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पंजाबी सिंगर हरभजन मान बोले- संगीत समाज पर असर नहीं डालता, यह तर्क गलत है

5 महीने पहले
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हरभजन मान। - फाइल
  • पीयू की इंटरनेशनल काॅन्फ्रेंस में यूथ से रू-ब-रू हुए पंजाबी गायक
  • बोले- राजनीतिक सिस्टम, लीडर, धर्म हों या कला, सभी धंधा बन गए हैं
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चंडीगढ़. लेनिन का कहना था कि “यदि किसी समाज को खत्म करना है तो उसके संगीत को बिगाड़ दो, उसको घटिया संगीत का नशा दो, वो खुद ही खत्म हो जाएगा’। दूसरी बात कि “यदि आप किसी देश के हर यूथ के मुंह पर चढ़े पहले पांच गाने बता दो तो मैं उस समाज का भविष्य बता सकता हूं’। ये सच है, इसलिए ये कह कर नहीं छूटा जा सकता कि गानों में नशे और हथियारों की बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।


ये कहना था पंजाबी गायक हरभजन मान का। वे पंजाब यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स और मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट की ओर से “कन्वर्सेशन फॉर चेंज : ह्यूमन राइट्स, यूथ एंड ड्रग्स’ विषय पर हो रहे इंटरनेशनल सेमिनार के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हथियारों वाले गीत गाने वाले ये तर्क जो देते हैं कि पहले भी ऐसे गीत गाए जाते रहे हैं लेकिन ये किस्से उन्होंने भी सुने हैं। याद रखें कि उनमें बंदूकों की बड़ाई नहीं बल्कि उन लोगों का संघर्ष है। उसमें वायलेंस या वल्गैरिटी नहीं है।


मान ने अपने आने की कहानी कहते हुए कहा कि वह ऐसे मंच पर आने से घबरा रहे थे जहां ढेरों स्कॉलर्स हैं। लेकिन एक दिन सुबह कुछ स्टूडेंट्स उनके घर के बाहर खड़े थे कि जिन्होंने कहा कि सभी पंजाबी सिंगर्स में से इस मंच पर हरभजन मान ही आ सकते हैं। यंगस्टर्स अच्छे संगीत, शायरी या लिट्रेचर से दूर माने जाते हैं लेकिन ये यंगस्टर अलग थे इसलिए वे आ गए। वे कनाडा में पले और सिर्फ सिंगर ही बनना चाहते थे। स्कूल पूरा करने की शर्त पूरी की और भारत आकर अपना पैशन जीना शुरू किया। यही शर्त उनके बेटे के लिए है जो इंग्लिश और पंजाबी में गाता है।

संगीत का कोई फायदा नहीं, अगर परिवार का प्यार न हो
मान ने कहा कि ड्रग्स की समस्या गंभीर है और इस समय राजनीतिक सिस्टम, लीडर, धार्मिक अदारे हों या कला, ये सभी धंधा बन गए हैं। ये कमाई का साधन हो गए हैं। संगीत उनके लिए भी रोजी रोटी था लेकिन वह खुशकिस्मत रहे कि उनको उस्ताद ऐसे मिले कि सोशल ऑब्लिगेशन बनी रही। कहते हैं कि उनकी तीन बहनें हैं और एक बेटी हुई। वह हर गाना, वीडियो और फिल्म शूट के बाद रिलीज से पहले उन्हें दिखाते हैं। यही सेंसर है और नहीं। कहते हैं कि संगीत का कोई फायदा नहीं, अगर महबूबा या परिवार का प्यार न आया।

इमोशंस कभी नहीं बदलते
हरभजन ने कहा कि अपने संगीत के कारण ही वे 30 साल बाद भी एक महीने में 18-18 दिन शो करते हैं। नई पीढ़ी सोचती है कि पुराने लोगों को कुछ नहीं पता लेकिन ये याद रखें कि लाख टेक्नोलॉजी आ जाए, बदलाव हों लेकिन इमोशन नहीं बदलते। गूची, स्वैग और आह मेरी गड्डी... जैसे गाने कैसे याद रहेंगे क्योंकि ये सभी चीजें बेजान हैं। बचपन में उनके कानों में ऐसा संगीत पड़ा कि वह सोचते थे कि भगत सिंह नहीं बन सकते लेकिन उनके जैसा तो बनें। लेकिन आज का संगीत खतरनाक मोड़ पर आ गया है। इसके बाद उन्होंने कविशरी “जग जंक्शन रेलां दो गड्डी इक आवे इक जावे...’ और गल्लां गोरियां सुनाया।

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