चंडीगढ़-पंजाब / खादों और डीएपी की गुणवत्ता बेहतर होने से किसानों को 365 करोड़ रुपए की बचत

खेतों में काम करते किसान खेतों में काम करते किसान
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खेतों में काम करते किसानखेतों में काम करते किसान

  • पंजाब सरकार ने चलाई है विशेष मुहिम
  • नकली बीजों और कीटनाशकों की बिक्री पर सख्ती से पाबंदी

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 04:12 PM IST

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने किसानों के लिए कृषि को अधिक लाभदायक बनाने के लिए खादों की गुणवत्ता और उनके संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान दिया है। जिसके नतीजे लगातार बेहतर हो रहे हैं। साल 2018 की धान की फसल में यूरिया की खपत 86000 मीट्रिक टन और डीएपी की खपत 46,000 टन कम करने और साल 2019 में यूरिया की खपत 82000 मीट्रिक टन और डीएपी की खपत 33,000 टन कम करने में सफलता मिली है।

सिर्फ खाद और डीएपी में लाई गई इस कमी से किसानों को करीब 365 करोड़ रुपए की बचत हुई है। किसानों को ये पैसा अपने परिवार और दूसरे कामों में लगाने के लिए मिल सकता है। जबकि इससे पहले तक यूरिया और डीएपी के गैर जरूरी उपयोग के कारण ये पैसा बेकार जा रहा था। इस कदम से राज्य में होने वाली फसलों में रसायनों का अंश भी कम हुआ है और उनको अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने में मदद मिली है। इससे राज्य और देश की आबादी के स्वास्थ्य को भी लाभ मिला है।


इसके साथ ही राज्य में नकली बीजों, नकली या घटिया कृषि रसायनों की बिक्री को पूरी तरह से रोक दिया गया है और इन का कारोबार करने वाले लोगों पर सख्ती से कार्रवाई की गई है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में कपास और अन्स फसलों पर कीटों या किसी अन्य फसलीय बीमारी के किसी बड़े हमले को दर्ज नहीं किया गया है। इस एक कदम से किसानों को आर्थिक तौर पर काफी अधिक मदद मिली है।


सरकार प्रयास कर रही है कि कृषि संबंधित कोई भी रसायन बिना बिल के ना बेचा जाए। किसान के पास बीज या रसायन की खरीद का बिल होने पर, उसमें कोई गड़बड़ी पाए जाने पर विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई करना आसान हो जाता है। इसके साथ ही नदीननाशक के तौर पर व्यापक स्तर पर उपयोग में लाया जाता रहा ग्लाईफोसेट पर भी अब पाबंदी लगा दी गई है। इस कैमिकल के कारण इसके संपर्क में आने वाले लोगों को कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

कई कीटनाशकों के उपयोग को कम किया गया
कृषि विभाग के प्रयासों से पांच कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में मदद मिली है। इनमें ऐसिफोट, कारबाडिज्म, ट्रियोजोफोस, थियामैटोजाम और ट्राईसाइक्लिोजोल शामिल हैं। इससे पंजाब में होने वाली बासमती को वैश्विक मापदंडों पर खरा उतरने में मदद मिली है। इससे बासमती का दाम भी पिछले साल के 2600-3000 रुपए प्रति क्विंटल के मुकाबले इस बार 3600-4000 रुपए प्रति क्विंटल तक रहा।

(उपरोक्त कंटेंट दैनिक भास्कर स्पेस मार्केटिंग इनिशिएटिव के अंतर्गत पंजाब सरकार से लिया गया है)

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