हेल्थ / पारंपरिक तंबाकू-सिगरेट की लत छुड़ा सकती है ई-सिगरेट



E-cigarette can prohibit the addiction of traditional cigarette.
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E-cigarette can prohibit the addiction of traditional cigarette.

  • हेल्थ केयर ई-सिगरेट ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अधीन रेगुलेट नहीं : इनफिनिट अचीवर्स
  • अलग-अलग आरटीआई रिप्लाई में ड्रग कंट्रोलर जनरल ने भी सिफारिश की

Dainik Bhaskar

Mar 25, 2019, 02:00 PM IST

चंडीगढ़. वैकल्पिक स्मोक के लिए प्रयासरत उपभोक्ता जागरूकता समूह - 'इनफिनिट अचीवर्स' ने गत दिनों दिल्ली हाईकोर्ट का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ई-सिगरेट को रेगुलेट नहीं किया जा सकता। जिसे कोर्ट की ओर से रोक का भी आदेश है। ग्रुप के जनरल सेक्रेटरी सुनीत नरूला ने बताया कि कोर्ट के 18 मार्च के अपने आदेश के माध्यम से ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को अपने-अपने राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) और संबंधित उत्पादों के निर्माण, वितरण, बिक्री ऑनलाइन सहित, आयात, विज्ञापन और व्यापार पर प्रतिबंधित करने के लिए जारी निर्देश पत्र पर रोक लगा दी है।

 

कोर्ट में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि ई-सिगरेट पारंपरिक सिगरेट की तुलना सुरक्षित विकल्प है और व्यक्ति को तंबाकू-सिगरेट की लत छुड़वाने में काफी कारगर है। ड्रग्स सलाहकार समिति की रिपोर्ट और विभिन्न आरटीआई रिप्लाई में ड्रग कंट्रोलर जनरल ने भी सिफारिश की है कि ई-सिगरेट ड्रग की परिभाषा में शामिल नहीं है और इसलिए यह ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 के दायरे में नहीं आते हैं। इसलिए ई-सिगरेट को अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत रेगुलेट नहीं किया जा सकता है। क्योंकि ई-सिगरेट कोई दवा नहीं है, इसलिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को इएनडीएस को प्रतिबंधित करने वाला कोई नोटिफिकेशन करने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं था। कोर्ट के इस स्टे का प्रभाव उन राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रालयों पर भी प्रभावित करेगा, जिन्होंने अगस्त 2018 में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लागू करने की एडवाइजरी जारी की थी।
 

 

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