• Hindi News
  • Local
  • Chandigarh
  • Doctors who went to deputation in the vicinity of facilities are not returning home district, but now will be latna

डाॅक्टर्स का संकट / सुविधाओं के चक्कर में डेपुटेशन पर गए डॉक्टर्स नहीं लौट रहे हाेम डिस्ट्रिक्ट, पर अब लाैटना हाेगा

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
X
प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • 53 डॉक्टर्स और 87 पैरा मेडिकल स्टाफ चंडीगढ़ और दिल्ली में डेपुटेशन पर है

दैनिक भास्कर

Dec 19, 2019, 02:55 AM IST

चंडीगढ़ (सुखबीर सिंह बाजवा). पंजाब में डाॅक्टर्स की क्राइसेस चल रही है लेकिन के 53 डॉक्टर्स और 87 पैरा मेडिकल स्टाफ चंडीगढ़ और दिल्ली में डेपुटेशन पर चल रहे हैं। इनमें ज्यादातर चंडीगढ़ में हैं। ये डाॅक्टर सुविधाओं के चक्कर में डेपुटेशन जाने के बाद अपने गृह जिले में नहीं लौट रहे हैं। लेकिन अब इन्हें लौटना पड़ेगा।

क्योंकि सूबे के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए हेल्थ विभाग ने इन्हें वापस गृह जिले में भेजना का  फैसला किया है। कुछ डॉक्टर तो राजनैतिक या अफसरशाही तक पहुंच के चलते अपनी गृह राज्य में वापसी को रुकवा लेते हैं।

इतना ही नहीं पिछले 4 साल में डेपुटेशन पर सेवाएं देते हुए 23 सीनियर्स डॉक्टर्स रिटायर्ड हो चुके हैं। यह इनमें सर्जन, ऑर्थो, गायनी, मेडिसन आदि के विशेषज्ञ डॉक्टर्स शामिल हैं। जो डेपुटेशन पर चंडीगढ़ तो आए लेकिन कभी लौटकर नहीं गए।

चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर सेवाएं देते हुए 23 डॉक्टर्स हो चुके हैं रिटायर्ड
सूबे के कई जिलों के डॉक्टर दूसरे राज्यों में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं लेकिन अब लौटने का नाम नहीं ले रहे हैं। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग डेपुटेशन पॉलिसी में बदलाव करने का जा रहा है, जिसके तहत कोई भी डॉक्टर डेपुटेशन के तय समय के बाद उस स्थान पर सेवाएं नहीं दे पाएंगे जहां वे डेपुटेशन पर गए थे।

डेपुटेशन का समय पूरा होने के बाद उसे अपने गृह जिले में ही सेवाएं देनी पड़ेगी। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू जल्द मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलकर इस पॉलिसी को चर्चा करेंगे और उनके कहे अनुसार इसके अंतिम रूप देंगे।

ये हैं डेपुटेशन के नियम
जब भी चंडीगढ़ प्रशासन को डॉक्टर्स या पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत होती है तो प्रशासन पंजाब और हरियाणा सरकार को लिखता हैं। तब दोनों राज्यों का स्वास्थ्य विभाग इच्छुक डॉक्टर्स या पैरामेडिकल स्टाफ से आवदेन मांगता है। इन आवेदन पर एक कमेटी फाइनल करती है। उसके बाद चयनित डॉक्टर्स या पैरामेडिकल स्टाफ स्टाफ की डेपुटेशन पर तैनाती हो जाती है। नियमनुसार तो यह नियुक्ति 3 या 5 साल के लिए ही होती है, लेकिन डॉक्टर्स या पैरामेडिकल स्टाफ लौटकर जाते ही नहीं किसी न किसी सिफारिश से डेपुटेशन का समय बढ़वाते रहते हैं।

पिछली सरकारों ने कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिली

डेपुटेशन को लेकर डॉक्टर्स व पैरा मेडिकल स्टाफ के इस रवैये को लेकर हालांकि अकाली भाजपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रही लक्ष्मीकांता चावला ने कोशिश की थी। उनका भी कहना था कि डॉक्टर्स को तय सीमा के बाद डेपुटेशन से लौटना ही पड़ेगा लेकिन उस समय भी यह नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। अब कांग्रेस सरकार दोबारा यह कोशिश करने जा रही है।

नेताओं और अफसरों के चहेते ही दे रहे हैं डेपुटेशन पर सेवाएं
विभिन्न राजनेताओं और आईएएस व आईपीएस अफसरों के चहेते ही डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए वे सिफारिश करवाकर अपनी डेपुटेशन की सीमा बढ़वा लेते हैं। वे लंबे समय तक डेपुटेशन पर बने रहते हैं और तीन या पांच साल के बजाय एक दशक से भी अधिक डेपुटेशन पर बीता देते हैं।

क्यों पड़ी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत
प्रदेश के विभिन्न जिलों से डॉक्टर्स व पैरा मेडिकल स्टाफ डेपुटेशन पर गए हुए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है और लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की तरफ भागना पड़ता है। जो लोग प्राइवेट अस्पतालों की सेवाएं लेने में असमर्थ होते हैं उनको कई बार इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है।

इसलिए सरकार चाहती है कि लोगों को सरकारी अस्पतालों में ही उनके कम बजट में उचित इलाज मिले। इसी को देखते हुए सरकार ने यह पॉलिसी बनाई है ताकि बड़े डॉक्टर्स भी सरकारी अस्पतालों में लोगो को सेवाएं दे।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना