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अकाली-भाजपा, कांग्रेस इसी गांव से करती है चुनावी शंखनाद, लेकिन नहीं बदली गांव की तस्वीर

2 वर्ष पहले
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  • यहां के लोगों में रैली को लेकर उत्साह कम और दुख ज्यादा
  • लोगों ने कहा- गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा

मोगा (नवदीप सिंगला). सियासतदानों के लिए भागेवाल गांव का अपना भाग्य नहीं बदला कई राजनीतिक पार्टियां किल्ली चाहलां गांव से चुनावी रैलियाें की शुरुआत करके केंद्र और राज्य में सत्ता हासिल कर चुकी हैं। यहां तक कि अब ये पार्टियां इस गांव को सत्ता पाने की चाबी तक मानने लगी हैं।

 

सियासतदानों ने यहां रैली करके अपना भाग्य तो चमका लिया लेकिन गांव का भाग्य नहीं बदला। गांव अभी भी जैसा 50 साल पहले था वैसा ही है। यहां के लोगों में रैली को लेकर उत्साह कम और दुख ज्यादा है। उनका कहना है कि तीन बड़ी रैलियां अकाली दल-बीजेपी मिलकर कर चुकी हैं। लेकिन गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। 

 

प्राइमरी स्कूल के एक कमरे में डिस्पेंसरी में डॉक्टर नहीं बैठता, होती है परेशानी : गांव की इंद्रा काॅलोनी निवासी गुरनाम सिंह, जसंवत सिंह, दर्शन सिंह, निर्मल सिंह, बलजिंदर सिंह, हरजीत सिंह, सुरजीत कौर, गुरदीप कौर, वीरपाल कौर, कर्मजीत कौर, बिंदर कौर, सर्बजीत कौर ने कहा कि उनकी काॅलोनी के बच्चों को रोजाना गांव से अजीतवाल तक पैदल आना जाना पड़ता है। यहां कोई विकास नहीं हुआ। प्राइमरी स्कूल के एक कमरे में सरकारी सेहत डिस्पेंसरी में डॉक्टर एक घंटे के लिए ही आता है। 
 

 

सुखबीर ने गांव के विकास का वादा किया था नहीं निभाया :
 

  • पूर्व सरपंच गुरनाम सिंह ने कहा कि आबादी 2550 लोगों की है। 1200 वोटर हैं। पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। 
  • पूर्व सरपंच चरण कौर ने कहा 12 सालों से विकास नहीं हुआ है। 10 साल पहले सुखबीर आए थे तो विकास का वायदा किया लेकिन कुछ नहीं हुआ।

3 किमी जाना पड़ता है बस पकड़ने :

गांव की 60 साल की महिला हरजिंदर कौर ने बताया कि वह गांव में करियाना स्टोर चलाती हैं। रैली के चलते उन्हें कई दिनों से परेशानी हो रही है। उसकी शादी 40 साल पहले हुई थी। तब से आज तक गांव में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है। शादी करके ससुराल गांव आई थी। तब भी 3 किमी. अजीतवाल तक पैदल चलकर जाना पड़ता था और आज भी। 

 

 

गांव जाकर सुनूंगी समस्याएं : बीबी राजविंदर कौर
हलका निहाल सिंह वाला से कांग्रेस पार्टी की इंचार्ज बीबी राजविंदर कौर भागीके ने एक बार भी लोगों ने समस्यों की कोई जानकारी नहीं दी। अपने स्तर पर गांव में बस रुकवाने का प्रयास किया था लेकिन बस वालों का कहना था कि उनका समय मैच नहीं करता।

 

गांव में 2006 से शुरू हुईं रैलियां :

यहां से रैली की शुरुआत दिसंबर 2006 में अकाली-भाजपा ने की थी। इसके बाद 2007 में अकाली दल को सूबे की सत्ता हासिल हुई थी। 2011 में भी अकाली-बीजेपी ने यहां रैली की और 2012 में अकाली-भाजपा की सरकार फिर से सूबे में बनी। इसके बाद गांव भागेवाला नाम से मशहूर हो गया। हालांकि दिसंबर 2016 में अकाली दल-भाजपा ने रैली की लेकिन वह सत्ता में नहीं आ पाए। अब 7 मार्च 2019 को राहुल गांधी ने अपनी चुनावी रैली की शुरुआत यहां से की है। यहां हुई रैलियों में अब तक परकाश सिंह बादल,सुखबीर बादल, लालकृष्ण आडवानी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह आ चुके हैं। अब राहुल गांधी, सुनील जाखड़, नवजोत सिंह सिधू, मनप्रीत बादल, लोक निर्माण मंत्री विजयइंदर सिंगला, भारत भूषण आशू, गुरप्रीत कांगड़, सुखजिंदर सिंह रंधावा, बीबी राजिंदर कौर भट्ठल समेत कई कांग्रेसी नेता पहुंचे। अब राहुल गांधी और उनकी पार्टी का भविष्य बदलता है या नहीं यह तो चुनाव परिणाम से ही पता चलेगा।

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