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नगर निगम हाउस ने 1470 करोड़ 59 लाख रुपए के बजट को मंजूरी दी, कांग्रेस ने बताया- घाटे का सौदा

5 महीने पहले
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चंडीगढ़ नगर निगम हाउस में 2020-21 के लिए बजट पास किया गया।
  • वर्ष 2020-21 के लिए ग्रांट इन एड से मिले 425 करोड़, प्रस्तावित बजट में 1073 करोड़ की मांग
  • कांग्रेस पार्षदों ने बजट को मूंगेरी लाल का हसीन सपना बताया, हाउस से वाॅकआउट किया
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चंडीगढ़. नगर निगम हाउस ने बगैर किसी टैक्स के 2020-21 के लिए 1470 करोड़ 59 लाख के बजट को मंजूरी दी। नगर निगम कैपिटल हेड में 443 करोड़ 71 लाख और रेवन्यू हेड में 1026 करोड़ 88 लाख खर्च करेगा। एमसी को प्रशासन से ग्रांट इन एड 425 करोड़ मिलनी है, जबकि अपने संसाधनों से एमसी ने 402 करोड़ 7 लाख जुटाने हैं। इस हिसाब से एमसी का बजट 827 करोड़ 7 लाख बनता है। यानि कि 643 करोड़ 52 लाख घाटे का बजट पास किया गया।


कांग्रेसी दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि इतना बजट तो 500 करोड़ कर्मचारियों की सैलरी पर खर्च हो जाएगा। इसके बाद डेवेलपमेंट कैसे होगी। रोड टूटी पड़ी हैं और वो रिकार्पेट नहीं होंगी। पवन बंसल जब सांसद होते थे तो दिल्ली से स्पेशल बजट के 400 करोड़ लेकर आते रहे। अब हर साल एमसी में फाइनेंशियल क्राइसेस छाया रहता है। 24 घंटे पानी देने का वायदा करके वाटर टैरिफ बढ़ा दिए हैं। जबकि 24 घंटे पानी लाने में कई साल लग जाएंगे। टर्शरी की लाइनें बिछी हैं तो बजट में 10 करोड़ इसके लिए क्यों रखे गए। बबला ने बजट को मूंगेरी लाल के हसीन सपनों का बजट कहते हुए अपने सहयोगी काउंसलर के साथ हाउस से वाकआउट ककर दिया।


एमसी को प्रशासन से वर्ष 2020-21 के बजट में ग्रांट इन एड की राशि 425 करोड़ मिली है। एमसी अपने संसाधन से 402 करोड़ 7 लाख जुटाएगा। निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि बजट में प्रशासन से फोर्थ दिल्ली फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट अनुसार ग्रांट इन एड के 1073 करोड़ मांगे गए हैं। इस हेड में 648 करोड़ कम पैसा आया है। ग्रांट इन एड नहीं यह प्रशासन के कंसोलिडेटेड फंड से ग्रांट एमसी को दी जाती है। प्रशासन के एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट, रजिस्टरी, रोड टैक्स और बिजली से ही 13 फीसदी हिस्सा मिलता है। इसमें प्रशासन के सभी विभागों का बजट शामिल नहीं है।


कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि इस घाटे के बजट में इस साल भी शहर के विकास कार्य प्रभावित होंगे। 500 करोड़ कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, बिजली, पानी, टेलीफोन के बिलों और जरूरी रिपेयर पर साल में खर्च होगा। ऐसे में शहर में काम करवाने के लिए 327 करोड़ 7 लाख ही बचेगा। इससे कितने डेवेलपमेंट वर्क होंगे। अभी भी शहर की रोड टूटी पड़ी हैं। जिन सेक्टरों की कांग्रेस के शासन काल में कभी रोड नहीं टूटती थी उनकी हालत खराब है। स्ट्रीट लाइट के बुरे हाल हैं।

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