चंडीगढ़ / चंडीगढ़ पुलिस में सैलरी घोटाला करने वालों पर केस दर्ज होगा, प्रशासक ने मंजूरी दी

अधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया। डेमो फोटो अधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया। डेमो फोटो
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अधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया। डेमो फोटोअधिकारियों ने मिलकर घोटाला किया। डेमो फोटो

  • पुलिस कर्मियों के नाम से फर्जी बिल, एरियर बनाकर की गड़बड़ी

दैनिक भास्कर

Feb 18, 2020, 10:51 AM IST

चंडीगढ़. फाइनेंस डिपार्टमेंट से पुलिस में आए बाबुओं, असिस्टेंट और करीब 40 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, इम्बेजलमेंट आदि धाराओं के तहत केस दर्ज होगा। पूरी डिटेल रिपोर्ट तैयार कर अप्रूवल के प्रशासन के पास भेज दी गई थी, जिसे अब अप्रूवल मिल गई है।

जिसे गड़बड़ी रोकने को लगाया उसी ने किया घोटाला

नए प्रावधान के तहत करप्शन एक्ट का केस दर्ज करने से पहले संबंधित विभाग से परमिशन लेनी जरूरी है। अब जैसे ही मंजूरी वाली रिपोर्ट आती है तो उसके बाद मामला दर्ज किया जाएगा। प्रशासन के फाइनेंस डिपार्टमेंट से स्पेशल तौर पर एसओ यानि डीडीओ जगदीप और एसीएफए सुधीर पराशर को पुलिस डिपार्टमेंट के अकाउंट्स डिपार्टमेंट में तैनात किया गया था, ताकि किसी तरह की अकाउंट्स में गड़बड़ी न हो। लेकिन हुआ उलटा। एसओ जगदीप की ब्रांच के अधीन गड़बड़ी नहीं, बल्कि बड़ा घोटाला हो गया। जिन फर्जी बिलों के आधार पर पैसा विदड्रॉ हुआ, उन्हें पास करने में खुद एसओ के हस्ताक्षर तक हैं। वहीं, एसीएफए सुधीर पराशर की रिपोर्ट में सारा ठीकरा सिर्फ जूनियर असिस्टेंट पर फोड़ा जाना तय किया जा रहा है। दलील दी जा रही है कि जो नीचे से आया, उसी को आगे एसओ ने भेज दिया। ऐसे में फिर इन एक्सपर्ट्स की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारियों को शिकायत भेजी गई

फाइनेंस सेक्रेटरी अजॉय सिन्हा और डीजीपी बैनीवाल को किसी ने शिकायत भेजी थी। पुलिस में गए अकाउंट्स के बड़े बाबू जिसमें एसओ अकाउंट्स का जिक्र किया गया। शिकायत में लिखा कि पुलिस मुलाजिमों के जाली बिल एलटीए बनाकर लाखों का घोटाला किया गया। पुलिसकर्मियों के अकाउंट्स में ज्यादा सैलरी डाली गई। बाद में पैसा आपस में बांटा जाता रहा।

ऐसे किया घोटाला

पुलिस के अकाउंट्स डिपार्टमेंट ने चुपचाप पुलिसकर्मियों की सर्विस बुक अपने पास मंगवानी शुरू कर दी। सर्विस बुक मंगवाने के बाद उसी में जाली बिल बनाकर, बिल पास करवाकर, पैसे निकलवाकर और रिकाॅर्ड सर्विस बुक में लगाकर सर्विस बुक वापस ब्रांच में भेज दी जाती थी। कायदे के मुताबिक गजटेड अफसर के नीचे सर्विस बुक मंगवाई ही नहीं जा सकती। साफ है कि पुलिस में कार्यरत सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ धोखाधड़ी हुई।

यह था मामला
चंडीगढ़ पुलिसकर्मियों के नाम से फर्जी बिल, एरियर बनाकर घपला करने वालों के खिलाफ अब मामला दर्ज होगा। सोमवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनोर ने एफआईआर रजिस्टर करने के आदेश दे दिए हैं। अब जल्द ही इस मामले में यूटी पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू करेगी। इसके बाद इस मामले में गिरफ्तारी भी हो सकती है।

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