पंजाब / कैप्टन सरकार का दूसरा बजट 18 को, लेकिन पिछले बजट में ही किए गए ज्यादातर वादे पूरे नहीं



मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंहमुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह

  • 1,95000 करोड़ का लोन अाउटस्टेंडिंग, हर महीने 290 करोड़ ब्याज में ही चले जाते हैं
  • कर्ज के मुकाबले कमाई कम, पुराना लोन चुकता नहीं नया ले लेते हैं

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 06:36 AM IST

जालंधर (प्रवीण पर्व). बजट सेशन आज (मंगलवार) से शुरू हो रहा है। 18 फरवरी को कैप्टन सरकार अपना दूसरा बजट पेश करेगी। सरकार के लिए चैलेंज ये है कि पिछले बजट में किए गए अधिकतर वादे पूरे नहीं हो पाए। सबसे बड़ा वादा युवाओं को स्मार्ट फोन देने का है। सरकार आर्थिक संकट का रोना रो रही है। पंजाब सरकार पर मार्च 2018 तक 1,95000 करोड़ का लोन आउटस्टेंडिंग है। हर महीने करीब 290 करोड़ ब्याज में ही चला जाता है। तमाम तरह के कर्जों पर 2016-17 में ही 4152 करोड़ ब्याज गया था।

 

सरकार के तीन बड़े विभाग पीआईडीबी, आरडीबी और पुडा भारी कर्ज में दबे हुए हैं। माली हालत सुधारने के लिए सरकार ने पिछले बजट में 150 करोड़ का प्रोफेशनल टैक्स भी लगाया लेकिन उससे भी हालत में कोई फर्क नहीं पड़ा। इस बजट में सरकार पर पुराने वादे और स्कीमें पूरी करने का दबाव रहेगा। छठे वेतन अयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए सरकारी मुलाजिमों के वेतन के लिए भी करीब 2000 करोड़ रुपए चाहिए। इस बीच सरकार के लिए चैलेंज ये है कि 13 परसेंट कमाई घट गई है। जानिए पंजाब की अर्थिक हालत की ग्राउंड रिपोर्ट।  

 

  • पिछले बजट में नई सरकार ने बताया था कि पंजाब का कर्ज 1,95000.2 करोड़ रुपये है जबकि चुनावी साल में टोटल रेवेन्यू रिसीप्ट 45408 करोड़ रुपये थी। 
  • चुनावी साल 2016-17 में सरकार ने 16,730 करोड़ रुपये उधार लिए थे जबकि 10098 करोड़ रुपये सारे पिछले कर्ज मिलाकर बतौर ब्याज चुकाए। जबकि 4047 करोड़ रुपये कर्ज की वापसी पर चले गए। 
  • पावरकाम की सब्सिडी का 1387 करोड़, मुलाजिमों का डीए 2773 करोड़। अाटा-दाल स्कीम का 1700 करोड़। सामाजिक विभाग की पेंशनों का 150 करोड़। शहरी विकास के लिए पंजाब व केंद्र सरकार की स्कीमों का 200 करोड़ रुपया खर्च होना बाकी। 

 

सरकारी स्कीमों का पैसा 1 साल से रुका : केंद्र सरकार से पंजाब को स्मार्ट सिटी, नेशनल हेल्थ मिशन, अमरुत योजना, सर्व शिक्षा अभियान आदी के तहत पिछले साल तक 1400 करोड़ रुपये मिले थे। पंजाब सरकार स्मार्ट सिटी, अमरुत स्कीमों को अभी तक लागू नहीं कर पाई। ये पैसा 1 साल से खातों में पड़ा है। 

 

तीन बड़े विभाग कर्जे में :

  • पीआईडीबी 4722 करोड़, अारडीबी 5795 करोड़, पुडा 2124 करोड़ के कर्जे में है।  
  • पंजाब की जीडीपी का 44 परसेंट बतौर कर्ज बनता है।  पंजाब सरकार पर मार्च 2018 तक 1,95000 करोड़ लोन अाउटस्टेंडिंग है। सरकार हर महीने करीब 290 करोड़ ब्याज देती है। पंजाब तमाम तरह के कर्जों पर साल 2016-17 में 4152 करोड़ रुपये हर साल देते था। अब ये ब्याज खर्च 10098 करोड़ रुपये हो चुका है। 
     

