चंडीगढ़ / लोहड़ी सेलिब्रेट करते मुटियारों ने डाला गिद्दा, जलती आग में अन्न डाल सुख-समृद्धि की कामना की

ज्ञान ज्योति स्कूल में लोहड़ी का पर्व मनाया गया
रंग बिरंगे कपड़े पहन पहुंची स्टूडेंटस रंग बिरंगे कपड़े पहन पहुंची स्टूडेंटस
लोहड़ी सेलीब्रेट करते स्टूडेंटस लोहड़ी सेलीब्रेट करते स्टूडेंटस
लोहड़ी में आग में अन्न डाला जाता है लोहड़ी में आग में अन्न डाला जाता है
लोकनाच गिद्दा पेश किया लोकनाच गिद्दा पेश किया
स्टूडेंटस ने डांस किया स्टूडेंटस ने डांस किया
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रंग बिरंगे कपड़े पहन पहुंची स्टूडेंटसरंग बिरंगे कपड़े पहन पहुंची स्टूडेंटस
लोहड़ी सेलीब्रेट करते स्टूडेंटसलोहड़ी सेलीब्रेट करते स्टूडेंटस
लोहड़ी में आग में अन्न डाला जाता हैलोहड़ी में आग में अन्न डाला जाता है
लोकनाच गिद्दा पेश कियालोकनाच गिद्दा पेश किया
स्टूडेंटस ने डांस कियास्टूडेंटस ने डांस किया

  • ज्ञान ज्योति ग्लोबल स्कूल में मनाई स्टूडेंटस ने लोहड़ी
  • दुल्हा भट्‌टी की कहानी सुनाई गई और गिद्दा डाला
  • नई शादी होने व लड़का-लड़की पैदा होने पर खुशी मनाई जाती है

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2020, 04:14 PM IST

मोहाली. पंजाब के प्रमुख पर्व लोहड़ी की आज प्रदेश में धूम मची हुई है। स्कूल-संस्थाओं सहित हर घर में लोहड़ी का त्यौहार खुशी से मनाया जा रहा है। ज्ञान ज्योति ग्लोबल स्कूल में आयोजित लोहड़ी पर्व के मौके आग जला कर चारों तरफ धूम-धूमकर स्टूडेंटस ने गिद्दा डाला और मस्ती की।

रंग-बिरंगे कपड़े पहन पहुंची स्टूडेंटस की ओर से लोकनाच गिद्दा डाला गया। ढोल की थाप पर जलती आग के चारों घूम कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मकर संक्रांति से पहले लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।

लोहड़ी के दिन आग में तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली डाली जाती हैं। पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्यौहार है। इस अवसर पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन चौराहों पर लोहड़ी जलाई जाती है। ज्ञान ज्योति ग्लोबल स्कूल की प्रिंसिपल रंजीत बेदी ने बताया कि इस दिन आग में अन्न डाल कर सुखों की कामना की जाती है।

लोहड़ी पर सुनते हैं दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी वाले दिन आग के पास घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाई जाती है। दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। मान्यता है कि मुगल काल में अकबर के शासनकाल समय दुल्ला भट्टी नाम का एक शख्स पंजाब में रहता था। उस समय कुछ अमीर व्यापारी सामान की जगह शहर की लड़कियों को बेचा करते थे, तब दुल्ला भट्टी ने उन लड़कियों को बचाकर उनकी शादी करवाई थी। तब से हर साल लोहड़ी के पर्व पर दुल्ला भट्टी की याद में उनकी कहानी सुनाने की पंरापरा चली आ रही है।

लड़का-लड़की पैदा होने पर लोहड़ी मनाई जाती है

लोहड़ी के मौके नई शादी होने पर या लड़का-लड़की के पैदा होने पर लोहड़ी का पर्व खुशी से मनाया जाता है। पहले लड़का होने पर लोहड़ी पर खुशी मनाई जाती थी। लेकिन अब कुछ सालों से लड़की के पैदा होने पर भी उसी खुशी और उमंग के साथ लोहड़ी मनाई जाती है जैसे लड़के की लोहड़ी मनाई जाती थी।

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