चंडीगढ़ / अयोध्या विवाद मामले में सीनियर एडवोकेट सत्यपाल जैन ने की थी 14 साल पैरवी



सतपाल जैन, साथ में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके अडवानी सतपाल जैन, साथ में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके अडवानी
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सतपाल जैन, साथ में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके अडवानीसतपाल जैन, साथ में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके अडवानी

  • 6 दिसंबर 1992 काे विवादित ढांचे के तीनों गुंबदों को तक कार सेवा के रूप में मौजूद जैन ने अपनी आंखों से गिरते देखा

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 11:29 AM IST

चंडीगढ़. 6 दिसबर 1992 काे अयोध्या में जब विवादित ढांचा गिराया गया ताे उसकी जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक अायाेग बनाया था। जिसकी अध्यक्षता जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान ने की थी, जाे कि चंडीगढ़ के ही रहने वाले हैं। इस समय भी चंडीगढ़ में रह रहे हैं।

 

उन्होंने लगभग 14 वर्ष में अपनी जांच पूरी की अाैर 2006 में अपनी रिपोर्ट केंद्र काे साैंपी। चंडीगढ़ के पूर्व सांसद अाैर वरिष्ठ एडवोकेट सत्यपाल जैन ने इस कमीशन के सामने भारतीय जनता पार्टी अाैर विशेष ताैर पर लाल कृष्ण अाडवाणी, डाॅ. मुरली मनाेहर जाेशी, साध्वी उमा भारती सहित विभिन्न नेताओं की पैरवी की।

 

6 दिसंबर 1992 काे जब विवादित ढांचा गिरा था, तब एक कार सेवक के रूप में अयोध्या में मौजूद थे। जैन ने बताया कि उन्होंने एक के बाद एक तीनों गुंबद गिरते हुए अपनी अांखाें से देखे। उनका कहना है कि कार सेवायें का एक बहुत बड़ा तबका उस दिन राम मंदिर के निर्माण के लिए किसी भी सीमा तक जाने काे तैयार था।

 

जब लिब्रहान अायाेग का गठन हुअा ताे भाजपा हाईकमान ने उन्हें दिल्ली बुलाया अाैर उस बैठक में लाल कृष्ण अाडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेतली, डा. जाेशी सहित सभी प्रमुख नेता उपस्थित थे अाैर वहां यह निर्णय लिया गया कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की अाेर से सत्यपाल जैन इस कमीशन में पैरवी करेंगे।


तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव ने ढांचे काे लेकर स्वीकारी थी गलती:  जैन बताते हैं कि उन्हें लखनऊ भेजा गया, जहां कल्याण सिंह के घर पर एक बैठक हुई, जिसमें यूपी के सभी प्रमुख भाजपा नेता उपस्थित थे। यहां पर इस केस के संबंध में क्या स्टेंड लेना है इसकी चर्चा हुई। उसके बाद जैन अयोध्या गए जहां एक बार फिर सारी स्थिति काे अपनी अांखाें से देखा। जैन ने बताया कि उन्होंने पूरे 14 वर्ष कमीशन में पार्टी की पैरवी की अाैर अाये हुए गवाहों की जिरह भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें याद है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने अपने बयान में कहा कि उस दिन जाे ढांचा गिराया गया वाे बाबरी मस्जिद था, ताे इस पर उन्होंने नरसिम्हा राव काे भारत सरकार की अाेर से जारी श्वेत पत्र दिखाया, जिसमें उस स्थान : राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवादित ढांचा: बताया गया था। इस पर नरसिम्हा राव ने पूरी शालीनता से अपनी गलती काे स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इससे उनके मन में नरसिम्हा राव के प्रति अादर बढ़ा।


सु्प्रीम कोर्ट का फैसला न्यायसंगत व धर्मनिरपेक्ष, जज बधाई के पात्र हैं: जैन ने बताया कि सुप्रीम काेर्ट का जाे निर्णय अाया है वाे बहुत ही संतुलित अाैर पूरी तरह से न्यायिक मर्यादाओं से भरपूर है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम काेर्ट के जज बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने सर्व सम्मति से इतने लंबे अर्से से चले अा रहे विवाद काे पूर्ण कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद बहुत ही सहजता से हल कर दिया। यह भारत की जनता की, भारत के संविधान की, भारत की धर्मनिरपेक्षता की तथा भारतीय न्यायपालिका की विजय है। चंडीगढ़ के पूर्व सांसद अाैर वरिष्ठ एडवोकेट सत्यपाल जैन ने इस कमीशन के सामने भारतीय जनता पार्टी अाैर विशेष ताैर पर लाल कृष्ण अाडवाणी, डाॅ. मुरली मनाेहर जाेशी, साध्वी उमा भारती सहित विभिन्न नेताओं की पैरवी की।
 

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