आजमाइश / भाजपा प्रदेश अध्यक्ष छह नामों में से चुना जाएगा, सभी गुट लगा रहे जोर

चंडीगढ़ जिलाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के कई गुट सामने आए। डेमो फोटो चंडीगढ़ जिलाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के कई गुट सामने आए। डेमो फोटो
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चंडीगढ़ जिलाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के कई गुट सामने आए। डेमो फोटोचंडीगढ़ जिलाध्यक्ष बनने के लिए भाजपा के कई गुट सामने आए। डेमो फोटो

  • तीनों गुट की राय जानने के लिए हाईकमान ने केंद्रीय रेल मंत्री को चुना पर्यवेक्षक

दैनिक भास्कर

Dec 09, 2019, 11:33 AM IST

चंडीगढ़. चंडीगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव 15 दिसंबर से पहले होने की उम्मीद है। प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सतिंदर सिंह सबसे आगे हैं। लेकिन दावेदारों में देवेश मोदगिल, चंद्र शेखर, राजकिशोर और आशा जसवाल को भी कम नहीं आंका जा सकता है। सतिंद्र सिंह को आरएसएस नेताओं के साथ ही सांसद किरण खेर का समर्थन हासिल है।

वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष संजय टंडन गुट से चंद्रशेखर , राजकिशोर और आशा जसवाल हैं। उनमें से एक को प्रधान बनाने की खुद टंडन पैरवी कर रहे हैं, जबकि पूर्व सांसद सत्यपाल जैन देवेश मोदगिल के लिए हाईकमान में पैरवी कर रहे हैं। अध्यक्ष के लिए चल रही भाजपा में गुटबाजी को कम करने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल पर्यवेक्षक चुना है। वे अगले हफ्ते यहां आ रहे हैं।

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल यहां शहर में आकर तीनों गुट के दावेदारों के बारे में जानकारी लेंगे। जिस तरह से मंडल अध्यक्ष फिर जिला अध्यक्ष का चुनाव करने में मौजूदा गुट पर दूसरे गुटों ने आरोप लगाए हैं। हाईकमान तक शिकायत भेजी है, जिसके चलते जिला अध्यक्ष के चुनाव भी बीच में लटके हैं।

वैसे पूर्व काउंसलर एवं भाजपा युवा मोर्चा के प्रधान रहे सतिंद्र सिंह भाजपा प्रधान पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। क्योंकि सतिंद्र को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सपोर्ट कर रहा है। इसके अलावा सांसद किरण खेर भी सतिंद्र के पक्ष में पूरी तरह से लगी हैं। सांसद भी चाहती हैं कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन गुट को कोई कैंडीडेट प्रदेश अध्यक्ष न बन सके।

पूर्व सांसद एवं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन अपने खासमखास देवेश मोदगिल के लिए पैरवी में लगे हुए हैं। जिस तरह से देवेश को विरोध के चलते 2018 में मेयर प्रत्याशी बनाने में सफल हो गए थे। ठीक इसी तर्ज पर प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर देवेश को बैठाने के लिए पार्टी हाईकमान में जी तोड़ कोशिश में लगे हुए हैं।

जैन की पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ काफी निकटता है। इसी के चलते वे देवेश को मेयर बनाने में कामयाब रहे थे। अगर किसी कारण वंश जैन अपने खास देवेश मोदगिल को पार्टी अध्यक्ष बनाने में पिछड़ते हैं तो ऐसी सूरत में पूर्व सांसद सत्य पाल जैन भी सतिंद्र सिंह को फेवर कर सकते हैं।

जैन कतई नहीं चाहते कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के गुट से प्रदेश अध्यक्ष बने। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने चाहते हैं कि अपने गुट से ही आगे प्रदेश अध्यक्ष बने। खुद टंडन 10 साल से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बने हैं। वे नहीं चाहते कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी दूसरे गुट के पास जाए। टंडन गुट से तीन दावेदारों के नाम हाईकमान के पास गए हुए हैं। इनमें से चंद्र शेखर और राजकिशोर किसी कारण से दौड़ में पिछड़ते हैं। ऐसे में पूर्व मेयर आशा जसवाल को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने का दांव चल सकेंगे। महिला होने के नाते पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महिला को बनाए जाए।

प्रदेशअध्यक्ष पर टिका है अगला मेयर प्रत्याशी..

बीजेपी के तीन गुट प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए आपस में लॉबिंग करने में लगे हुए हैं। जो भी प्रदेश अध्यक्ष होगा वही अगले साल बनने वाले मेयर के नाम की घोषणा करेगा। इसको लेकर भी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए तीनों गुट जी जान से लगे हुए हैं। अभी गुटबंदी के चलते मेयर पद की दावेदारों में हीरा नेगी, राजबाला मलिक, सुनीता धवन हैं।

हीरा नेगी और राजबाला मलिक सांसद गुट से संबंध रखती हैं। लेकिन हीरा नेगी मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष टंडन गुट से भी निकटता रखे हुए हैं। नेगी हाईकमान के नेताओं को भी मिल चुकी हैं। वे उत्तराखंड के सीएम और अन्य नेताओं की पार्टी हाईकमान को भी अप्रोच भी लगवा चुकी हैं। हालांकि सांसद किरण खेर अभी मेयर पद को लेकर चुपी साधे हुए हैं लेकिन उनका साथ राजबाला के साथ रहेगा। हालांकि हीरा नेगी भी उनके साथ हैं, लेकिन मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष से निकटता होने के कारण सांसद नेगी को सपोर्ट करने में हाथ खींच सकती हैं।

वहीं मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन मेयर पद के लिए महिला प्रदेश अध्यक्ष एवं काउंसलर सुनीता धवन के साथ ही पूर्व मेयर आशा जसवाल को सपोर्ट कर रहे हैं। लेकिन मेयर पद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनने पर टिका है।

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