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चंडीगढ़ / आर्मी पॉलिटिकल जरूरतों के लिए नहीं: ले. जनरल हुड्‌डा



ले. जनरल डीएस हुड्‌डा ले. जनरल डीएस हुड्‌डा
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ले. जनरल डीएस हुड्‌डाले. जनरल डीएस हुड्‌डा

  • सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन के इंजार्च ले. जनरल डीएस हुड्‌डा 
  • उड़ी अटैक के बाद पाकिस्तान में घुसकर 70 से 80 आतंकी मारे थे
     

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 06:20 AM IST

चंडीगढ़. उड़ी अटैक के बाद जब मैं और आर्मी चीफ उस कैंप को विजिट करने गए तो वहां सबकुछ जल चुका था। 19 सैनिक मारे जा चुके थे। हम तीन इंच मोटी राख की सतह पर चल रहे थे। यही वो समय था, जब हमारे मन में पाकिस्तान को इसका जवाब देने की बात आई।

 

पूरा देश इस घटना के बाद गुस्से में था। हमने जब इस स्ट्राइक के बारे में प्लानिंग की, मेरी बात आर्मी चीफ से हुई थी और बाद में मुझे बताया कि इस प्लान को पीएम मोदी ने ओके किया था। ये बता रहे थे नाॅर्दर्न कमांड के पूर्व कमांडर ले. जनरल डीएस हुड्‌डा।

 

चंडीगढ़ में शुक्रवार को शुरू हुए मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के पहले सेशन में सर्जिकल स्ट्राइक पर चर्चा के बाद एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- ये बात सही है कि इस ऑपरेशन की चर्चा बहुत ज्यादा हो गई। बेहतर होता कि ये सब चुपचाप ही किया जाता। 

 

2016 में उड़ी अटैक के बाद भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर इस रेड को अंजाम दिया था, जिसमें बकौल जनरल हुड्‌डा 70 से 80 आतंकी मारे गए थे। उसके कुछ समय बाद ही यूपी में चुनाव थे और उस दौरान इस स्ट्राइक को एक ट्रंप कार्ड की तरफ इस्तेमाल किया गया था।

 

सेशन में बातचीत के दौरान यह इशू भी उठा कि पॉलिटिकल पार्टी आर्मी ऑपरेशन को अगर इसी तरह अपने हक में इस्तेमाल करती रहीं तो ऐसा न हो कि यह एक रूटीन हो जाए?

इस पर जनरल हुड्डा का जवाब था- अगर ऐसी स्थिति आती है तो आर्मी की लीडरशिप को रेजिस्ट करना पड़ेगा। आर्मी ऑपरेशन पॉलिटिकल जरूरतों के लिए नहीं किए जा सकते।

 

ऐसा कहा जाता है कि आमतौर पर आर्मी ऐसी रेड्स करती रहती है। तो फिर क्या वजह थी कि स्ट्राइक के लिए पीएम की सहमति लेनी पड़ी?

जनरल हुड्‌डा ने कहा-  इस स्ट्राइक का स्तर बड़ा था। हम दूसरे देश की सीमा में सैनिक भेज रहे थे। इसकी जानकारी तो देनी जरूरी ही थी। इस सेशन में ले. जनरल एनएस बराड़, ले. जनरल जेएस चीमा और कर्नल अजय शुक्ला ने हिस्सा लिया।

 

फेस्टिवल शहीद जवानों को श्रद्धांजलि : 

शुक्रवार को राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने सेक्टर-1 के  लेक क्लब में मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन किया। इसे उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के अनाम शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। इस फेस्टिवल के जरिए भारतीय सैनिकों के बलिदान को लेकर युवा पीढ़ी जागरूक होगी। कहा, यह 1914-1918 की महान लड़ाई की शताब्दी भी है और यह समय 74,000 शहीद और 67,000 गंभीर  घायल हुए भारतीयों को याद करने का है। 

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