कोर्ट / मानेसर लैंड स्कैम मामले में सीबीआई कोर्ट में 5 घंटे चली कार्यवाही, अब 26 सितंबर को होगी अगली सुनवाई



पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेश होने के लिए जाते हुए पूर्व सीएम हुड्डा। पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेश होने के लिए जाते हुए पूर्व सीएम हुड्डा।
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पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेश होने के लिए जाते हुए पूर्व सीएम हुड्डा।पंचकूला सीबीआई कोर्ट में पेश होने के लिए जाते हुए पूर्व सीएम हुड्डा।

  • पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में चल रहा है केस

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 04:41 PM IST

पंचकूला। मानेसर लैंड स्कैम और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड केस मामले की बुधवार को पंचकूला की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत लगभग सभी आरोपी कोर्ट पहुंचे। करीब 5 घंटे तक आरोपों पर बहस हुई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। 

हुड्डा ने खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की थी

  1. इससे पहले हुड्डा ने एजेएल मामले में खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की थी। पंचकूला कोर्ट ने इस बारे में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हुड्डा व अन्य आरोपियों ने कहा था कि इस मामले में उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। 

  2. ये था मानेसर लैंड स्कैम मामला

    27 अगस्त 2004 में इनेलो सरकार ने गुड़गांव के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर की 912 एकड़ जमीन आईएमटी बनाने के लिए सेक्शन-4 का नोटिस जारी किया। इसके बाद कांग्रेस सत्ता में आई। तत्कालीन सीएम हुड्डा ने आईएमटी रद्द कर 25 अगस्त 2005 में सार्वजनिक कामों के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए सेक्शन-6 का नोटिस जारी कराया। मुआवजा 25 लाख रु. एकड़ तय हुआ। अवॉर्ड के लिए सेक्शन-9 का नोटिस भी जारी हुआ, पर इससे पहले बिल्डर्स ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखा 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। 2007 में बिल्डर्स की 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कर दी गई। इससे किसानों को करीब 1500 करोड़ का नुकसान हुआ।

  3. ये था एजेएल मामला

    एजेएल कांग्रेस नेताओं व गांधी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी है। इसे जिस समय प्लॉट रि-अलॉट किया गया, उस समय हुड्डा सीएम के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के चेयरमैन भी थे। वोरा एजेएल के चेयरमैन रहे हैं। 24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था। कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया। 28 अगस्त 2005 को तत्कालीन सीएम हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए थे। इसी दौरान पंचकूला में एसोसिएट जर्नल लिमिटेड को जमीन आबंटित की थी। आरोप है कि एजेएल को यह जमीन आवंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के रेवेन्यू का नुकसान हुआ। ये प्लॉट 496 स्केवयर मीटर से लेकर 1280 स्केवयर मीटर तक के थे, जिसके लिए हुड्डा के पास 582 आवेदन आए थे। अलॉटमेंट के लिए 14 का चयन किया गया था। 

  4. खट्टर सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

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