चंडीगढ़ / 15 मिनट में कैंसर की जांच, 100 रु आ रहा खर्च, हर रोज आ रहे सैंकड़ों मरीज



पीजीआई चंडीगढ़(फाइल फोटो) पीजीआई चंडीगढ़(फाइल फोटो)
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पीजीआई चंडीगढ़(फाइल फोटो)पीजीआई चंडीगढ़(फाइल फोटो)

  • फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी टेक्नीक से कैंसर पता लगाने वाला पीजीआई इस रीजन का पहला सरकारी संस्थान
  • इससे पहले कैंसर का पता लगाने के लिए शरीर के उस हिस्से का मांस का टुकड़ा निकाला जाता था

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 06:29 PM IST

चंडीगढ़. कैंसर की जांच में लगने वाला समय और उसमें होने वाला खर्च से अब मरीजों को निजात मिल सकेगी। पीजीआई के सायटोलॉजी डिपार्टमेंट में 'फाइन नीडल एस्पिरेशन सायटोलॉजी टेक्नीक' से अब यह संभव हुआ है। अभी तक कैंसर का पता लगाने के लिए शरीर के उस हिस्से का मांस का टुकड़ा निकालकर पहले उसकी बायोप्सी की जाती थी। रिपोर्ट दो से तीन में आती थी, जिसमें पता चलता था कि मरीज को कैंसर है या नहीं। लेकिन अब एक नीडल डालने से ही कैंसर का पता चल जाएगा।

 

'फाइन नीडल एस्पिरेशन सायटोलॉजी टेक्नीक' से लंग कैंसर के मरीजों पर अल्ट्रासाउंड से टारगेट सेट कर नीडल डालकर सेल निकाल लिए जाते हैं। इसमें मरीज को पेन भी नहीं होता। इस प्रक्रिया से जांच की रिपोर्ट भी 15 में आ जाती है। इसमें आने वाला खर्च भी 100 रुपए होता है।  पीजीआई  में हर रोज 50 से 60 मरीज टेस्ट के लिए आ रहे हैं।

 

रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो जाती है कि कैंसर है या नहीं। इस टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर, सर्विक कैंसर, माउथ कैंसर का पता लगाया जा सकता है। पीजीआई के भार्गव ऑडिटोरियम में चल रही साइटोकोन 2019 में डॉ. प्रणब डे ने यह बातें कही।

 

इसमें यूएस, इटली के डॉक्टर्स के अलावा देशभर से करीब 600 डॉक्टर हिस्सा ले रहे हैं। पीजीआई के डॉ. प्रणब डे के मुताबिक इस तकनीक की मदद से जेनेटिक स्टडी और डीएनए में कोई म्यूटेशन या गड़बड़ी होने का भी पता चल जाता है।

 

जेनेटिक स्टडी और डीएनए टेस्ट पारंपरिक तरीके से करने पर इसकी रिपोर्ट भी दो से तीन दिन में आती है। इसी तरह इटली से आए डॉ. पियो जेप्पा ने बताया कि फाइन नीडल एस्पिरेशन सायटोलॉजी से लिम्फोमा की भी जांच की जा सकती है। यह एक बेहतरीन तकनीक है, जिससे मरीजों को जल्द बीमारी का पता चलने से उनका इलाज शुरू हो जाता है।

 


ऐसे करते हैं जांच:

1.शरीर के उस अंग से जहां कैंसर की आशंका होती है, वहां से नीडल की मदद से सेल निकाले जाते हैं।

2. सेल स्लाइड पर ट्रांसफर किए जाते हैं। यह कई प्रकार के होते हैं।

3. इसके बाद हाई क्वालिटी माइक्रो स्कोप से यह पता लग जाता है कि मरीज को कैंसर है या नहीं।

4. कैंसर की पुष्टि होने के बाद मरीज का इलाज शुरू हो जाता है।


पहले ऐसे होता था टेस्ट:  शरीर के जिस अंग पर कैंसर की आशंका हाेती है, वहां से मांस का टुकड़ा निकालकर उसकी बायोप्सी की जाती थी। मरीज के लिए यह बहुत दर्द भरा होता था। रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगता था।


50 से 60 टेस्ट लोग रोज आ रहे हैं टेस्ट करवाने पीजीआई में:

  • सरकारी अस्पतालों में सिर्फ पीजीआई में ही होता है यह टेस्ट
  • पंजाब-हरियाणा में भी नहीं, दिल्ली एम्स में है यह सुविधा
  • इस टेक्नीक से यूरीन में ब्लड आने की वजह का भी पता चल जाता है।
  • 500 से 700 के बीच मरीज आते हैं पीजीआई की ओपीडी में

 

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