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  • Gurudwara Sahib, Closed For 53 Years, Cows And Buffaloes, Started To Shift, 550 Birth Year Of Guru Nanak

53 साल बंद रहा गुरुद्वारा साहिब, गाय-भैंसें पाली जाने लगीं थीं

एक वर्ष पहले
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करतारपुर साहिब।
  • यहीं से निकला था ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ का मूल मंत्र

पाकिस्तान के जिला नारोवाल की तहसील शकरगढ़ में स्थित करतारपुर का गुरुद्वारा दरबार साहिब वह स्थान है यहां पर गुरु नानक देव जी ने जीवन के अंतिम 18 वर्ष गुजारते हुए नाम जपो, किरत करो और वंड छको का न सिर्फ संदेश दिया था। बल्कि भाई लहणा जो सिख धर्म के दूसरे गुरु अंगद देव जी के रूप में जाने जाते हैं की गुरत्ता गद्दी खुद अपने हाथों से दी थी। इतिहासकारों अनुसार करतारपुर आने से पहले गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के 14 वर्ष 9 महीने और 13 दिन सुलतानपुर लोधी में गुजारे थे। इसी दौरान उन्होंने 1507 में शुरू अपने जीवन की 4 उदासियां मुकम्मल कीं, जिसके बाद वह परिवार सहित दरिया रावी किनारे स्थित करतारपुर साहिब आ बसे थे। उनके माता पिता का भी इसी जगह देहांत हुआ था। जहां आज गुरुद्वारा साहिब है।  

इन्होंने किया था गुरुद्वारा साहिब का जीर्णोधार

  • 1911-12 में एक श्रद्धालु लाला शाम लाल ने गुरुद्वारा साहिब का जीर्णोधार किया।
  • रावी के किनारे होने से 1920 में गुरुद्वारे की इमारत क्षतिग्रस्त हो गई तो पटियाला रियासत के महाराजा भूिपंदर सिंह ने 1 लाख 35 हजार 600 रुपए की लागत से मरम्मत करवाई।
  • देश के बंटवारे के बाद 53 साल तक यानी 2000 तक गुरुद्वारा बंद रहा। इसे एक कैटल शैड के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। जमीन को खेती के लिए दे दिया गया था।

1998 में पहली बार वाजपेयी और शरीफ ने उठाया मसला

  • 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसकी रिपेयर करवाई।
  • 1998 में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पाक पीएम नवाज शरीफ के बीच पहली बार करतारपुर कॉरिडोर को लेकर चर्चा हुई।
  • 1999 में लाहौर बस डिप्लोमेसी दौरान पाकिस्तान ने गुरुद्वारा दरबार साहिब का जीर्णोद्वार किया और भारतीय सीमा से इसके दृश्य अवलोकन को यकीनी बनाया। लेकिन कारगिल युद्ध के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
  • 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंजाब के दौरे दौरान अपने भाषण में भी करतार कॉरिडोर का जिक्र किया था। इसी वर्ष दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया के दौरान अमृतसर लाहौर करतारपुर सड़क मार्ग के जरिए इसके दर्शन करने पर विचार हुआ था।
  • 2008 में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष एसएम कुरैशी के साथ वीजा फ्री यात्रा को लेकर चर्चा की थी। लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।
  • 20 जून 2008 को डेरा बाबा नानक में कुलदीप सिंह वडाला के साथ आए अमेरिका के पूर्व अंबेसडर व इंटस्टीच्यूट आफ मल्टी ट्रैक डिप्लोमेसी के फाउंडर जॉन डब्ल्यू ने दोनों तरफ को आपस में जोड़ने के लिए ‘ए पीस काॅरिडोर, ए पीस जोन’ की बात कही थी।
  • 28 जून 2008 को प्रणब मुखर्जी ने पीस कॉरिडोर के अध्ययन की बात कही। लेकिन उसी वर्ष मंुबई हमले के कारण यह मामला ठंडे बस्ते चला गया।
  • 02 जुलाई 2017 को शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की सात सदस्यीय समिति ने इस कॉरिडोर के प्रस्ताव को तत्कालीन राजनीतिक माहौल के अनुकूल न बता कर रद कर दिया था।
  • 2018 में इमरान खान ने पाकिस्तान प्रधानमंत्री की शपथ ली तो विदेश मंत्री फवाद चौधरी ने 550 वें प्रकाशपर्व पर कॉरिडोर को खोलने का प्रस्ताव रखा था।

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