वित्तीय घाटा 10842 करोड़ से बढ़ कर 52840 करोड़ हुआ : 
सूबे का माली घाटा घटाने का दावा हर साल सरकार करती है लेकिन सीन उलटा है। 2014-15 में वित्तीय घाटा 10842 करोड़ था जो 2017-18 में 52840 करोड़ हो चुका है। सरकार की सबसे बड़ी दिक्कत कर्ज है। 
 

 

 

रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सेलरी-पेंशन पर खर्च :

  •  पंजाब का रेवेन्यू 2006-7 में 16796 करोड़ था। जो 2016-17 तक 45048 करोड़ रुपये रहा लेकिन अब 18,547 करोड़ रुपये मुलाजिमों की सैलरी, पेंशन देने में चले जाते हैं। 
  •  पंजाब सरकार के 29 बोर्ड व 28 कार्पोरेशन जिनमें मार्कफेड, शूगरफेड, मिलकफेड अदि शामिल हैं में पंजाब सरकार की हिस्सेदारी 8234 करोड़ रुपये है। इन बोर्डों और कार्पोरेशनों ने 17030.92 करोड़ रुपये के लोन ले रखे हैं।


जीएसटी लागू होने पर वैट से कमाई  13 फीसदी घटी : जीएसटी से पहले प्रदेश की 63 परसेंट कमाई वैट से अाती थी जो 2017 तक 17587 करोड़ थी। मोटर व्हीकल टैक्स से 1620 करोड़, तरह तरह के सरचार्ज से 101 करोड़, लैंड रेवेन्यू से 68 करोड़, बिजली ड्यूटी से 1993 करोड़, स्टांप एंड रजिस्ट्रेशन से 2043 करोड़, स्टेट एक्साइज से 4406 करोड़ थी। जब जीएसटी लगी तो कमाई तो बिक्री से दोगुनी हो गई लेकिन रिफंड की जटिलताओंं से केंद्र से अपनी हिस्सेदारी के लिए तरस गई है। ताजा रिपोर्ट ये है कि जीएसटी से इनकम 13 परसेंट घट गई है। 
 

मेनिफेस्टो व बजट में किए वादे जो अधूरे :

  • एससी कार्पोरेशन के 50 हजार तक के कर्ज माफ नहीं हुए।   
  • सीनियर सेकंडरी क्लासों की सरकारी स्कूलों की स्टूडेंट्स के लिए 5 करोड़ सेनेटरी पैड खरीदने थे। 
  • चाय-पत्ती को अाटा-दाल स्कीम से जोड़ा। सप्लाई नहीं हुई। 
  • युवाओं को चुनावी वादे के अनुसार मोबाइल फोन नहीं दिए गए। 
  • शहरों को नए 5 डिग्री कालेज नहीं मिले। ये योजना शिक्षा विभाग को सौंपी गई है। पिछले बजट में घोषित इस योजना पर अभी कोई काम नहीं हुअा है। 
  • जालंधर, अमृतसर व लुधियाना में नए अर्बन इस्टेट 2020 करोड़ से बनने थे। काम स्टार्ट नहीं। 
  • एससीसी व बीसी को 50 करोड़ की लागत से 2000 फ्री घर देने थे। एप्लीकेशन ले लिए लेकिन योजना पूरी नहीं हो सकी है। 
  • शहरों में वेलनेस क्लीनिक नहीं खोल सके। अभी इनके लिए पीपीपी मोड योजना पर काम चल रहा है। 
  • विमेन एंटरप्राइजेज में स्टार्टअप के लिए सरकार ने मदद देनी है। स्कीम कागजों में ही है।   
  • बेरोजगारों को 2500 रुपये महीना भत्ता देने का एेलान किया था, वादा पूरा नहीं किया गया है। रोजगार मेलों के बाद भी जब कोई दावा करेगा कि मेरे पास काम नहीं, तब उसकी सुनी जाएगी। 
  • लड़कियों के स्कूलों व कालेजों के बाहर सरकार ने कैमरे लगाने थे, योजना को फंड नहीं मिला है। अभी 1800 स्कूलों में नए क्लास रूम बनाने की योजना बनी है। लागू होनी बाकी। 

-सरकार पर इन वादों को पूरा करने का दबाव है। हो सकता है इस बजट में फंड अलॉट हो जाए।

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