धोखा / रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल ने करवाई दूध की जांच, मिला दूध में कैमिकल



Chemical is mixed in milk
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Chemical is mixed in milk

  • दूधवाले से लिए जाने वाले दूध की हर सप्ताह जांच होनी चाहिए
  • दूध पतला दिखता है और उसमें स्मैल आती है

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2019, 11:13 AM IST

चंडीगढ़. घर पर आने वाले दूध में दूधवाले की ओर से डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है, इसकी जानकारी तब मिली जब एक ग्राहक को दूध का पतलापन और उसमें से स्मैल आ रही थी। दूध किसी चीज की मिलावट होने पर जब उसकी जांच करवाई गई तो हैरानीजनक और सेहत से खिलवाड़ करने के गोरखधंधे का पता चला है। पंचकूला के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल राज का विश्वास तब टूटा जब उन्होंने दूध का टेस्ट लैबोरेट्री में करवाया।

 

लैबोरेट्री की रिपोर्ट आई कि दूध में न्यूट्रेलाइजर और एनिऑनिक डिटर्जेंट मिलाया गया है। कर्नल राज पिछले चार सालों से इस दूधवाले से दूध ले रहे थे। कर्नल अनिक राज ने कहा कि कई बार उन्होंने अपने दूध वाले से कहा कि दूध पतला होता है और उसमें स्मैल आती है। जब उस दूध की चाय बनाते थे तो अजीब सी दुर्गन्ध आती थी। दूध वाला अक्सर कहता था कि भैंस से दूध ऐसा ही निकल रहा है। सात जून को जिस पतीले में दूध था कुछ समय बाद उसे दूसरे पतीले में डाला गया। पहले वाले पतीले में पानी गिराया तो पानी का रंग नीला पड़ गया। कर्नल राज ने तुरंत ही दूध वाले को बुलाया और दिखाया कि कैसे रंग बदल गया है। इस पर दूध वाले ने कहा कि मैंने एक डेयरी से दूध लिया, लेकिन उसका नाम नहीं बताया।

 

सेटलमेंट के लिए आई कॉल

कर्नल राज ने बताया कि जब उन्होंने दूध का सैंपल लैबोरेट्री में दिया तो दूध वाले की सेटलमेंट के लिए कॉल आई। रिपोर्ट में आया कि न्यूट्रेलाइजर कैमिकल मिलाया गया था ताकि जो अन्य कैमिकल मिलाए गए हैं उनका पता न चले। न्यूट्रेलाइजर में सोडियम हायड्रोक्साइड रहता है जिसका असर आंखों और दांतों पर पड़ता है। एनिऑनिक डिटर्जेंट नाम का जो केमिकल डाला गया था उससे पेट की आंतड़ियों पर असर पड़ता है।

 

सीएमओ से की शिकायत

अनिल राज ने इसकी शिकायत पंचकूला - 6 हॉस्पिटल में सीएमओ से कर दी। शिकायत में दूध के नीले पड़ जाने की पूरी कहानी बताई गई कि कैसे उन्होंने 6 हजार रुपए देकर गवर्नमेंट अप्रवूड लैब से टेस्ट करवाया। इसके बाद सीएमओ ने फूड इंस्पेक्टर को आदेश दिए और दूध वाले से पता लगाया गया कि उसने कहां से दूध लिया। इसके बाद ही भैंसा टिब्बा की दुकानों से दूध के सैंपल लिए गए।

 

नॉन बेलेबल हो

यह एक बेलेबल ऑफेंस है जिसमें ज्यादा से ज्यादा 6 महीने की सजा होती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह डायरेक्शंस दी हैं कि इसे नॉन बेलेबल होना चाहिए। पुणे में यह नॉन बेलेबल किया गया है लेकिन यहां पर ऐसा नहीं है। -हरीश छाबड़ा, एडवोकेट

 

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