिनोलॉजिस्ट बनने का है। फोकस होकर पढ़ें और क्वालिटी पढ़ाई करें यानी यह देखें कि क्या जरूरी है या क्या नहीं। मैं कभी कभी वॉट्सएप का इस्तेमाल करता था क्योंकि वह मेरे लिए एक तरह का स्ट्रैस बस्टर रहा।


रैंक 54, नीट से बेहतर प्रदर्शन एम्स में: गौतम का प्रर्दशन नीट एग्जाम के मुकाबले एम्स में ज्यादा बेहतर रहा। नीट में गौतम का 96वां रैंक आया था लेकिन एम्स में 54वां रैंक आया। पिता राजिंदर कौशल एसबीआई में रीजनल मैनेजर हैं और मां अमृता कौशल होममेकर हैं। गौतम ने कहा कि मेडिकल स्ट्रीम की कोचिंग उसने 9वीं क्लास से ही लेनी शुरू कर दी थी। 11वीं 12वीं में पहुंचे तो कंपीटिटव एग्जाम्स पर फोकस किया। करीब 9 घंटे की पढ़ाई करते थे और जब पढ़ाई करके थक जाते तो गाने सुनते और क्रिकेट खेलते थे। गौतम ने कहा कि केमिस्ट्री और फिजिक्स पर फोकस करेंगे तो एग्जाम्स को क्रैक करना मुश्किल नहीं रहेगा।


रैंक 112, इंजीनियरिंग नहीं मेडिकल के प्रोफेशन को अपनाया:
डीसी मॉन्टेसरी स्कूल से 12वीं में 98 परसेंट लेकर आ चुके रिशभ मनोजा ने इंजीनियरिंग के प्रोफेशन को नहीं चुना। रिश्भ की मां होममेकर हैं। उनके पिता बैंग्लोर में इंजीनियर हैं लेकिन रिश्भ का इंट्रस्ट मेडिकल प्रोफेशन में था इसलिए उसने यह एग्जाम दिया। रिश्भ का सक्सेसमंत्रा हार्डवर्क और कंसीस्टेंट स्टडीज है। रिश्भ ने कहा कि नीट एग्जाम में 561 रैंक आया था लेकिन इससे उन्हें काफी निराशा हुई लेकिन इसके बाद जवाहर लाल नेहरू इंस्टीटयूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रीसर्च पुडुचेरी के एग्जाम के रिजल्ट भी हाल ही में आया और इसमें रिश्भ का 25 रैंक आया। रिश्भ का कहना है कि उन्हें एम्स दिल्ली में एडमिशन नहीं मिलेगी और देश के किसी अन्य एम्स में वह जाना नहीं चाहते इसलिए पुडुचेरी को चुनेंगे।

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