जीएसटी / फर्मों ने फर्जीवाड़ा कर सरकार को लगाई 400 करोड़ की चपत, 174 केसों मेंं विभागीय मिलीभगत



GST: Rs 400 crore loss to government
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GST: Rs 400 crore loss to government

  • एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के बिलों को रोका गया, जो फर्जी फर्म के खातों में जाने वाला था
  • एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट ने पेश की रिपोर्ट, तो मामला आया सामने

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 06:44 AM IST

राजधानी हरियाणा (मनोज कुमार). प्रदेश में फर्जी फर्म बनाकर हजारों करोड़ रुपए के फर्जी बिल बनाकर सरकार को 400 करोड़ रुपए की चपत लगा दी गई। मामला जब पकड़ में आने लगा तो एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट के अफसर भी हैरत में पड़ गए।


एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के बिलों को रोका गया, जो फर्जी फर्म के खातों में जाने वाला था। फर्जीवाड़े में 15 स्टेट के 322 डीलर जुड़े हुए हैं। अकेले पानीपत में ही 2062 करोड़ रुपए के फर्जी बिल पकड़े गए। इनसे फर्मों ने 165.94 करोड़ रुपए का फायदा ले लिया था। खास बात यह है कि जीएसटी फर्जीवाड़े के 174 केस में विभाग के लोग शामिल पाए गए हैं। लोकायुक्त से इनके खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की गई है। कुछ के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। जबकि 909 करोड़ रुपए की डिमांड के 175 केस ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनकी असिस्मेंट के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है।

 

पानीपत में लगातार फर्जी फर्म के मामले सामने आने के बाद विधानसभा की पब्लिक एकाउंट कमेटी ने जब डिपार्टमेंट के अफसरों को तलब किया, तो उन्होंने यह खुलासा किया और कार्रवाई का ब्योरा दिया,  लेकिन पीएसी पानीपत के मामले में की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुई। इसलिए अधिकारियों को एक महीने में इसकी पूरी जांच कर डिटेल रिपोर्ट देने को कहा है।

 

हालांकि डिपार्टमेंट के अफसरों ने पीएसी के सामने बताया कि 2017-18 में जीएसटी से जहां 12 हजार एक करोड़ 9 लाख रुपए का रेवन्यू कलेक्ट हुआ था, वहीं 2018-19 में यह बढ़कर 19 हजार 443 करोड़ 98 लाख रुपए हुआ, जो देश भर में पांचवें नंबर था। डिपार्टमेंट ने पीएसी के सामने यह भी दावा किया कि अभी तक फर्जीवाड़ा करने वालों से 67.15 करोड़ रुपए की रिकवरी की जा चुकी है। इसमें 49.40 करोड़ रुपए ब्लॉक किए गए हैं और 17.75 करोड़ रुपए रिकवर हुए हैं।

 

जानिए...कैसे होता है फर्जीवाड़ा और सरकार को लगती है चपत
{फर्जीवाड़ा इनपुट टैक्स क्रेडिट में हो रहा है। फर्जी फर्म बनाकर एक से दूसरी फर्म को सामग्री बेचना दिखाकर बिल फर्जी तैयार होते हैं। सरकार से बिल क्लेम किया जाता है।
{हर सामग्री का जीएसटी स्लैब एचएसएम कोड से पता लगता है। फर्म 18 प्रतिशत जीएसटी की सामग्री बेचकर बिल 5 प्रतिशत जीएसटी वाली सामग्री का बना देते हैं। ऐसे में सरकार को पूरा पैसा नहीं मिल पाता।
{दूसरे प्रदेश में फर्जी फर्म बनाकर उसमें सेल दिखा देती है, जबकि सेल कुछ नहीं होता। इसमें सरकार से फर्म जीएसटी भुगतान का पैसा उठाती है, लेकिन जो सामान उसके पास है, वह उसे कच्चे बिल पर दूसरी फर्म को बेच देती है। इसमें दोनों को फायदा हो जाता है।

 

अब तक विभाग ने क्या की कार्रवाई
2014 से 2019 के बीच 92 एफआईआर दर्ज कराई गई है। इनमें 69 पर अभी प्रोग्रेस चल रही है। 23 में कोर्ट में चालान पेश हो चुका है या मामला अभी कोर्ट में पेंडिंग है। इसके अलावा डिपार्टमेंट के 10 से ज्यादा अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। कइयों को सस्पेंड किया जा चुका है।

 

पानीपत के मामले
{पहले 21 फर्म फर्जी मिलीं। 476.69 करोड़ के फर्जी बिल बनाकर 49.30 करोड़ रुपए का क्लेम किया गया। विभाग ने 12.45 करोड़ रिकवर किया है। एफआईआर दर्ज है।
{इस साल में 20 फर्जी फर्म पकड़ीं। इनमें 18 पानीपत और 2 यूपी के नाम से थी। इन्होंने 1244.92 करोड़ रुपए के फर्जी बिल बनाए और 80.12 करोड़ रुपए का फायदा लिया। 2.05 करोड़ रुपए रिकवर किए जा चुके हैं।

 

वेरिफिकेशन नहीं हुई
{तीन दिन में रजिस्ट्रेशन जरूरी, फिजिकली वेरीफिकेशन नहीं हुई।
{ समय और स्टाफ की कमी से यह नहीं हो पाया और फर्जी फर्म बनती चली गई।

 

विभाग का दावा

2017-18 में रजिस्ट्रेशन ज्यादा हुआ। हालांकि बाद में 2018 में ही 30 सितंबर तक फिजिकली वेरीफिकेशन की गई।

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