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हिमाचल / पंचायत चुनाव 10 साल बाद कराने की तैयारी, बदलेगा एक्ट



Panchayat representatives will get extension in Himachal
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Panchayat representatives will get extension in Himachal

Dainik Bhaskar

Sep 26, 2018, 08:19 PM IST

शिमला. हिमाचल में पंचायतों के चुनाव दस साल के लिए करवाने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। पंचायती राज एक्ट में विभाग ने संशोधन लाने का फैसला किया है। इसमें संशोधन के बाद राज्य की 3226 पंचायतों में चुनाव 10 साल के बाद होंगे। 


पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दोगुना हो जाएगा। इसमें तर्क दिया जा रहा है कि पांच साल के बाद रोस्टर लागू हो जाता है। जहां प्रधान या कोई अन्य प्रतिनिधि लंबी योजना से काम कर रहे होते हैं, वह रोस्टर की मार से चुनावी दौड़ से ही बाहर हो जाते हैं।

 

इसका असर पंचायतों के विकास पर भी पड़ता है। इसलिए जयराम सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। राज्य में पंचायत आैर स्थानीय निकायों के चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण है। एक बार महिला के लिए आरक्षित हुई सीट दस साल के बाद ही आेपन कैटेगरी के लिए खाली मिलती है।

 

महिला प्रतिनिधि को भी दोबारा चुनाव लड़ना हो तो रोस्टर के मुताबिक लंबा इंतजार करना पड़ता है। हालांकि महिलाओं को आेपन सीट पर भी चुनाव लड़ने की खुली छूट है। अमूमन महिलाओं को महज उनके लिए आरक्षित सीटों पर ही चुनावी समर में उतारा जाता है।

 

आेपन सीट से महज 5 से 7 फीसदी महिलाएं ही जीत कर पंचायतें संभालती है। राज्य के पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने माना कि विभाग में एक्ट में संशोधन लाने का काम चल रहा है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे मंजूरी के लिए सरकार के पास लाया जाना है।

 

खुद भी पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं जयराम

हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पूर्व में धूमल सरकार के समय में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। उनके समय में भी इसका प्रस्ताव तो बना था, लेकिन कैबिनेट में सहमति नहीं बन सकी थी। इस कारण विभाग की योजना फाइलों में ही सिमटी रही। 2007 से 2012 तक रही धूमल सरकार में अपना भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह मंत्रीमंडल में शामिल हुए थे। पूर्व सरकार में पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा अब जयराम सरकार में ऊर्जा मंत्री है। उनके कार्यकाल में भी इसका प्रस्ताव तैयार किया था।
 

राज्य में 3226 पंचायतें, 2020 में होने हैं चुनाव

हिमाचल में अगले पंचायती चुनाव 2020 में होने हैं। 2015 में हुए चुनाव में चुने गए प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2020 में खत्म हो रहा है। राज्य सरकार के एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव सिरे चढ़ा तो अगले पंचायत चुनाव में हिमाचल में पहली बार दस सालों के लिए होंगे।

 

तीन साल के बाद काम में रुचि नहीं लेते प्रतिनिधि

पंचायती राज विभाग का तर्क हैं कि तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रतिनिधियों को लगता है कि अगली बार तो पंचायत आरक्षित होंगी। इससे कार्यों में रूचि कम हो जाती है। इसमें भविष्य में सुधार हो सके, इसलिए समयावधि को बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। 

 

बिना सिंबल के हो रहे चुनावों का भी रहता है राजनीतिक महत्व

राज्य पंचायत आैर स्थानीय निकायों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्हों पर नहीं होते हैं। हर प्रत्याशी को राज्य चुनाव आयोग की आेर से सिंबल दिया जाता है। इसके बावजूद राजनीतिक दलों आैर राजनेताओं का इसमें सीधे दखल रहता है। हिमाचल में पंचायत चुनावों के बाद कांग्रेस आैर भाजपा की आेर से जीत के दावे किए जाते हैं। हालांकि राज्य में पंचायत चुना-वो में किसने बाजी मारी, यह तस्वीर जिला परिषद आैर बीडीसी के गठन के बाद ही साफ होती है। इसमें दोनों राजनैतिक दलों की आेर से पूरा जोर लगाया जाता है कि उनके समर्थित नेता की ताजपोशी हो।

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