पंजाब / पहली बार सरकार के कार्यकाल का प्रोफेसर्स के पैनल से रिव्यू और साथ में मार्क्सशीट

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 05:40 AM IST


मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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  • प्रोफेसर्स से रिव्यू इसलिए...क्योंकि आम चुनाव की घोषणा हो चुकी है, शिक्षक किसी दल के समर्थक या विरोधी नहीं होते
  • नशा पकड़ना उपलब्धि नहीं, तस्करी के रास्ते अब भी खुले रोजगार मेले लगाए, पर एक भी नई सरकारी भर्ती नहीं

जालंधर. 16 मार्च 2017 में जब देशभर में मोदी की लहर चल रही थी तब पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के 10 साल के राज को खत्म कर पंजाब में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनवाई थी। कारण, पंजाबियो ने कैप्टन अमरिंदर पर पूरा भरोसा जताया था। अब दो साल की कैप्टन सरकार पंजाब के भरोसे पर कितना खरा उतरी, इसको जानने के लिए भास्कर ने पहली बार किसी सरकार के कार्यकाल की समीक्षा उस वर्ग से करवाई, जो अमूमन किसी दल या संगठन के न तो समर्थक माने जाते हैं और न ही विरोधी।

 

इसीलिए 5 वरिष्ठ प्रोफेसर्स के पैनल ने सरकार के कार्यकाल का उसी शैली में रिव्यू किया, जिस तरह वो छात्रों के पेपर जांच कर उन्हें ग्रेडिंग देते हैं। प्रोफेसर का मानना है कि नशा सप्लाई का रूट खत्म नहीं हुआ। युवाओं को नई नौकरियां नहीं मिलीं। जन योजनाओं और कृषि में कुछ काम हुआ है। पढ़िए...सरकार को किस प्रोफेसर ने क्या ग्रेड दिया...

 

रोजगार- घर-घर नौकरी नहीं मिल पाईं

काग्रेस का नारा था ‘घर-घर नौकरी, हर घर नौकरी’। हर साल 1.61 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा था। नौकरी नहीं तब तक 2500 बेरोजगारी भत्ता। दो साल में 5.75 लाख को रोजगार का दावा भी कर दिया। ये प्राइवेट जॉब हैं, जो युवा वैसे भी ढूंढ लेते हैं।- -डा. लखविंदर गिल, (इकनॉमिक्स डिपार्टमेंट हेड, पंजाबी यूनिवर्सिटी)

 

शिक्षा-औद्योगिक संस्थाएं बढ़ीं, छात्र नहीं

स्कूलों में 1.73 लाख विद्यार्थियों के दाखिले के लिए प्री-प्राइमरी कक्षाएं आरंभ की गईं।  यह अच्छा है। 15 नए डिग्री कॉलेज और 15 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाएं स्थापित की जा रही हैं। लेकिन छात्रों की संख्या नहीं बढ़ रही है। फैकल्टी भी पूरी नहीं है।- -डा. कुलदीप सिंह, (प्रो. पंजाबी यूनिवर्सिटी, पंजाबी यूनिवर्सिटी)

 

जन योजनाएं- पेंशन, 5 मरले के प्लॉट नहीं

20.6 लाख लाभार्थियों को मासिक पेंशन, वृद्धाश्रमों के लिए 31 करोड़, आशीर्वाद योजना में राशि 21 हजार की गईं और गांव में बेघर लोगों को 5-5 मरले के प्लॉट देने की बाते हो रहीं हैं। लेकिन सरकार इन्हें पूरा करने खजाना न होने का रोना रो रही है। -डॉ. कहर सिंह, (पाॅलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट पंजाबी यूनिवर्सिटी)

 

नशा- बड़े तस्करों पर कार्रवाई नहीं

गुटखा साहिब की शपथ लेकर नशे की कमर तोड़ने का वादा करने वाले कैप्टन ने बड़ी मछलियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। सूबे में प्रतिदिन 29 मामले (हर प्रकार के नशे) के आ रहे हैं। यानी सूबे में सप्लाई बदस्तूर जारी, जिसे रोकना बड़ी चुनौती। --डॉ. दीपक कुमार, (हेड समाजशास्त्र विभाग)

 

कृषि- किसानों की आय नहीं बढ़ पा रही

2 साल में 4736 करोड़ का कर्ज माफ, 5.38 लाख किसानों को राहत का दावा है। फिर भी किसान जान दे रहे। क्योंकि किसी का हजार माफ है, किसी का 500रु.। 5 लाख माफ करे।  - -डॉ. केसर सिंह भंगू, (इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट पंजाब यूनिवर्सिटी)

 

पैनल के सुझाव

  • सरकारी नौकरियों के लिए ऐसी पॉलिसी बने, जिससे कुछ-न-कुछ युवाओं को हर साल नौकरी मिले। 
  • नशे को लेकर रिसर्च की भी जरूरत है। सोशल वर्क डिपार्टमेंट से सहयोग ले सकते हैं। 
  • किसानों का ऋण माफ ही करना है तो यह 5 लाख तक हो।
  • 12वीं तक का स्कूली सिस्टम पूरा बदलें।

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