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चंडीगढ़. भारतीय क्रेडिट सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2019 तक देश में कुल लोन लेने वालों में महिलाओं की संख्या 26 फीसदी रही जबकि सितंबर 13 में ये आंकड़ा 21 फीसदी था। करीब 1 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। ट्रांसयूनियन सिबिल की स्टडी के अनुसार ट्राईसिटी में भी महिलाओं में अलग अलग तरह के क्रेडिट लेने का ट्रेंड बढ़ा है। बीते साल में देश में 30 मिलियन महिलाओं ने विभिन्न तरह के लोन लिए हैं। 2019 में महिला उधारकर्ताओं द्वारा 6.3 मिलियन खाते खोले गए। यह संख्या पिछले 6 वर्षों में 6 गुना बढ़ी है। 2013 में महिला उधारकर्ताओं द्वारा खोले गए 1.1 मिलियन खाते थे।।
फाइनेंशियल अवेयरनेस भी बढ़ी
ट्रांसयूनियन सिबिल की सीईओ हर्षला चंदोरकर ने बताया कि हर्षला ने बताया कि महिला उधारकर्ताओं के बीच जागरूकता और लोन उत्पादों की समझ भी बढ़ी है। वर्ष 2018 से 2019 के बीच स्वयं निर्णय लेने वाली महिलाओं की संख्या में 62 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह स्वयं निर्णय लेने वाले पुरुष उपभोक्ताओं की वृद्धि दर से दोगुनी है। अपने सिबिल स्कोर और रिपोर्ट की जांच के तीन महीने के भीतर, 52फीसदी महिला उपभोक्ता कम से कम एक ऋण खाते या क्रेडिट कार्ड के लिए (केवल पूछताछ) आवेदन करती हैं। इसके अतिरिक्त, समग्र आधार पर 35 फीसदी महिलाएं वास्तव में ऋण खाता खोलने या क्रेडिट कार्ड का लाभ उठाने के लिए पहल करेंगी।
क्रेडिट प्रोफाइल भी सुधार रही हैं महिलाएं
महिलाओं ने क्रेडिट को लेकर अपनी समझ का भी परिचय दिया है और अपने सिबिल स्कोर व रिपोर्ट की जांच के छह महीने के भीतर, उनमें से 45 फीसदी ने अपने क्रेडिट प्रोफाइल (सिबिल स्कोर) में सुधार किया है। यह सुनिश्चित करता है कि ऋण की सबसे अधिक आवश्यकता होने की स्थिति में, वो ऋण का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
किस-किस जरूरत के लिए महिलाएं ले रही हैं लोन
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