सबक / ओला ने की 14 रु. की ओवरचार्जिंग, बतौर सजा कंपनी को पीजीआई में डोनेट करने पड़े 1 लाख रुपए



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  • कंपनी को 1 लाख रुपए के अलावा 12 हजार रुपए कस्टमर को भी देने पड़े
  • फोरम ने 31 जनवरी को सुनाया था फैसला, आदेश न मानने पर कस्टमर ने दोबारा की थी शिकायत

Jun 16, 2019, 06:59 PM IST

चंडीगढ़. टैक्सी सर्विस कंपनी ओला को महज 14 रुपए की ओवरचार्जिंग काफी महंगी साबित हुई है। कंपनी को अब 1 लाख रुपए पीजीआई के पुअर पेशेंट फंड में डोनेट करने पड़े हैं। शुक्रवार को कंज्यूमर फोरम में इस केस की सुनवाई थी और ओला के वकील ने फोरम में डोनेशन की रसीद सब्मिट की। कंपनी को 1 लाख रुपए के अलावा 12 हजार रुपए कस्टमर को भी देने पड़े हैं।

 

सेक्टर-29 के रवि कुमार की शिकायत पर फोरम ने इस साल 31 जनवरी को ये फैसला सुनाया था। चार महीने बीतने पर भी कंपनी ने फोरम के आदेश नहीं माने। इस पर रवि ने कंज्यूमर फोरम में एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन फाइल की। एप्लीकेशन की पहली सुनवाई पर ही फोरम ने कंपनी के रीप्रेजेंटेटिव के बेलेबल वॉरेंट जारी कर दिए। अगली तारीख पर भी अगर कंपनी की तरफ से कोई पेश नहीं होता तो फिर नॉन-बेलेबल वॉरेंट जारी हो जाते। लेकिन कंपनी की तरफ से वकील पेश हो गया और कंपनी ने फोरम का आदेश मानते हुए पीजीआई को एक लाख रुपए डोनेट कर दिए और कस्टमर को उसका मुआवजा भी दे दिया। 

 

ये था मामला: रवि ने 2 अगस्त 2018 को सेक्टर-29 से एलांते मॉल के लिए कैब बुक करवाई। कंपनी की एप पर राइड के लिए एस्टीमेटेड कॉस्ट 22 रुपए बताई (50 परसेंट डिस्काउंट के साथ)। जब वे एलांते पहुंचे तो उन्हें बिल 36 रुपए बताया गया। बिल की डिटेल चेक की तो पता चला कि दो किलोमीटर के लिए कंपनी ने टोटल बिल 71.55 रुपए बनाया। एक किमी. के करीब 35 रुपए और 71.55 पर कंपनी ने 50 परसेंट का डिस्काउंट देकर बिल 36 रुपए बना दिया। गाइडलाइंस के मुताबिक कोई भी टैक्सी कंपनी 23 रुपए प्रति किलोमीटर से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकती। लेकिन कंपनी ने 35 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से चार्ज किए। कंपनी ने डिस्काउंट के नाम पर पहले ही उनका बिल प्रशासन द्वारा तय किए रेट से कहीं ज्यादा बना दिया।

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