हेल्थ सिस्टम / न एंबुलेंस मिल रही और न ही अटेंडेंट, मरीज मर रहे



बीमार पत्नी को खुद गोद में उठाकर कार से स्ट्रेचर तक ले गए, किसी ने मदद नहीं की बीमार पत्नी को खुद गोद में उठाकर कार से स्ट्रेचर तक ले गए, किसी ने मदद नहीं की
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बीमार पत्नी को खुद गोद में उठाकर कार से स्ट्रेचर तक ले गए, किसी ने मदद नहीं कीबीमार पत्नी को खुद गोद में उठाकर कार से स्ट्रेचर तक ले गए, किसी ने मदद नहीं की

  • नेशनल हेल्थ मिशन के 300 में से 130 कर्मचारियों की स्ट्राइक और हेल्थ डिपार्टमेंट के मिस मैनेजमेंट से स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही

Dainik Bhaskar

Feb 20, 2019, 02:14 PM IST

पंचकूला. नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की स्ट्राइक और हेल्थ डिपार्टमेंट के मिस मैनेजमेंट की वजह से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इमरजेंसी में सड़क हादसे में घायलों, प्रेग्नेंट महिलाओं और बुजुर्गों को एंबुलेंस नहीं मिल रही। अस्पताल में अटेंडेंट नहीं। कई सीरियस केसों में मरीजों की जान भी जा रही है। एंबुलेंस मिल भी जाए तो उसमें इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन नहीं होता।


पंचकूला हेल्थ डिपार्टमेंट को मरीजों की परवाह हो या न हो, लेकिन वीवीआईपी और मंत्रियों की जरूर है। 5 दिन पहले एचआर 68ए8695 नंबर एंबुलेंस में दिक्कत आ गई थी। मरीजों की परेशानी देखते हुए उसे ठीक करवाने नहीं भेजा गया। आज हरियाणा के मंत्रियों का विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। इसलिए बीते कल छुट्‌टी के दिन इस एंबुलेंस को ठीक करवाने के लिए भेज दिया गया। लोक सर्वहितकारी सोसायटी के चेयरमैन राकेश अग्रवाल ने पंचकूला हेल्थ डिपार्टमेंट की लापरवाही को लेकर हेल्थ मिनिस्टर अनिल विज को शिकायत दी है।

 

पंचकूला के जनरल अस्पताल के सरकारी सिस्टम से मरीजों को परेशानी

  1. 64 साल की पत्नी को पैरालाइज, इलाज करवाने में परेशान हुए 66 साल के अशोक कपालिया अमेरिका में बैठे बेटे को बोले...ऐसे धक्के खाकर इलाज नहीं करवाया जाता-अशोक कपालिया ने कहा-मेरी पत्नी को पैरालाइज है और जनरल अस्पताल से इलाज चल रहा है। मंगलवार को जब अस्प्ताल लेकर आए तो इमरजेंसी के गेट पर कोई सिक्योरिटी गार्ड या फोर्थ क्लास कर्मचारी मदद के लिए नहीं आया। खुद ही स्ट्रेचर लेकर आए। इसके बाद पत्नी को अपनी गाड़ी से उतारा और स्ट्रेचर पर लेटाया। सीनियर सिटीजन होने के नाते किसी ने मेरी मदद नहीं की। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर पत्नी को खुद लेकर गया। टूटी हुई व्हील चेयर को भी संभालने वाला कोई नहीं मिला। मैं बहुत परेशान हुआ। मेरा बेटा अमेरिका में रहता है। घर जाकर बेटे को फोन करूंगा कि बेटा यहां के सिस्टम को देखकर इस उम्र में तेरी मां का इलाज नहीं करवा सकता। अपनी मां को अपने पास ही ले जा, वहींं इलाज करवा ले। यहां का सिस्टम बहुत खराब हो चुका है। यहां सिर्फ दावे ही किए जाते हैं। कोई सुविधा नहीं।
     

  2. पंचकूला हेल्थ डिपार्टमेंट के पास कुल 12 एंबुलेंस है। इन्हें चलाने के लिए तीन शिफ्टों के हिसाब से 36 से ज्यादा ड्राइवरों की जरूरत होती है। स्ट्राइक के कारण हेल्थ डिपार्टमेंट सिर्फ 22 ड्राइवरों से ही काम चला रहा है और उनसे भी 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है।  

  3. अस्पताल में 6 एंबुलेंस हैं। इसमें एक मोरनी, एक हंगोला और एक कोट स्टेशन से भी एंबुलेंस यहां लाई गई है। एक एंबुलेंस का एक्सीडेंट हुआ पड़ा है, जिसे चलाया जा रहा है। एक खराब एंबुलेंस को ठीक होनेे के लिए भेजा गया है। हंगोला पीएचसी में अब एक भी एंबुलेंस नहीं है। नानकपुर पीएचसी की एक एंबुलेंस जनरल अस्पताल बुला ली। रायपुररानी सीएचसी और बरवाला पीएचसी में भी एक-एक एंबुलेंस है। कोट पीएचसी में एक एंबुलेंस थी, जिसे जनरल अस्पताल भेज दिया। कालका सीएचसी में एक और पिंजौर पीएचसी में भी एक एंबुलेंस। मोरनी में दो एंबुलेंस थी, जिनमें से एक पंचकूला बुला ली और अब एक ही एंबुलेंस मोरनी में है।
     

  4. जिले में ये कर्मचारी स्ट्राइक पर

    • 300 एनएचएम इम्प्लॉइज हैं
    • 130 से ज्यादा स्ट्राइक पर है
    • 40 अारटीएस के ड्राइवर
    • 30 इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन
    • 50 स्टाफ नर्सें, 8 इंफॉर्मेंशन असिस्टेंट
    • 01 आरबीएसके के डॉक्टर
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    • कालका सीएचसी में डिलीवरी के 4 घंटे बाद महिला सोनू की हालत बिगड़ने पर पीजीआई रेफर किया था। घरवालों ने शिकायत दी है कि डेढ़ घंटे एंबुलेंस नहीं आई, जिससे समय पर इलाज नहीं हो सका। पीजीआई में सोनू की मौत हो गई। सोनू का बच्चा ठीक है।
    • सकेतड़ी में रहने वाला 25 साल का रामानंद कार की टक्कर से घायल हो गया था। एंबुलेंस न मिलने पर लोगों ने उसे उबर से अस्पताल पहुंचाया था। रामनंद ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। 
    • रहना गांव के सबीर हुसैन ने बताया कि ममता नाम की गर्भवती महिला काे एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण प्राइवेट गाड़ी में जनरल अस्पताल लाना पड़ा। ममता का बीपी काफी हाई हो गया था तो रायपुररानी सीएचसी से उसे जनरल अस्पताल भेजा गया। यहां एंबुलेंस थी नहीं और कह दिया गया कि कर्मचारी स्ट्राइक पर है

  5. सीएमओ डॉ. योगेश शर्मा से बात की गई तो उनका जवाब था कि हमारे पास 11 एंबुलेंस हैं। सभी चल रही हैं। किसी मरीज को कोई परेशानी नहीं आ रही। ड्राइवरों की कमी के बारेे में पूछने पर जवाब दिया कि हमारा काम तो ठीक चल रहा है। इसके बाद जब खराब एंबुलेंस के बारेे में पूछा गया तो बोले कि जब वर्कशॉप में जगह होगी तभी भेजेंगे एंबुलेंस ठीक कराने।

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