चंडीगढ़-पंजाब / इस बार पंजाब सरकार को फिर मिला कृषि कर्मण अवॉर्ड

अवॉर्ड दिखाते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य अवॉर्ड दिखाते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य
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अवॉर्ड दिखाते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्यअवॉर्ड दिखाते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2017-18 के दौरान पंजाब में धान की 199.65 लाख मीट्रिक टन रिकार्ड पैदावार हेतु दिया गया अवॉर्ड

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 04:19 PM IST

चंडीगढ़.पंजाब सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, पंजाब के किसान भी उनको पूरे जोश के साथ आगे बढ़ा रहा हैं। कई क्षेत्रों में किसान अपने स्तर पर भी प्रयास कर लगातार कृषि को बदल रहे हैं और उनके इन प्रयासों को पंजाब सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक मान्यता प्रदान करते हुए सम्मानित कर रही है।


हाल ही में पंजाब के दो किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा है। 2 जनवरी को केंद्र सरकार की तरफ से कृषि दिवस पर बैंगलुरू में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयेाजित किया गया था। इस दौरान सम्मानित अमृतसर की हरिंदर कौर के नाम खराब मौसम में भी 1 एकड़ में 19 क्विंटल बासमती फसल का रिकॉर्ड है तो फतेहगढ़ के सुरजीत सिंह 20 साल पहले पराली जलाना छोड़कर ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि कर्मण पुरस्कार दिया। इसमें 2-2 लाख रुपए का इनाम भी है।


45 एकड़ जमीन के मालिक जिला फतेहगढ़ साहिब के गांव साधुगढ़ के अग्रणी किसान सुरजीत सिंह साधुगढ़ ने बताया कि 20 साल पहले सन 2001 में उन्होंने अपने खेतों में पराली को आग लगाना बंद कर दिया था। जहरीली खादों का इस्तेमाल भी बंद करके ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी थी। इसके अलावा 2006 में सारी जमीन को रेनगन (फव्वारा सिस्टम) से पानी लगाना शुरू कर दिया, जिससे पानी की बचत होने लगी।


इस बारे में सुरजीत सिंह ने बताया कि पराली को खेतों में मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। उन्होंने कहा कि अगले साल 45 क्विंंटल उपज हासिल करने का लक्ष्य है। जब से वह आर्गैनिक खेती करने लगे हैं, तब से उनके खर्चे कम हो गए हैं और पानी की बचत भी हो रही है। उन्होंने बताया कि फव्वारा सिस्टम लगाने पर सरकार द्वारा 75 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। पराली को आग न लगाने से पर्यावरण शुद्ध होता है, जो पराली खेतों में मर्ज की जाती है, वह खाद बन जाती है।


पति के निधन के बाद है 3 बच्चों की जिम्मेदारी
अमृतसर के वेरका इलाके में बलबीरपुरा की किसान हरिंदर कौर 33 एकड़ जमीन की मालिक हैं। 1998 में कमलजीत सिंह के साथ शादी हुई और फिर 2000 में परिवार गांव बलबीरपुरा आ गया। 2007 में पति के निधन के बाद हरिंदर कौर ने 3 बच्चों के भरण-पोषण का जिम्मा पूरी तरह से अपने कंधों पर उठा लिया। वर्ष 2017-18 के सीजन में हरिंदर ने अपने खेत में धान लगाई थी। खराब मौसम की वजह से जहां प्रदेश के ज्यादातर किसानाे की फसल को क्षति पहुंची, वहीं बावजूद इसके हरिंदर ने एक एकड़ में बासमती 1509 की 19 क्विंटल फसल उठाई। आम तौर पर एक एकड़ में 22 क्विंटल फसल होती है, पर खराब मौसम में यह बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा हरिंदर कौर बताती हैं कि वह पराली जलाने की बजाय खेत में ही इस्तेमाल करती हैं।

(उपरोक्त कंटेंट दैनिक भास्कर स्पेस मार्केटिंग इनिशिएटिव के अंतर्गत पंजाब सरकार से लिया गया है)

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