चंडीगढ़ / सर्वे में हुआ खुलासा, चंडीगढ़ के 75.7% लोग ही आयोडीन नामक की गुणवत्ता के बारे में जानते हैं



आयोडीन नमक की जानकारी। डेमो फोटो आयोडीन नमक की जानकारी। डेमो फोटो
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आयोडीन नमक की जानकारी। डेमो फोटोआयोडीन नमक की जानकारी। डेमो फोटो

  • एम्स के सहयोग से एक निजी संस्था की ओर से कराया गया सर्वे, 600 घरों में पहुंची टीम

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 10:20 AM IST

चंडीगढ़. आयोडीन नमक के महत्व के बारे में चंडीगढ़ में 75.7 फीसदी लोग ही जानते हैं। यह बात एक सर्वे में सामने आई। एक संस्था की ओर से भारतीय घरों में आयोडीन नमक की पहुंच कितनी है, इसको लेकर किए गए एक सर्वे में चंडीगढ़ के 600 घरों में आयोडाइज्ड नमक के बारे में पूछा गया तो पाया कि 75.7 प्रतिशत लोगों को आयोडाइज्ड नमक के महत्व की जानकारी रखते हैं। शहरी क्षेत्र के 100 फीसदी घरों में रिफाइंड नमक का ही उपयोग किया जाता है।

 

सर्वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के सहयोग से एसोसिएशन फॉर इंडियन कोलिनेशन फॉर कन्ट्रोल ऑफ आयोडीन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर (आईसीसीडीआईडीडी)और कान्टार के लिए किया गया, जिसमें पाया गया कि 76.3 प्रतिशत भारतीय घरों में पर्याप्त मात्रा में आयोडाइज्ड नमक का उपयोग होता है इसका अर्थ यह माना जाए कि 15 पार्ट प्रति मिलियन (पीपीएम) आयोडाइज्ड नमक का उपयोग किया जाता है।

 

परिणाम भारत द्वारा यूनिवर्सल साल्ट आयोडीजेशन की दिशा में की गई प्रगति के बारे में बताते हैं जिसमें पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक के साथ 90 फीसदी आबादी तक पहुंचने का लक्ष्य है।

 

इन नतीजों की घोषणा डॉ. विनोद पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य एवं पोषण) नीति आयोग, भारत सरकार के साथ ही डॉ. चंद्रकान्त एस. पाण्डव, अध्यक्ष एसोसिएशन फॉर इंडियन कोलिनेशन फॉर कन्ट्रोल ऑफ आयोडीन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर एवं पूर्व प्रोफेसर एवं हेड सेन्टर फॉर कम्युनिटी मेडिसन, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली, न्यूट्रिशन इंटरनेशनल के क्षेत्रीय निदेशक, एशिया एण्ड्रू ओ कॉनल एवं मिनी वर्गीज, न्यूट्रिशन इंटरनेशनल की इंडिया कंट्री डायरेक्टर की उपस्थिति में जारी की गई।

 

आयोडीन की कमी से होते हैं कई रोग

आयोडीन मानव में सर्वोत्तम मानसिक और शारीरिक विकास के लिए कम मात्रा में नियमित रूप से आवश्यक एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। आयोडीन की कमी के परिणामस्वरूप विकलांगता और विकारों की एक बड़ी श्रृंखला रोग हो सकते हैं जैसे कि गोइटर, हाइपोथायरायडिज्म, क्रेटिनिज्म, गर्भपात, मृत जन्म, मानसिक मंदता और साइको मोटर दोष। आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले बच्चों में आयोडीन पर्याप्त क्षेत्रों में पैदा होने वालों की तुलना में आईक्यू 13.5 अंक कम हो सकता है।

 

डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुसार, आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों को रोकने के लिए 15 पीपीएम रोज आयोडीन का सेवन जरूरी है।

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