चंडीगढ़ / नेशनल पोर्टल से जुड़ेगा चंडीगढ़ का रियल टाइम एयर पॉल्यूशन डाटा, तीन और माॅनिटरिंग सेंटर बनेंगे



एयर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का लोगो एयर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का लोगो
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एयर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का लोगोएयर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का लोगो

  • सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेबसाइट में जाकर कर सकेंगेे चेक
  • व्हीकल डेंसिटी को लेकर रिपोर्ट चंडीगढ़ की जोन वाइज तैयार की जाएगी

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 11:42 AM IST

चंडीगढ़. यूटी चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन को लेकर जानकारी आप भी जल्द ही एक क्लिक पर ले सकेंगे। इसके लिए नेशनल पोर्टल के साथ चंडीगढ़ का रियल टाइम बेस्ड डाटा एयर को लेकर देखा जा सकेगा। दरअसल चंडीगढ़ में एक रियल टाइम मानिटरिंग सेंटर एयर क्वालिटी को लेकर सेक्टर-25 में पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में बनाया गया है। जिसको शुरू किया जा चुका है।

 

अब इस सेंटर से आ रहे डाटा को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पोर्टल के साथ कनेक्ट किया जाएगा। दरअसल नेशनल पोर्टल में देश के लगभग सभी बड़े शहर जोड़े गए हैं, जहां का डाटा आप कहीं से भी एयर क्वालिटी को लेकर देख सकते हैं।

 

वहीं चंडीगढ़ प्रशासन इसी तरह के रियल टाइम बेस्ड एयर मानिटरिंग सेंटर तीन और चंडीगढ़ में शुरू करेगा, जिसमें से एक इंडस्ट्रियल एरिया दूसरा सेक्टर-26 के एरिया में और तीसरा सेक्टर-17 की तरफ को बनाया जाना है।

 

एक एक्शन प्लान बनाया गया है जिसको केंद्र सरकार ने अप्रूव कर दिया है। इसके प्रोविजन को इंप्लीमेंट किया जा रहा है। एक स्टडी पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज से प्रशासन करवा रहा है, जिसमें व्हीकल डेंसिटी को लेकर रिपोर्ट चंडीगढ़ की जोन वाइज तैयार की जाएगी।

 

चंडीगढ़ में एयर पाॅल्यूशन के सोर्सेज क्या हैं, इसमें गाड़ियों का शेयर कितना है और बाकी चीजें या एक्टिविटी जो यहां की एयर क्वालिटी को खराब कर रही है उसमें क्या क्या है इसको लेकर एक स्टडी अब पूरे शहर की करवाई जानी है।

 

चंडीगढ़ में भी एयर क्वालिटी लगातार खराब हो रही है और केंद्र सरकार ने भी बाकी शहरों के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन को एयर पाॅल्यूशन को कम करने के लिए कहा है, जिसके लिए हाल ही में 10 करोड़ रुपए की ग्रांट भी दी गई है।

 

इसका कारण ये कि पिछले पांच वर्षों में चंडीगढ़ की हवा में रेस्पीरेबल सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर्स (हवा में बहुत छोटे छोटे कण जो कई बीमारियों का कारण बनते हैं) का लेवल परमिशेबल लिमिट से ज्यादा रहा है। जिसके चलते अगले तीन वर्षों में 35 परसेंट तक पाॅल्यूशन को कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

 

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