फैसला / 24 घंटे डिले हुई फ्लाइट, कंज्यूमर फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी पर लगाया 30 हजार हर्जाना



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  • कस्टमर ने करवाई थी ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी
  • ये रकम एयरलाइन को नहीं बल्कि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भरनी पड़ेगी

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 11:38 AM IST

चंडीगढ़. शहर के एक निवासी को समय पर विमान सेवा की ओर से नई दिल्ली न पहुंचाए जाने के कारण इंश्योरेंस कंपनी को कंज्यूमर फोरम की ओर से जुर्माना देने का फैसला सुनाया गया है। इस फैसले का कारण यह है कि  सेक्टर-37 के डॉ. वरिंदर सिंह और उनकी पत्नी मोनिका सिंह कंवर ने नई दिल्ली से हैंगजू (चीन) की रिटर्न फ्लाइट बुक की थी। ये फ्लाइट जिस दिन नई दिल्ली वापस आनी थी, उस दिन 24 घंटे से ज्यादा लेट थी।

 

फैसला सुनाया

कंज्यूमर फोरम ने इस फ्लाइट की देरी के चलते 500 यूएस डॉलर अदा करने के साथ-साथ 30 हजार रुपए हर्जाना भरने का फैसला सुनाया है।
ये रकम एयरलाइन को नहीं बल्कि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भरनी पड़ेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉ. वरिंदर और उनकी पत्नी ने ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी थी। इस पॉलिसी के तहत फ्लाइट डिले होने पर कंपनी को क्लेम देना पड़ना था।

 

फाेरम में की शिकायत

जब कंपनी ने क्लेम नहीं दिया तो पति-पत्नी ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत दी थी। उनकी शिकायत पर फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। डॉ. वरिंदर ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 22 जुलाई 2018 को नई दिल्ली से हैंगजू फ्लाइट बुक करवाई थी। ये फ्लाइट वापसी की भी थी। इस फ्लाइट के लिए उन्होंने ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी भी ली थी, जिसके लिए उन्होंने 671 रुपए प्रीमियम दिया था। इस पॉलिसी के तहत अगर फ्लाइट 6 घंटे से ज्यादा डिले होती है तो पैसेंजर को 500 यूएस डॉलर मिलने थे।

 

परेशानी हुई

शिकायत के मुताबिक 26 जुलाई 2018 को जब डॉ. वरिंदर को चीन से नई दिल्ली वापस आना था तो उनकी फ्लाइट 24 घंटे से ज्यादा लेट हो गई। जिस कारण वे अगले दिन जाकर कहीं नई दिल्ली पहंचे। डॉ.वरिंदर ने बताया कि फ्लाइट लेट होने के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई और उनका फाइनेंशियल लॉस भी हुआ। चंडीगढ़ पहुंचने पर उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कंज्यूमर फोरम में शिकायत दी।

 

डॉक्यूमेंट सब्मिट नहीं किए...
इंश्योरेंस कंपनी ने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने कस्टमर के क्लेम को प्रोसेस कर दिया था लेकिन उन्हें जो डॉक्यूमेंट सब्मिट करने को कहा था वो उन्होंने सब्मिट नहीं किए। इसलिए उनका क्लेम पास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि पॉलिसी के मुताबिक कस्टमर को सभी बिल कंपनी के पास जमा करवाने थे जोकि उन्होंने नहीं दिए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कंज्यूमर फोरम ने डॉ. वरिंदर की शिकायत को सही ठहराते हुए इंश्योरेंस कंपनी को 500 यूएस डॉलर इंडियन करंसी में अदा करने को कहा है। इंश्योरेंस कंपनी को 30 हजार रुपए हर्जाना और 15 हजार रुपए मुकदमा खर्च अदा करने के लिए कहा है।

 

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