हाईकोर्ट का कड़ा संज्ञान / हाईकोर्ट ने कहा- कलाइंट को हाईकोर्ट में आने से रोकना अवैध व असंवैधानिक, मूकदर्शक नहीं बन सकते



It is illegal to stop the client from coming to the High Court, said high court
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It is illegal to stop the client from coming to the High Court, said high court

  • ट्रिब्यूनल के विरोध में चंडीगढ़ में वकीलों के बहिष्कार का मामला
  • हाईकोर्ट के फुल बेंच ने एडवाइजर, होम सेक्रेटरी और डीजीपी को तलब कर मांगा जवाब

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 06:58 AM IST

चंडीगढ़ (ललित कुमार).  हाईकोर्ट के वकीलों के काम के बहिष्कार करने के चलते मुवक्किलों को हाईकोर्ट में दाखिल होने से रोकना असंवैधानिक व अवैध है। मंगलवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फुल बेंच ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि उनके पास तीन शिकायतें पहुंची हैं, जहां वकीलों के काम न करने के चलते मुवक्किल खुद अपने केस की पैरवी करना चाहते थे। बावजूद इसके वकीलों ने इन लोगों को हाईकोर्ट में दाखिल नहीं होने दिया। 
चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस राकेश कुमार जैन के फुल बेंच ने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट में दाखिल होने के सभी गेट वकीलों ने बंद कर रखे हैं और गेट नंबर एक पर मुवक्किलों को अपने केस की इमरजेंसी वकीलों को बतानी पड़ रही है। इसके बाद तय किया जा रहा है कि मुवक्किल को हाईकोर्ट में दाखिल होने दिया जाए या नहीं। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध है। किसी भी मुवक्किल को कोर्ट आने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकता। चंडीगढ़ प्रशासन के एडवाइजर केंद्र व हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही चंडीगढ़ के एडवाइजर, होम सेक्रेटरी और डीजीपी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। 

 

वकीलों के पेश न होने पर केस खारिज होने शुरू
ट्रिब्यूनल गठन के विरोध में 26 जुलाई को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने काम न करने का फैसला लिया था। इसके बाद से वकील हाईकोर्ट में काम नहीं कर रहे हैं। मंगलवार को हाईकोर्ट के जजों ने अब वकीलों के कोर्ट में पेश न होने पर केस खारिज करने शुरू कर दिए हैं। फैसलों में लिखवाया जा रहा है कि वकील के पेश न होने के चलते केस को खारिज किया जा रहा है। अब वकील और जज आमने सामने नजर आ रहे हैं। 

 

बैठक में काम न करने का फैसला बरकरार

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट डीपीएस रंधावा ने कहा कि वकील चाहते हैं कि ट्रिब्यूनल गठन संबंधी अधिसूचना वापस ली जाए। फिलहाल काम का बहिष्कार जारी रहेगा। मंगलवार को मीटिंग हंगामेदार रही। कुछ वकीलों का कहना था कि बार एसोसिएशन केस दायर कर ट्रिब्यूनल गठन पर रोक की मांग करे। कुछ वकील हड़ताल जारी रखने के विरोध में भी नजर आए।

 

हरियाणा सरकार ने कमेटी बनाई
हरियाणा सरकार के एडमिनिस्ट्रेटिव रिफोर्म विभाग के अंडर सेक्रेटरी की तरफ से बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के चेयरमैन और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट और सेक्रेटरी को पत्र लिख जानकारी दी कि ट्रिब्यूनल गठन को लेकर चीफ सेक्रेटरी के नेतृत्व में कमेटी गठन के आदेश दे दिए हैं। इसमें बार काउंसिल के चेयरमैन, बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट व सेक्रेटरी, हरियाणा के एडवोकेट जनरल की तरफ से नामित एक अधिकारी और कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये सभी ट्रिब्यूनल की वैधता और कामकाज पर विचार करेंगे। 

 

वकील 26 जुलाई से काम नहीं कर रहे
ट्रिब्यूनल गठन के विरोध में 26 जुलाई को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने काम न करने का फैसला लिया था। इसके बाद से वकील हाईकोर्ट में काम नहीं कर रहे हैं। वकील चाहते हैं कि ट्रिब्यूनल गठन संबंधी अधिसूचना वापस ली जाए।

 

ट्रिब्यूनल को केस ट्रांसफर करने भी बंद किए गए

2 अगस्त को हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की थी। तब हरियाणा ने ट्रिब्यूनल के गठन के फैसले को फिलहाल टाल देने की बात कही थी। हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ही नए और पुराने सर्विस मामलों पर सुनवाई किए जाने की बात कही थी। 
 

मुवक्किल, कर्मचारी और छात्र भी हो रहे परेशान 
हाईकोर्ट में प्रवेश को लेकर वकीलों के विरोध के चलते सबसे पहले मुवक्किल परेशान हुए। दाखिले को लेकर 13 स्टूडेंट्स ने वकीलों से कहा कि उन्हें जाने दें नहीं तो उनका पूरा साल खराब हो जाएगा। इन स्टूडेंट्स को कोर्ट रूम तक जाने दिया गया। आगे कोर्ट ने भी इन स्टूडेंट्स को अंतरिम राहत दी और फिलहाल दाखिला देने के निर्देश देते हुए याचिका के अंतिम फैसले पर इसे निर्भर रहने की बात कही। 

 

रोजाना 5 से 6 हजार लोग आते हैं हाईकोर्ट
हाईकोर्ट में दाखिल होने के लिए औसतन 5 से 6 हजार लोग रोजाना आते हैं। ये लोग पंजाब और हरियाणा के अलग अलग इलाकों से आने वाले लोग हैं। 
वहीं, हाईकोर्ट जज के सेक्रेटरी राजकुमार को वकील विकास मलिक ने रोका तो इस पर बात इतनी बिगड़ी कि मलिक को सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता के साथ कर्मचारियों से मिलकर घटना पर खेद जताना पड़ा।

 

हाईकोर्ट में 4.67 लाख केस लंबित
अकेले जुलाई माह को देखें तो हाईकोर्ट में लगभग 12,680 केस दायर किए गए। इनमें 2846 सिविल , 6363 क्रिमिनल और 3473 रिट पिटिशन शामिल हैं। बता दें हाईकोर्ट में मौजूदा समय में 4,67,756 केस लंबित हैं। इनमें सिविल में 2,02,117 और क्रिमिनल में 1,71,413 केस शामिल हैं। इनके अलावा 94,226 रिट पिटिशन लंबित हैं।

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