धरोहर / एसबीआई ने बनाई हैरिटेज गैलरी, 50 साल पहले इस्तेमाल होने वाले बैंकिंग सामान प्रदर्शित

हैरिटेज गैलरी एसबीआई के लोकल हेड ऑफिस स्थित पांचवीं मंजिल पर बनाई गई है। हैरिटेज गैलरी एसबीआई के लोकल हेड ऑफिस स्थित पांचवीं मंजिल पर बनाई गई है।
गैलरी में 50 साल पुरानी चीजों को प्रदर्शित किया गया है। गैलरी में 50 साल पुरानी चीजों को प्रदर्शित किया गया है।
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हैरिटेज गैलरी एसबीआई के लोकल हेड ऑफिस स्थित पांचवीं मंजिल पर बनाई गई है।हैरिटेज गैलरी एसबीआई के लोकल हेड ऑफिस स्थित पांचवीं मंजिल पर बनाई गई है।
गैलरी में 50 साल पुरानी चीजों को प्रदर्शित किया गया है।गैलरी में 50 साल पुरानी चीजों को प्रदर्शित किया गया है।

  • आजादी से पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कहलाता था इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया
  • पुराने समय में ग्राहकों को नंबर लगाने के लिए ब्रास के टोकन दिए जाते थे

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 12:42 PM IST

चंडीगढ़. आजादी से पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया होता था। इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 27 जनवरी 1921 को हुई थी। उस दौरान बैंकों में जो सामान इस्तेमाल होता था, उसे यहां विशेष तौर पर डिस्प्ले किया गया है। हैरिटेज गैलरी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लोकल हेड ऑफिस स्थित पांचवीं मंजिल पर बनाई गई है।

गैलरी में दिखाया गया है कि आज किस तरह डिजिटिलाइज्ड काम हो रहा है और उस जमाने में किस तरह से कंप्यूटर की बजाए लेजर में हर खाते की एंट्री होती थी। किस तरह से मैनुअल काम होता था। एक एंट्री को करने में कितना वक्त लगता था। यहां तक गोल्ड रखने के लिए उसे तौलने के लिए तराजू का इस्तेमाल होता था। उस तराजू को भी यहां डिस्प्ले किया गया है। बैंक के काम में आने वाले अन्य सामान को बखूबी दिखाया गया है। यह गैलरी इस रीजन की पहली ऐसी गैलरी है जहां पर इन सब 50 साल पुरानी चीजों को दिखाया गया है।

1920 में ग्राहकों को दिए जाते थे ब्रास के टोकन
हैरिटेज बैंक गैलरी में 1920 के दशक में लेजर इस्तेमाल होते थे। इसमें कलम और दवात से एंट्री की जाती थी। इसके अलावा ओल्ड चेक कैसे होते थे, कस्टमर को अपने काम की बारी का इंतजार करने के लिए ब्रास के टोकन दिए जाते थे। इसके अलावा ओल्ड एफडीआर, ब्रांच में किस तरह की सील, गोल्ड को बैंक के लॉकर में रखने के लिए उसे तौलने के लिए किसी डिजिटल तराजू का नहीं बल्कि मेनुअल तराजू का इस्तेमाल होता था। उस जमाने में किस तरह की एफडीआर होती थी।

1955 में बदला गया नाम

1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया हुआ। उस बदलाव शुरू हुए। आज बैंक नेशनलाइज्ड डिजिटाइज्ड बैंकों में नंबर 1 पर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चीफ जनरल मैनेजर राणा आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि योनो जिस तरह से लोगों की जरूरतों को तेजी से पूरा कर रहा है। उसमें फीचर्स भी बढ़ाए जा रहे हैं। इसके पीछे बैंक का उद्देश्य बैंक के कामकाज को पूरी तरह से डिजिटाइज्ड करना है। हाल ही में हमने पटियाला के एक गांव को एडॉप्ट किया है।

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